भाटापारा। घरेलू गैस के दाम में 15 दिन के अंदर सौ रुपए प्रति सिलेंडर की वृद्धि कर दी गई है दो दिसंबर को 50 रुपए प्रति सिलेंडर की वृद्धि की गई थी जबकि 15 दिसंबर को पुनः 50 रुपए प्रति सिलेंडर की वृद्धि कर दी गई है इस प्रकार 15 दिन के अंदर सौ रुपए प्रति सिलेंडर की वृद्धि से उपभोक्ताओं के होश उड़ गए अब लोग कहने लगे हैं कि क्या यही अच्छे दिन हैं इससे तो अच्छी कांग्रेस की सरकार थी गैस सिलेंडर के दामों में वृद्धि के चलते गरीब परिवारों को पुनः चूल्हा जलाना पड़ सकता है गैस की कीमत में वृद्धि व सब्सिडी में कमी होने से लोगों ने रिफिलिंग कराना कम कर दिया है इस महंगाई का सीधा असर आम लोगों के जनजीवन पर पड़ रहा है महिलाओं में भारी नाराजगी देखी गई है कई ग्रहणी से बात करने पर उनमें काफी आक्रोश था और उनका कहना था कि उनका रसोई का बजट बिगड़ गया जिस प्रकार सरकार महंगाई लगातार बढ़ रही है उससे अब घर की रसोई का बजट बिगड़ते जा रहा है सुलेखा ने बातचीत में कहा कि केंद्र की मोदी सरकार का महंगाई पर कोई नियंत्रण नहीं है गैस के दाम बढ़ाकर उन्होंने महिलाओं के बजट पर कुठाराघात किया है। गृहणी आरती देवी जो पेसे से शासकीय कर्मचारी है ने बातचीत में कहा कि 15 दिन में गैस सिलेंडर के दाम में 100 रुपये की वृद्धि समझ से परे है सरकार इस प्रकार यदि दाम बढ़ाती रही तो आने वाले समय में लोग सिलेंडर का उपयोग करना कम कर देंगे। एक अन्य ग्रहणी किरण ने कहा कि गैस के दाम बढ़ाकर मोदी सरकार अच्छा नहीं कर रही है उन्होंने कहा कि जब पुरानी कांग्रेस की सरकार थी तो यही भाजपा के लोग गैस सिलेंडर सिर पर लेकर प्रदर्शन किया करते थे गैस के दाम बढ़ाना मोदी सरकार के लिए घातक हो सकता है।
सब्सिडी भी हो गई है कम
पिछले वर्ष गैस सिलेंडर के लिए 487 रुपए लग रहे थे इसके बाद लगातार गैस के दामों में वृद्धि होती ही जा रही है उस समय सब्सिडी के रूप में 287 रूपया आया करती थी जो अब कम होकर मात्र 67 रुपए ही आ रही है सरकार और गैस कंपनी के क्या व्यवस्था और क्या नियम कानून है यह समझ से परे है लोगों का कहना है कि सरकार को सब्सिडी पूर्व की भांति देनी चाहिए।
गैस उपभोक्ताओं की कट रही है जेबे
गैस कंपनियों एवं सरकार के द्वारा लगातार गैस के दामों में वृद्धि की जा रही है जिससे गैस उपभोक्ताओं की जेबे काटने का काम हो रहा है गैस के बढ़ते दामों ने लोगों की कमर तोड़ने का काम शुरू कर दिया है।
