भाटापारा। छत्तीसगढ़ सरकार के 4 साल पूरा हो जाने के बाद भी अब तक पृथक भाटापारा जिला नहीं बनने से व्यथित जिला निर्माण संघर्ष समिति अब सड़क पर उतरने लगी है। भाटापारा के स्थानीय नेताओं को जगाने के लिए और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को उनका किया वादा याद दिलाने के लिए संघर्ष समिति ने नए सिरे से अपना काम शुरू कर दिया है। पृथक जिला नहीं बनने से आहत जिला निर्माण संघर्ष समिति अब लाउडस्पीकर लेकर भाटापारा के प्रत्येक मोहल्ले में जाकर कांग्रेस सरकार के जनप्रतिनिधियों को जगाने और उनका किया हुआ वादा याद दिलाने का काम कर रही है। संघर्ष समिति की ओर से पूरे शहर में रिक्शा घुमाया जा रहा है जिसमें लाउडस्पीकर लगा हुआ है इसमें पूर्व में किए गए वायदे को कराया जा रहा है।
चूंकि चुनाव को महज अब कुछ महीने ही रह गए और मुख्यमंत्री द्वारा विश्व आदिवासी सम्मेलन में किए गए वायदे के अनुसार भाटापारा को अब तक स्वतंत्र जिला घोषित कर दिया जाना था लेकिन स्वतंत्र जिला घोषित नहीं होने से उहापोह की स्थिति जनमानस में बनी हुई है। जिले का दंश पिछले 40 वर्षों से भाटापारा की आम जनता झेल रही है। एक के बाद एक भाटापारा को मिलने वाले अधिकार से वंचित किया जा रहा है और यहां के जनप्रतिनिधियों की खामोशी जनता को सड़क पर आकर संघर्ष करने के लिए मजबूर कर रही है।
विदित हो कि शहीद नंदकुमार पटेल का भी सपना था कि कांग्रेस की सरकार आने पर भाटापारा 28 वाँ जिला बनेगा लेकिन जिले की संख्या 33 हो जाने के बाद भी भाटापारा जिला नहीं बन सका है। क्षेत्रवासी बार-बार शासन प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक से गुहार लगा चुके है लेकिन जनता की माँग पर आज तक मुहर नहीं लग पाई है। प्रदेश की सबसे बड़ी नगरपालिका, प्रदेश की सबसे बड़ी मंडी, रेलमार्ग, सड़क मार्ग से सर्व सुविधा युक्त होने के उपरांत भी भाटापारा को अनदेखा किया जाना सर्वथा अनुचित है। छत्तीसगढ़ का प्रमुख व्यापारिक केंद्र जहां 100 किलोमीटर तक का व्यापार होता है उसके बाद भी भाटापारा को आज पर्यंत स्वतंत्र जिला घोषित नहीं किया जाना शासन की उदासीनता को दर्शाती है। क्षेत्र की जनता अब बेसब्री से इंतजार कर रही है कि मुख्यमंत्री के द्वारा किए गए वादे के अनुसार भाटापारा कब जिला घोषित होता है?
