0 संजीव वर्मा
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विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। कांग्रेस और भाजपा ने अपनी-अपनी चुनावी बिसात बिछाना तेज कर दिया है। राज्य में दो चरणों में मतदान होगा। अगले महीने यानि नवंबर में 7 और 17 तारीख को मतदाता अपना जनादेश इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में बंद कर देंगे और मतगणना के साथ ही 3 दिसंबर को पता चल सकेगा कि राज्य में अगली सरकार किसकी बनेगी। अब प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। दोनों प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा में घात-प्रतिघात का दौर शुरू हो गया है। भाजपा ने बीते सोमवार को 64 प्रत्याशियों की दूसरी सूची जारी कर टिकट वितरण में कांग्रेस से बाजी मार ली है। इससे पहले वह डेढ़ महीने पहले कमजोर मानने वाली 21 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है। कांग्रेस ने अपनी परंपरा के अनुरूप एक भी सीट पर प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। संभवत: वह पितृ पक्ष के बाद घोषणा करेगी। ऐसे में टिकट चाहने वालों में धुकधुकी है। कहा जाता है कि कांग्रेस की टिकट और मौत को कोई नहीं जानता। कब किसकी लाटरी लग जाए और कब कौन बेटिकट हो जाए और किसकी चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर ही कुठाराघात हो जाए कोई नहीं जानता। ऐसे में दावेदारों में घबराहट होना और उनकी दिल की धड़कन बढ़ जाना स्वाभाविक है। वैसे पितृपक्ष समाप्ति की ओर है। 15 अक्टूबर से नवरात्रि पर्व शुरु होने वाला है। ऐसे में कांग्रेस नवरात्रि में टिकट का ऐलान कर सकती है। जहां तक भाजपा का सवाल है तो पहली सूची जारी होने के बाद उसकी कथित दूसरी सूची के अचानक सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद जिस तरह से पार्टी के अंदर और बाहर बवाल मचा था उससे पार्टी के शीर्ष नेता सकते में आ गए थे। हालांकि जो अधिकृत सूची जारी हुई है। उसमें वही नाम हैं,जो वायरल सूची में थे। राजनीतिक गलियारों में ऐसी खबरें भी थी कि भाजपा नेताओं ने जान बूझकर सूची वायरल कर दी थी, ताकि प्रत्याशियों के बारे में कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया सामने आ सके। वायरल सूची के बाद जिन सीटों पर ज्यादा बवाल मचा था उनमें, राजधानी रायपुर की उत्तर सीट के अलावा धरसींवा, आरंग, बसना, बेमेतरा और साजा की सीट शामिल थी। कई विधानसभा सीटों से कार्यकर्ता राजधानी स्थित भाजपा कार्यालय पहुंचकर अपना विरोध भी जता चुके थे। ऐसे में संभावना थी कि कुछ सीटों में नामों पर फेरबदल होगा। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और भाजपा आलाकमान ने वही सूची जारी कर दी जो सोशल मीडिया में वायरल हुई थी। इसके ठीक उलट कांग्रेस में फिलहाल तूफान आने के पहले की शांति है। कोई कुछ बोल नहीं रहा है। सबको सूची का इंतजार है। माना जा रहा है कि कांग्रेस दो से तीन चरणों में प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। वह फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। दरअसल सत्तारूढ़ पार्टी होने के नाते कांग्रेस में 15-20 सीटों को छोड़ दें तो लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में टिकट के दावेदारों की लंबी सूची है। हालांकि वर्तमान विधायकों को टिकट दिए जाने की खबरों के बाद अन्य दावेदारों में मायूसी दिख रही है। लेकिन पार्टी ने जिस तरह से टिकट के लिए गाइडलाइन जारी कर आवेदन मंगाए हैं, उससे लगता है कि कुछ नया होने वाला है। अंदरखाने की खबर है कि करीब डेढ़ दर्जन विधायकों की टिकट कटने वाली है। इसमें पहली बार के विधायकों की संख्या ज्यादा है। साथ ही खराब प्रदर्शन करने वाले दो से तीन बार के विधायकों के साथ विवादों में रहने वाले विधायकों को भी बाहर का रास्ता दिखा सकती है। बहरहाल, राजनीतिक लोगों के साथ ही आम जनता को भी प्रत्याशियों की सूची का बेसब्री से इंतजार रहता है। आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी सहित अन्य छोटे-छोटे दल भी अपने-अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर रहे हैं। लेकिन आम लोगों की नजर अब कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची पर है। आम आदमी पार्टी इस बार सिर्फ वोट कटवा की भूमिका में ही दिख रही है। जबकि बसपा और जनता कांग्रेस (जोगी) का बिलासपुर संभाग में असर देखा जा सकता है। हालांकि दो-तीन सीटों पर ही इनका प्रभाव है। कुल मिलाकर राज्य में कांग्रेस और भाजपा के बीच ही सीधा मुकाबला होगा। 90 सदस्यीय छत्तीसगढ़ विधानसभा में फिलहाल कांग्रेस की 71 सीटें हैं। 13 पर भाजपा, 2 पर बसपा तीन पर जोगी कांग्रेस और एक सीट रिक्त है। बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को 46 सीटों की जरूरत होगी। जिस तरह से विभिन्न चैनलों के सर्वे आ रहे हैं, उससे कांग्रेस की बांछें खिली हुई है। उसकी 60 से 65 सीटें आने की संभावना जताई जा रही है, जबकि भाजपा की सीटें 25 के आसपास बताई जा रही है। बहरहाल, यह सब कयास है। मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। देखना होगा कौन कितने पानी में हैं।