भाटापारा। सोमवार को कृषि उपज मंडी एक बार फिर से बंद हो गई पूरी तरीके से कामकाज ठप रहा। सोमवार को एक बोरे की भी खरीदी बिक्री नहीं हो पाई। मामला बोरे और कट्टे के बीच उलझ कर रह गया है इस संदर्भ में मिली जानकारी के अनुसार मजदूरों ने पूर्व में मंडी प्रशासन को यह जानकारी दे दी थी कि 1 मई से वे लोग बोरे में कृषि उपज का कार्य नहीं करेंगे वरन् कट्टे में ही कार्य करेंगे। बताते हैं कि बोरे और कट्टे की दर को लेकर मजदूरों और व्यापारियों के बीच बात नहीं बन पा रही है मजदूर जहां बोरे की दर पर ही कट्टे पर काम करना चाहते हैं वहीं व्यापारियों का साफ कहना है कि कट्टे की दर पर ही कार्य करें। इसी बात को लेकर मजदूरों और व्यापारियों के बीच बात नहीं बन रही है इसके पहले 28 अप्रैल को सामूहिक बैठक मंडी के सभाकक्ष में हो चुकी है परंतु उसमें कोई नतीजा नहीं निकल पाया था फल स्वरुप सोमवार से कृषि उपज मंडी बंद हो गई है।
क्या है बोरे और कट्टे का विवाद
अभी तक मजदूर बोरे और कट्टे पर अलग-अलग रूप में कार्य कर रहे थे किंतु अब मजदूरों का कहना है कि वे लोग बोरे में कार्य नहीं करेंगे अब सिर्फ कट्टे पर ही कार्य कर पाएंगे यहां बता दें कि बोरे में 70 किलो की भर्ती आती थी, किंतु कट्टे में मात्र 40 किलो की भर्ती आएगी। इसमें मजदूरों का यह कहना है कि जिस दर पर हम बोरे में काम करते थे उस दर पर ही हम कट्टे पर कार्य करेंगे जबकि व्यापारियों का कहना है कि जब वजन लगभग आधा हो जा रहा है तो औसत निकाल कर दर निर्धारित की जानी चाहिए उसी के अनुरूप ही हम भुगतान कर सकेंगे हमें कट्टे में काम कराने में कोई आपत्ति नहीं है।
मंगलवार को फिर होगी बैठक
कट्टा और बोरे के बीच का विवाद हैं। इस मामले में एक बैठक पहले हो चुकी है और पुनःएक बैठक मंगलवार को बुलाई गई है ताकि जल्द से जल्द निराकरण हो सके और मंडी सुचारू रूप से प्रारंभ हो सके।
सुरेश चौरे
सचिव कृषि उपज मंडी समिति भाटापारा
