धर्मांतरण के मुद्दे पर सदन में हंगामा, 12 विपक्षी सदस्य निलंबित 

* भारी हंगामें के बीच सदन में भाजपा ने रखी अपनी बात
 
 * गृह मंत्री व्यक्तव्य देना चाहते थे, विपक्ष ने नहीं बोलने दिया : चौबे
रायपुर। नारायणपुर में 31 दिसम्बर 22 को एड़का थाना के ग्राम गोर्रा में मिशनरियों द्वारा किये जा रहे आदिवासियों के धर्मांतरण की घटना के बाद भड़के आदिवासी ग्रामीणों पर पुलिस के हमले व ईसाई मशीनरी द्वारा पुलिस पर हमले के मुद्दे पर स्थगन की मांग की गई। जबरदस्त हंगामें के बीच अपनी बात भाजपा के सदस्यों बृजमोहन अग्रवाल , नारायण चन्देल , अजय चंद्राकर,शिवरतन शर्मा, के.के. बांधी.सौरभ सिंह, धरमलाल कौशिक, ने सदन में रखी। कांग्रेस सदस्यों ने भी इसी के बीच  आरक्षण पर जबरदस्त हंगामा करना शुरू कर दिया। भाजपा सदस्य धर्मांतरण के विरुद्ध सदन में नारेबाजी करने लगे। जवाब में सभी कांग्रेस सदस्य मोहन मरकाम के साथ खड़े हो गए और भाजपा को आरक्षण विरोधी बता कर सदन में जोरदार हंगामा और नारेबाजी करने लगे।  भाजपा सदस्यों ने हल्लागुल्ला के बीच भी अपनी बात तेज आवाज में जारी रखी।  वे कह रहे थे कि आदिवासी समाज को पैसे-सेवा एवं शिक्षा का प्रलोभन देकर धर्मांतरण व मतांतरण इस समाज को समाप्त करने के लिए चल रहा है। यह काम शासन प्रशासन के संरक्षण में चल रहा है। भाजपा को आरक्षण विरोधी बताते हुए कांग्रेस हमलावर थी। इधर भाजपा आदिवासियों के धर्मांतरण के मुद्दे पर कांग्रेस की सत्ता को घेरे में ले रही थी। अपनी बात को दबाए जाने की स्थिति देख कर भाजपा सदस्यों ने सदन के गृभ गृह में प्रवेश कर स्वयं ही निलंबित होने का रास्ता अपनाते हुए अपना विरोध प्रकट किया। अंततः आसंदी पर आसीन सभापति धनेंद्र साहू ने भाजपा के 12 सदस्यों यथा डॉ. रमनसिंह.नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ,बृजमोहन अग्रवाल,अजय चंद्राकर,शिवरतन शर्मा,सौरभ सिंह,धरमलाल कौशिक,डमरूधर पुजारी,रंजना दीपेंद्र साहू ,रजनीश सिंह, पुन्नूलाल मोहिले के साथ जोगी कांग्रेस के प्रमोद शर्मा के निलंबन का आदेश की घोषणा सदन में की। भाजपा सदस्य धर्मांतरण व आरक्षण के विषय पर पोस्टर लेकर सदन में प्रदर्शन करने व नारे लगाने लगे। सदन से बाहर नहीं गए,इसी बीच सभापति ने सदन की कार्यवाही को अगले दिन के लिए स्थगित करने की घोषणा की।
              सदन के बाहर विधान सभा की लॉबी में  संसदीय कार्य मंत्री रविन्द्र चौबे ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि नारायणपुर मामले में गृहमंत्री सदन बयान देना चाहते थे। उनकी पूरी तैयारी थी।  विपक्ष ने हंगामा कर उनका जवाब नहीं आने दिया ।  वे उनकी बात सुन लेते तो उनके आरोप का समाधान हो जाता। आरक्षण के प्रश्न पर उन्हेंने लॉबी में कहा कि विधेयक के सर्वसम्मति से पारित होने के बाद भी हस्ताक्षर ना होने से छतीसगढ़ की जनता का सरकार पर दबाव है। उन्होंने फिर अपना आरोप दोहराया कि जो डॉ.रमनसिंह बयान देते हैं।  उसी भाषा में राजभवन से विज्ञप्ति जारी होती है। इसीलिए यह शंका होती है कि सर्वसम्मति से पवित्र सदन में पारित विधेयक पर भाजपा के दबाव में हस्ताक्षर नहीं किये जा रहे हैं।रमन सिंह द्वारा राजभवन के बचाव पर कहा कि रमनसिंह को राज्यपाल की चिंता बहुत है।यह भी कहा कि कांग्रेस का प्रदर्शन किसी दबाव को बनाने नहीं बल्कि जनता तक सारी बातें पहुंचाने के लिए है। लॉबी में बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि जिस आधार पर विधेयक पारित कराया गया वह कवाटिफाइबल डेटा सदन में रखने में कांग्रेस की सत्ता दाएं बाएं क्यों कर रही है। वो बताए कि इस डाटा को उन्होंने हाई कोर्ट,सुप्रीम कोर्ट , विधान सभा या कहीं भी रखा क्या ?