आपकी बात: ‘सदैव अटल’: राहुल का नया दांव

0 संजीव वर्मा
भारत जोड़ो यात्रा पर निकले कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी इन दिनों चर्चा में हैं। कल भारत जोड़ो यात्रा के नई दिल्ली में प्रवेश के बाद उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। नेहरू से लेकर इंदिरा और राजीव गांधी की प्रतिमा पर जाकर मत्था टेकना तो एक सामान्य बात है। लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित कर वे कई संदेश दे गए। यह पहली बार हुआ है जब कांग्रेस का कोई बड़ा नेता वाजपेयी की समाधि ‘सदैव अटल’ पर श्रद्धासुमन अर्पित करने गया हो। राहुल गांधी के इस कदम को एक ओर जहां उदार राजनीति का संकेत माना जा रहा है तो दूसरे शब्दों में कहे तो यह उदार हिन्दुत्व को साधने का प्रयास भी माना जा सकता है। खैर, कांग्रेस की जो भी रणनीति रही हो, लेकिन राहुल गांधी ने अटल जी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर वर्तमान राजनीति में नैतिकता की एक बड़ी लकीर जरूर खींच दी है। इसके जरिए वे यह संदेश देने में भी सफल रहे कि कांग्रेस हर किसी को चाहे वे किसी भी जाति, धर्म, पंथ के हों अपने साथ जोड़ना चाहती है। इतना ही नहीं राहुल गांधी अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को भी जवाब दे दिया है। दरअसल भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग उनके परनाना और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में तरह-तरह की बातें करते रहे हैं। ऐसे में राहुल का अटल जी को श्रद्धांजलि देना वाकई बड़ा कदम है। यहां यह बताना भी जरूरी है कि कांग्रेस का भले ही अटल जी के साथ वैचारिक मतभेद हो, लेकिन उसका पहले से ही उनके प्रति नरम रूख रहा है। भाजपा के कुछ नेता राहुल गांधी पर लगातार हिन्दू विरोधी होने का आरोप लगाते रहे हैं। लेकिन उन्होंने इसका भी अपने ही तरीके से जवाब दिया है। उन्होंने अपनी भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत 7 सितंबर को कन्या कुमारी से शुरू की थी। सबसे पहले उन्होंने स्वामी विवेकानंद के स्मारक में जाकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने रास्ते में पड़ने वाले कई प्रसिद्ध मंदिरों में पूजा-अर्चना की। उज्जैन के महाकाल मंदिर में उनका दंडवत प्रणाम करना चर्चा में रहा। कर्नाटक में लिंगायतों के मठ से लेकर नांदेड (महाराष्ट्र) के गुरुद्वारे में भी उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अब दिल्ली प्रवेश के बाद अटल जी से लेकर बाबू- जगजीवन राम की समाधियों पर राहुल के श्रद्धासुमन अर्पित करने से भाजपा का असहज होना स्वाभाविक है। राहुल ने इसके जरिए कई निशाने भी साध लिए है। सरदार वल्लभ भाई पटेल कांग्रेस के शीर्ष नेता थे। भाजपा जब उनका नाम लेकर राजनीति करती है, तो कांग्रेस असहज हो जाती है। ऐसे में राहुल का अटल जी और बाबू जगजीवन राम की समाधि पर जाना भाजपा को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा होगा। वैसे भी भाजपा को राहुल गांधी की यात्रा के दौरान उनके मंदिरों में जाना कसक रही है। भाजपा की चिंता राहुल की धर्मनिरपेक्ष छवि से नहीं, बल्कि उनकी उदार हिन्दुत्व और समावेशी राजनीति को लेकर है। यात्रा को 108 दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने किसानों, मजदूरों, महिलाओं, छात्रों और युवाओं के साथ चर्चा कर देश की समस्याओं को नजदीक से जानने और समझने का प्रयास किया है। बहरहाल, राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित कर एक साथ किसानों, दलितों और ब्राह्मणों को न सिर्फ साधा है। बल्कि दलगत राजनीति से उपर उठकर देश के विकास में योगदान देने वाले महापुरुषों को अपना मानने का भी बड़ा दांव चला है। वैसे भी राहुल गांधी अपनी यात्राओं के दौरान मोहब्बत और प्यार की बातें करते रहे हैं। ठीक उसी दिशा में चलते हुए उन्होंने अटलजी को श्रद्धासुमन अर्पित किए, उससे देश के ब्राह्मणों में एक बड़ा संदेश गया है। इसी तरह चौधरी चरण सिंह के जरिए वे किसानों और बाबू जगजीवन राम की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित कर दलितों के बीच बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। वैसे भी कांग्रेस अटल जी की ही लाइनों का जिक्र करते हुए कहा है कि ‘छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता’ इसलिए राहुल ने देश के विकास में योगदान देने वाली विभूतियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस अटल जी की इन लाइनों को कब तक याद रख पाती है?