धरती से लेकर अंतरिक्ष तक बढ़ेगा अमेरिकी सहयोग

नई दिल्ली/ भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग को टू-प्लस-टू वार्ता से नई ऊंचाई मिलेगी। चीन से एलएसी पर जारी तनाव के बीच प्रस्तावित वार्ता से भारत को खास उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि 26-27 अक्तूबर को हो रही बातचीत में भारत-अमेरिका के साथ बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (बेका) पर आगे बढ़ने की संभावना है। चीन के साथ जारी टकराव के बीच इस समझौते पर बात बढ़ी तो भारत को अमेरिका से बड़ी मदद मिलेगी।
पूर्व विदेश सचिव शशांक का कहना है कि भारत-अमेरिका के बीच सामरिक और रणनीतिक सहयोग चीन के साथ चल रहे तनाव के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण होगा। अमेरिका स्पष्ट कर चुका है कि वह भारत को सहयोग करेगा। अमेरिका कभी नहीं चाहेगा कि भारत किसी भी स्तर पर चीन के दबाव में आए, क्योंकि भारत का दबाव में आना उसके हित में नहीं है। उन्होंने कहा बेका समझौते पर गति तेज होने की पूरी संभावना है। अमेरिका ने भारत को हर स्तर पर सहयोग का वादा किया है।उसकी नजर लगातार चीन के साथ भारत के तनाव पर बनी हुई है। अमेरिका ने खुलकर कई मौकों पर चीन की आलोचना की है। ऐसे में टू-प्लस-टू बैठक में परस्पर सहयोग को बढ़ाने के अलावा चीन पर भी चर्चा होगी। शशांक ने कहा कि क्वाड बैठक में भी चीन का मसला आया था। हालांकि सीधे भारत से एलएसी पर तनाव का जिक्र नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि क्वाड कूटनीतिक और रणनीतिक सहयोग से आगे बढ़कर व्यवस्थित रूप ले रहा है। ऑस्ट्रेलिया के मालाबार सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने की स्वीकृति के बाद ये ढांचा और पुख्ता हुआ है। टू-प्लस-टू में भारत और अमेरिका आपसी अभ्यास को औपचारिक रूप से ज्यादा मजबूत बनाने पर भी बात करेंगे। जानकारों का कहना है कि भारत अमेरिका से एमक्यू -9 बी ड्रोन खरीद रहा है। परस्पर समझौते के बाद भारत अंतरिक्ष के डाटा का प्रयोग दुश्मन के अड्डों पर हमला करने के लिए कर सकेगा। भारत और अमेरिका के बीच पहले ही तीन मौलिक समझौते हो चुके हैं। इन समझौतों के तहत दोनों देश पहले से ही एक-दूसरे के मिलिट्री संस्थानों का प्रयोग रि-फ्यूलिंग और आपूर्ति के लिए करने में सक्षम हैं। इसके अलावा कम्युानिकेशन के समझौतों के बाद दोनों देश आपस में जमीन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्यय जानकारियों को साझा कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अगर बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (बेका) पर दस्तखत हुआ तो दोनों देशों के बीच जियो-स्पेशियल यानी अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। बेका के तहत भारत को यह मंजूरी मिल सकेगी कि वह दुश्मन पर हमले के लिए क्रूज या फिर मिसाइल का प्रयोग अगर करता है तो अमेरिका के जियो मैप का प्रयोग कर सकेगा। इसकी वजह से सर्जिकल स्ट्राइक जैसे अभियान में बड़ी सफलता मिल सकेगी।

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