आपकी बात: ‘भरोसे’ पर टिका चुनाव

0 संजीव वर्मा 
प्रदेश में विधानसभा चुनाव के तहत पहले चरण में मंगलवार को 20 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान संपन्न हो गया। वहीं, बचे 70 विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दोनों प्रमुख पार्टियां कांग्रेस-भाजपा ने अपना-अपना घोषणा-पत्र भी जारी कर दिया है। कांग्रेस ने जहां भरोसे का घोषणा-पत्र नाम दिया है, तो भाजपा, इसे मोदी की गारंटी बता रही है। दोनों पार्टियां अपने-अपने घोषणा-पत्र के जरिये लोगों को रिझाने में लग गई है। लेकिन, जनता कांग्रेस के ‘भरोसे’ पर भरोसा जताएगी या मोदी की ‘गारंटी’ पर ऐतबार करेगी, यह तो आने वाला समय बताएगा। फिलहाल कांग्रेस-भाजपा के बीच ‘तू डाल-डाल, मैं पात-पात’ की कहावत चरितार्थ हो रही है। भाजपा के घोषणा-पत्र से कांग्रेस का घोषणा पत्र इक्कीस नजर आ रहा है। हालांकि, दोनों ने गांव, गरीब, किसान, युवा और महिलाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। लेकिन, कांग्रेस ने किसानों का कर्जा माफ और मुफ्त बिजली बिल की घोषणा कर भाजपा को पीछे छोड़ दिया है। साथ ही भाजपा के 3100 सौ रूपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की घोषणा पर कांग्रेस ने 3200 का दांव खेला है। उसने केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा देने के साथ ही जातीय जनगणना कराने का भी वादा किया है। यही नहीं, गरीबी रेखा से नीचे के लोगों का 10 लाख और सामान्य वर्ग के लोगों का 5 लाख रूपये तक इलाज की घोषणा कर यह बताते का प्रयास किया है कि उसका घोषणा-पत्र सभी वर्गों के लिए है। जबकि, भाजपा ने किसानों की कर्जमाफ की जगह किसानों को कर्जमुक्त करने की बात कही है। अब जबकि दोनों दलों का घोषणा-पत्र आम जनता के सामने आ गया है तो उसे यह तय करना है कि वह किस पर विश्वास करे। निश्चित रूप से दोनों पार्टियों का घोषणा-पत्र लुभावना और जनता के हित में नजर आ रहा है। किसी में कोई कमी नहीं दिख रही है। ऐसे में जनता के सामने, दोनों के बीच फर्क करना मुश्किल हो गया है। वह असमंजस में है किसे चुने? ऐसे में जनता के भरोसा और विश्वास की कसौटी पर जो भी खरा उतरेगा, जनता उस पर विश्वास करेगी। हालांकि, दोनों दल जनता के भरोसे पर खरा उतरने का दावा कर रही है। भाजपा को मोदी की ‘गारंटी’ पर भरोसा है, तो कांग्रेस को भूपेश सरकार के पिछले 5 सालों में पूरा किए गए वादों पर। जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो वह पिछले कुछ सालों में गांव-गरीब और किसानों का भरोसा जीतने में सफल रही है। उसने किसानों से किए गए कर्जमाफी और 2500 रूपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी का अपना वादा पूरा किया है। साथ ही हाफ बिजली बिल और बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता भी दे रही है। ऐसे में उसे उम्मीद है कि उसे पुनः किसानों और युवाओं का समर्थन मिलेगा। वहीं, भाजपा, राज्य सरकार की नाकामियों को गिना रही है। उसका कहना है कि कांग्रेस सरकार, जनता से किए अपने वादों को पूरा नहीं कर पाई है। ऐसे में जनता का उससे विश्वास पूरी तरह खत्म हो गया है और वह भाजपा पर अपना भरोसा जताएगी। इससे इतर कांग्रेस, भाजपा सरकार के पिछले 15 सालों के कार्यकाल की भी याद दिला रही है। वह डॉ. रमन सिंह सरकार द्वारा किसानों को बोनस नहीं दिए जाने का मुद्दा उछाल रही है। ऐसे में ‘विश्वास’ एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। इस कसौटी पर कौन खरा उतरेगा, यह तो चुनाव परिणाम के बाद पता चलेगा। लेकिन, भाजपा के सामने ‘विश्वास’ का संकट जरूर दिख रहा है। अब वह इससे कैसे निपटेगी यह देखना होगा? चुनाव प्रचार से तो लग रहा है कि पूरी भाजपा ‘मोदी की गारंटी’ पर ही आश्रित है। मोदी अपने भाषणों में इसे रेखांकित भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में भाजपा की सरकार बनी तो सभी वादे पूरे किए जाएंगे। यह मोदी की गारंटी है। दूसरी ओर, कांग्रेस को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर भरोसा है। ‘भरोसा बरकरार फिर से कांग्रेस सरकार’ के नारे के साथ वह प्रदेश की सभी विधानसभाओं में प्रचार में लगी है। उसका फोकस किसानों की कर्जमाफी, 3200 रूपये क्विंटल में धान खरीदी, मुफ्त बिजली बिल के साथ युवाओं पर केंद्रित है। ऐसे में अब सारा दारोमदार आम जनता पर निर्भर है कि वह कांग्रेस के ‘भरोसे की सरकार’ पर भरोसा करे या फिर मोदी की ‘गारंटी’ पर। लेकिन, इतना तय है कि यह चुनाव ‘भरोसे’ पर आ टिका है और इस भरोसे पर कौन खरा सोना साबित होगा, यह चुनाव परिणाम से पता चल सकेगा।