भाटापारा। सुगंधित धान के लिए भी अब सरकार को ठोस व अच्छी नीति बनाने की आवश्यकता है क्योंकि मोटे धान की खरीदी सरकार करती है इसलिए ज्यादातर किसान अपने खेतों में मोटा धान ही बोने लगे हैं। किसानों की रूचि सुगंधित धान बोने पर धीरे-धीरे कम होती जा रही है जिसके कारण सुगंधित चावल का व्यापार अब संकट के दौर से गुजर रहा है। बीते वर्षों में जिस प्रकार सरकार मोटे धान की खरीदी समर्थन मूल्य पर कर रही है उसकी वजह से किसान अब अपने खेतों में मोटे धान को ही बोने लगे हैं। जिसका प्रमुख कारण यह है कि मोटे धान की फसल जल्दी आ जाती है और किसानों को उसकी अच्छी कीमत भी मिलने लगी है जबकि इसके ठीक विपरीत बारीक धान में फसल आने में काफी समय लग जाता है। किसानों का रुझान अब बारीक धान बोने की ओर नहीं के बराबर हो गया इसके लिए किसानों को प्रोत्साहित करने सरकार को नीति बनानी होगी और इसका सीधा अप्रत्यक्ष नुकसान राज्य सरकार को उठाना पड़ रहा है क्योंकि अब किसान अपने खेतों में मोटे धान को ही बो रहे हैं। सरकार को इस मामले में सजी हुई नीति बनाने की नितांत आवश्यकता है अन्यथा आने वाले समय में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी सरकार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हो सकती है। प्रदेश व देश में सुगंधित चावल खाने वालों की काफी बड़ी संख्या है और छत्तीसगढ़ राज्य सुगंधित व बारीक धान के लिए पहले अपनी अलग पहचान रखता था किंतु समय के साथ अब इसकी सुगंधित व बारीक धान के मामले में पहचान लुप्त होते जा रही है। अगर आंकड़ों पर गौर करते हैं तो पाएंगे कि छत्तीसगढ़ सरकार वर्तमान समय में समर्थन मूल्य में धान खरीदी के कारण आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है।
छत्तीसगढ़ शासन वर्तमान में सपोर्ट प्राइस पर करीब 90 लाख टन धान खरीदी करता है
परंतु PDS चावल की उपयोग एवं सेंट्रल पूल में चावल देने पर कुल खपत 55 से 60 लाख मैट्रिक टन आती है I
छत्तीसगढ़ शासन के पास 25 से 30 लाख मैट्रिक टन धान बच जाता है जिस धान को शासन इस वर्ष 2021 में नीलामी के द्वारा 800 से 1000 प्रति कुंटल के नुकसान पर बेचा जा रहा है I
छत्तीसगढ़ प्रदेश में पूर्व में 70% बारीक धान एचएमटी, दुबराज, जमाफूल आदि बोया जाता था जो अब वर्तमान में 10-15% बोया जाता है
छत्तीसगढ़ शासन अगर प्रयास करें तो बारीक धान का रकबा 10 - 15 ℅ से बढ़ाकर 30 - 40 ℅ कराया जा सकता है है I तो बारीक धान की समस्या स्वता समाप्त हो जाएगी I
एवं सरकार को 90 लाख मैट्रिक टन के बदले 55 से 60 लाख मैट्रिक टन ही धान खरीदी करना पड़ेगा I
इसके लिए किसानों को बारिक धान बोने के लिए जागरूक कर उन्हें कुछ प्रोत्साहन राशि देनी चाहिए एवं बारीक धान के बीज उपलब्ध कराने चाहिए I
एवं सरकार प्रति एकड़ कुंटल में मोटा धान की खरीदी को भी 15 बोरा से 10 बोरा डिक्लेअर करना चाहिए I और इसके एवज में उन्हें एक निश्चित राशि प्रदान करनी चाहिए ताकि किसान मोटे धान का उत्पादन कम करें और अन्य फसलों की और उसका रुझान बढ़े।
सरकार ठोस नीति बनाये
सरकार को सुगंधित व बारीक धान उत्पादन के लिए ठोस नीति बनानी चाहिए। बारीक धान उत्पादन करने वाले किसानों को प्रोत्साहन राशि देकर किसानों को बारी धान उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। यदि बारीक धान का उत्पादन बढ़ता है तो अपने आप मोटे धान का उत्पादन कम होगा फल स्वरुप सरकार को मोटा धान कम खरीदना पड़ेगा। यह सभी वर्गों के लिए अच्छा होगा।
रूपचंद थारानी
संरक्षक राइस मिल एसोसिएशन भाटापारा
