0 संजीव वर्मा
बस्तर में नक्सलवादियों द्वारा पिछले एक महीने के भीतर 4 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या चिंता का विषय है। एक ओर नक्सलियों के बस्तर से सिमटने का दावा किया जा रहा है, तो दूसरी ओर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की हत्या विचलित करने वाली है। पुलिस का कहना है कि नक्सली अब किसी बड़ी वारदात को अंजाम नहीं दे पा रहे, इसलिए दहशत फैलाने के लिए निर्दोष ग्रामीणों की हत्या कर रहे हैं। बीते एक सप्ताह के भीतर नक्सलियों ने बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा में तीन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की हत्या की है। इस पर अब राजनीति शुरू हो गई है। भाजपा इसे टारगेट किलिंग के साथ राजनीतिक षड़यंत्र कह रही है। इसमें कितनी सच्चाई है, यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा। लेकिन भाजपा पहले ही निष्कर्ष पर पहुंच गई है। जबकि उसे आरोप लगाने से पहले जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना चाहिए था। बिना सोचे-समझे किसी निष्कर्ष पर पहुंच जाना उचित नहीं है। उधर, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा के आरोपों पर कहा है कि वह बताए इसमें कौन सा षड़यंत्र है। चाहे तो किसी भी केन्द्रीय एजेंसी से जांच करा ले, हमें कोई एतराज नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नक्सली पीछे हटे हैं। इसमें कोई शक नहीं है। यहाँ भीमा मंडावी की हत्या हुई। पुलिस जांच कर रही थी तो एनआईए को भेज दिया। मुख्यमंत्री ने पूछा कि एनआईए की जांच रिपोर्ट में क्या आया, किसी को पता है? इस मामले में भी एनआईए भेज दें। बिना राज्य सरकार की सहमति से भी भेज सकते है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हमारी विश्वास, विकास और सुरक्षा की नीति सफल हुई है। नक्सली पहले सामूहिक हमले करते थे। अब रणनीति बदली है। अब घर में जाओ और गोली मारो का तरीका अपना रहे हैं। मतलब इनकी ताकत कमजोर हुई और वे सिमट गए हैं। हमारे सुरक्षा बल के जवानों ने नक्सलियों से 6 सौ गांव खाली करा लिए हैं। राज्य सरकार की नीतियों से पहले से बंद तीन सौ स्कूल भी शुरू हुए हैं। यानी भाजपा-कांग्रेस दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। मामला देश की सर्वोच्च पंचायत संसद तक पहुंच गया है। भाजपा सांसद अरूण साव ने लोकसभा में इस मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं की टारगेट किलिंग हो रही है। साव ने कहा कि भाजपा के खिलाफ यह राजनीतिक षड़यंत्र है। राज्य की कांग्रेस सरकार आम जनता को सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। हमारे लोगों से सुरक्षा वापस ली गई है। छत्तीसगढ़ को रक्तरंजित करने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने केन्द्र से आग्रह किया कि वह राज्य सरकार को निर्देशित करें कि वह राज्य की जनता के जीवन की रक्षा करें। साव ने सदन के माध्यम से हत्याओं की निष्पक्ष जांच की भी मांग की। साव के लोकसभा में दिए बयान पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा नेताओं की सुरक्षा में कोई कमी नहीं की गई है, बल्कि पुलिस महानिदेशक को सभी दलों की बैठक लेकर सुरक्षा व्यवस्था को दुरूस्त करने को कहा है। मुख्यमंत्री के बयान के बाद भाजपा को संयम का परिचय देना चाहिए। जल्दबाजी में ऐसा कोई बयान न दे जिससे गलत संदेश जाए। हमारा भी मानना है कि हत्याओं की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। हत्या चाहे किसी की भी हो बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। बस्तर में फिलहाल शांति थी, लेकिन अचानक घर के अंदर घुसकर हत्या का दौर चल पड़ा। इसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है। चूंकि कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। ऐसे में उसे चाहिए कि वह नक्सलियों को उनके किए की सजा दिलवाने ठोस कार्रवाई करे। बयानबाजी से जांच प्रभावित होने की संभावना रहती है। ऐसे में इससे बचा जाना चाहिए। राजनीतिक षड़यंत्र या टारगेट कीलिंग जैसे शब्दों का उपयोग सोच-समझकर किया जाना चाहिए। आवेश में आकर कोई भी बयानबाजी उचित नहीं है। वैसे नक्सलियों ने इस तरह की घटना को पहली बार अंजाम नहीं दिया है। 32 कांग्रेस नेताओं की शहादत अब भी लोगों के जेहन में है। उनके गुनहगारों का खुलासा अब तक नहीं हो सका है। एनआईए की जांच में क्या हुआ? कुछ पता नहीं है। राज्य सरकार ने न्यायिक जांच आयोग की अवधि 6 महीने के लिए फिर बढ़ा दी है। इस मामले में भी दोनों बड़ी पार्टियों की तरफ से सिर्फ बयानबाजी कर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। ऐसे में कौन सही है, कौन गलत। इसका फैसला कैसे होगा? सभी को चाहे वह कांग्रेस हो या भाजपा, मिलकर नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई लड़नी होगी।