भाटापारा। आज पर्युषण महान पर्व का दूसरा दिवस उत्तम मार्दव धर्म है श्री 1008 आदिनाथ नव ग्रह पंचबालयती दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण पर्व धूम-धाम से मनाया जा रहा है। प्रात 7:30 बजे मंगलाष्टक से पूजा का प्रारंभ में किया गया। सर्वप्रथम श्री 1008 भगवान मुनि सुब्रत नाथ जी की प्रतिमा मस्तक पर विराजमान कर पांडू सिला में विराजमान की सभी भक्तों ने ,”चला चला रे प्रभु का रथ हौले हौले मंदिर की घंटी में म्हारा मन डोले ,”भजन पर खूब भक्ति की आज की शांति धारा का सौभाग्य नवीन कुमार ,नितिन कुमार ,सचिन कुमार , गदिया परिवार को प्राप्त हुआ। शांति धारा के पश्चात भगवान की मंगलमय आरती की गई ,आरती में सभी भक्तों माता बहनों ने धूमधाम से भक्ति संपन्न की ।आरती के बाद देव शास्त्र गुरु की पूजा, सोलह कारण पूजा, पंचमेरु पूजा ,दश लक्षण पूजा की क्रिया संपन्न हुई।
धर्म का दूसरा लक्षण है उत्तम मार्दव धर्म अभिषेक जी ने शास्त्र वाचन में बताया कि जो मृदु है, कोमल है, उसका जो भाव है उसे मार्दव कहते हैं ।मद के कारण मृदुका का अभाव हो जाता है । व्यक्ति मद के नशे में अपनों को उच्च तथा दूसरों को छोटा समझने लगता है। जिस प्रकार क्षमा धर्म का विरोधी क्रोध है, उसी प्रकार मारदव धर्म का विरोधी मान है। मान कषाय का मर्दन करना ही मार्दव धर्म है। हमारे दुख का कारण हमारा अपना अहंकार है ,यही अहंकार जीव का सबसे बड़ा शत्रु है, जो सारे गुणों को क्षण भर मैं नष्ट कर देता है। अभिमानी व्यक्ति कभी उन्नति नहीं कर सकता। बड़े पुरुष सदा विनय वान होते हैं। कहा गया है बड़ी बड़ाई न करे, बड़े न बोले बोल , हीरा मुख से ना कहे लाख हमारा मोल,।
जैसे हीरे की कीमत स्वमेव हो जाती है, वैसे ही मनुष्य का कद उसके आचरण व्यवहार से प्रकट हो जाता है। दुनिया में आज तक ऐसी कोई मशीन नहीं बनी है जो अहंकार को तौल सके। रावण ,कंस ,दुर्योधन का विनाश अहंकार के कारण ही तो हुआ है ।महाभारत का युद्ध भी दुर्योधन के अहंकार के कारण हुआ। उसके साथ कितने लोगों का विनाश का कारण बना है।
आचार्य विद्यासागर जी कहते हैं कि यदि उन्नति करना चाहते हो तो झुकने की कला सीख लो। राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 चिन्मय सागर जी महाराज कहते हैं कि कर्मों का लेखा जोखा कुल वा जाति पर नहीं बल्कि अपने आचरण पर आधारित है। जब धन का अहंकार आता है तब राम जैसे पुण्य आत्मा को याद कर लेना जिने एक दिन बाद राज सिंहासन मिलने वाला था, और कहीं 14 वर्षों का बनवास मिल गया।
दूसरों के दोषों को देखना बंद कर अपने दोषों को देखो और मारदव धर्म को जीवन में धारण करो। अहंकार का विसर्जन कर देने पर छोटा व्यक्ति भी महान हो सकता है। और जीवन में अहंकार कर जाए तो महान व्यक्ति भी छोटा बन जाता है। दूसरों की गलतियां ना देखकर अपनी गलती देखने का स्वभाव बनाएं, और उसे ठीक करने का प्रयास करें ।संसार में गुण सब में होते हैं बस देखने वालों की दृष्टि चाहिए। अंत में अभिषेक जी ने कहा मान मीठे विष के समान है ,जो व्यक्ति को दुर्गति में ले जाता है ।और मार्दव धर्म अमृत के समान हैं, जो प्राणियों को हमेशा सुख शांति प्रदान करता है ।संसार के सभी पद क्षण भंगुर हे ।आगे की अनंत यात्रा में यह कोई साथ नहीं जाएगा।
रात्रि में श्रीजी की मंगल आरती की गई कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रकाश चंद्र,अनिल कुमार, आलोक कुमार ,अभिषेक , अक्षत ,अभिनव, अभिनंदन , अरिजय ,आदि आर्नव,मोदी । सुमनलता ,सुमन अंशु ,नेहा रानी, सुरबी मोदी
नवीन कुमार, नितिन , सचिन, नैतिक ,सोनू अक्षत ,भावना गदिया
संजय जैन, संदीप, कल्पना सिंघाई आदि उपस्थित थे
दुनिया में आज तक कोई मशीन नहीं बनी जो अहंकार को तौल सके: अभिषेक मोदी
