भाटापारा । मौसम खुलने के साथ ही खेतों में धान के फसल की कटाई शुरू हो चुकी है और नया धान मंडियों में आना शुरू भी हो चुका है,लेकिन इस बार खेत गीले होने की वजह से हार्वेस्टर से धान की कटाई नहीं हो पा रही है। मजदूरों के माध्यम से ही धान की कटाई किसानों को करवानी पड़ रही है जिससे मजदूरों का टोटा होने लगा है। अर्ली वैरायटी के साथ मध्यम वैरायटी के फसल की कटाई तेजी के साथ हो रही है। कई खेतों में धान की फसल गिर गई है ऐसे खेतों में फसल की कटाई को लेकर किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बॉक्स
हार्वेस्टर से बचता था समय और धान की कटाई भी तेजी के साथ होती थी
कुछ वर्षों से किसान मजदूर की समस्या के कारण हार्वेस्टर से ही धान फसल की कटाई करवाते आ रहे हैं, लेकिन इस वर्ष खेतों में नमी के कारण फसल की कटाई हार्वेस्टर से नहीं हो पा रही है जिसके कारण किसानों को मजदूरों की जरूरत पड़ रही है। फलस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में धान काटने के लिए मजदूरों की कमी दिखाई पड़ रही है और रोजी भी काफी महंगी हो गई है। मजदूरी के महंगी होने के कारण किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पानी ने दिया धोखा
धान की फसल थी जबरदस्त किंतु पानी ने एक बार फिर किसानों हो धोखा दिया। इस वर्ष समय-समय पर हुई बारिश की वजह से पूरे क्षेत्र सहित प्रदेश भर में धान की फसल काफी अच्छी हुई थी किंतु बाद में पुनः पानी गिरने की वजह से धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों को एक बार फिर से दुखी कर दिया है। पानी गिरने की वजह से फसल गिर गई और फसलों में बीमारियां भी खूब लगी जिससे किसानों को बीमारियों को भगाने के लिए दवाइयों का छिड़काव करना पड़ा। जिसमें उन्हें काफी खर्चा भी आया। अभी भी खेतों में नमी होने के कारण किसानों को मजदूरों के माध्यम से ही धान की फसल को कटवाना पड़ रहा है। यही स्थिति रही तो पूरे नवंबर माह तक धान की कटाई होते रहेगी।
थ्रेसर का उपयोग भी बढ़ा
इस बार थ्रेसर का भी उपयोग काफी बढ़ गया है किसान धान कटाई के बाद थाना और पैरा को अलग अलग करने के लिए थ्रेसर का का उपयोग कर रहे हैं इससे किसानों को काफी मदद मिल रही है।
गेहूं की बोनी में होगा विलंब
खेतों में अत्यधिक नमी होने के कारण से इस बार हार्वेस्टर से धान की कटाई नहीं हो पा रही है फिर भी मजदूरों के माध्यम से धान की कटाई का काम क्षेत्र में चल रहा है। कटाई देरी से होने के कारण गेहूं आदि की बोनी में इस बार विलंब होगा।
बीएन वर्मा कृषि अधिकारी भाटापारा
