भाटापारा। श्री माहेश्वरी भवन भाटापारा में कृष्णकुमार मूंधड़ा परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय संत परम श्रद्धेय श्री गौरदास जी महाराज ने आज बताया कि राजा परीक्षित जब अपना राजकाज सब अपने पुत्र जनमेजय को सौंपकर शुकताल वन की ओर चल दिए और वहां जब श्री सुखदेव जी पधारे परीक्षित जी ने एकदम से यह प्रश्न पूछा कि जिसकी 7 दिन के अंदर मृत्यु हो जाने वाली है उसे अपने उड़ार हेतु क्या करना चाहिए ? शुकदेव जी प्रसन्न होकर बोले राजन यह प्रश्न तुमने अपने लिए ही नहीं वरन सारे संसार वासियों के लिए पूछ रहे हो । क्योंकि इन्हीं 7 दिनों के अंदर ही सभी पैदा होते हैं और मरते हैं, भगवान की कथा एवं एवं भजन का श्रवण करें दूसरा भगवान के नाम का कीर्तन करें और तीसरा भगवान के नाम का निरंतर जप एवम् स्मरण करें यह सब बचपन से ही हमें बच्चों के साथ प्रतिदिन बैठकर 24 घंटे में से कम से कम 1 घंटा परिवार सहित करना चाहिए चाहे कीर्तन हो या श्री हनुमान चालीसा पाठ या रामायण भागवत अथवा गीता का पाठ भी प्रतिदिन सबको घर में साथ बैठकर करना चाहिए । बच्चों का मन 5 से 15 वर्ष की आयु तक बनता है यदि हम 20 वर्ष के बच्चे को समझाएंगे तो उल्टे वो हम ही समझा देगा हमसे ज्यादा जानता है यदि बचपन से अपने बच्चों को संस्कार नहीं दिया तो हमारे मरते वक्त कानों में हरी नाम नहीं सुना पाएगा आज हम अपने पूर्वजों का श्राद्ध करते हैं तो आज की हालत में बहु बेटा तीन चार बार तक बुलाने पर भी बड़ी मुश्किल से आते हैं तो कल हमारे मरने के बाद हमारा श्राद्ध करने का कितना समय निकाल पाएगा
महाराज श्री ने आगे बताया कि पहले हम तो पूर्ण रूप से सनातनी बन जाए यदि किसी भी बात का बुरा ना माने हम सोचे परिवार व्यापार नौकरी जो भी कार्य कर रहे हैं वह प्रभु का है, हम तो सेवक हैं सब कुछ मालिक का है मैं तो केवल माली हूं । यदि हम नाम जप करते-करते प्रतिदिन रात को सो जाएं और सुबह उठते ही पुणे नाम जप करें तो पूरी रात हमने भगवान का भजन किया है यही निरंतर अभ्यास करते रहेंगे तो मरते समय भगवान जरूर आएंगे, मरते समय हमें भगवान की स्मृति होना जरूरी है तभी हम सीधे प्रभु के धाम जाएंगे ।
महाराज जी द्वारा गाए भजन “नाम लेने से तर जाएगा, पार भव से उतर जाएगा” पर रामजी डालिया गोविंद जी, बिन्नानी, प्रेमचंद जी भूषाणिया, द्वारिका पांडे आदि प्रेम में मंत्रमुग्ध हो रहे थे । नगर के सभी धर्म प्रेमि कथा का खूब रसपान कर रहे हैं ।
