भाटापारा। श्री माहेश्वरी भवन भाटापारा में कृष्ण कुमार मूंधड़ा परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय संत परम श्रद्धेय श्री गौरदास जी महाराज ने आज करवा चौथ व्रत की महिमा सुनाते हुए बताया कि व्रत पहले स्वर्ग में ही रखा जाता था लेकिन द्वापर युग में महाभारत युद्ध से पहले द्रोपदी जी ने श्री कृष्ण से निवेदन किया मैं सदा सुहागन रहूं तब श्री कृष्ण ने द्रोपती जी को आज के दिन निर्जला रहकर व्रत रखने की और शाम को चंद्रमा निकलने के बाद उनकी पूजा कर स्वयं हाथ से भोजन बनाकर भगवान को भोग लगाकर पति के साथ बैठकर भोजन करें । उसके बाद से धरती पर भी इस व्रत का पालन होने लगा किंतु आज के युग में पूरे दिन व्रत रखती है। शाम को होटल में जाकर भोजन करते हैं तो उस व्रत का फल तो होटल वालों को और वेटर को मिल जाएगा, पति को फल कहां से मिलेगा ? कथा को आगे बढ़ाते हुए महाराज श्री ने बताया कि यदि आज की धर्मपत्नी इमानदारी से पति व्रत नियम का जीवन भर पालन कर ले और वह यदि कोई और पूजा धर्म कर्म आदि नहीं भी करे तो भी निश्चित रूप से उसे इसी जन्म में इसी शरीर में भगवान की प्राप्ति जरूर हो जायेगी । ऐसे बहुत सारे उधारण है जैसे वृंदा देवी घर-घर में तुलसी बनकर विराजमान है जीवन भर उन्होंने पति व्रत का पालन किया था ।
श्रीमद् भागवत जी में सुखदेव जी ने 28 प्रकार के नर्क का वर्णन किया जैसे कोई स्त्री दूसरे पुरुष के साथ अथवा कोई पुरुष दूसरी स्त्री के साथ गलत संबंध बनाते हैं तो उन्हें नरक में गर्म लोहे के तपते हुए पुरुष स्त्री से चिपकाया जाता है और पीछे से यम मुदगल से उनकी पिटाई करते हैं । शराब पीने वालों को पिघला हुआ गरम लोहा पिलाया जाता है ।जो माता-पिता या बड़ों का कहना नहीं मानते अथवा अनादर करते हैं तो उन्हें नरक की बहुत ही तंग गली में निकाला जाता है जिसमें दोनों तरफ तलवारे लगी होती है । महाराज जी ने आगे बताया यह सब दुख सहने को अलग से शरीर मिलता है उसे कष्ट तो सहन करने पड़ते हैं किंतु उसकी मौत नहीं होती ।
कथा में आगे वामन भगवान का बहुत सुंदर चरित्र सुनाते हुए बताया कि भगवान ने राजा बलि का अहंकार दूर कर दिया इसलिए आज हर अच्छे काम करते समय या दान करते समय बलि शब्द का प्रयोग किया जाता है, कि उस व्यक्ति ने अपने अहंकार की बलि देकर कार्य किया है । नगर के सभी धर्म प्रेमि कथा में परिवार सहित खूब आनंद ले रहे हैं ।
