रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के बीएससी द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी (कीट शास्त्र) पेपर लीक मामले में पुलिस ने प्रोफेसर समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, दो आरोपी फिलहाल फरार हैं। मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। इस परीक्षा से करीब दो घंटे पहले पेपर वायरल होने के बाद शुरू हुई जांच में पुलिस ने महज 36 घंटे के भीतर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी प्रोफेसर समेत कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इस पूरे पेपर लीक का मास्टरमाइंड दुर्ग के भारती एग्रीकल्चर कॉलेज का प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया है। आरोपी के खिलाफ थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 360/26 धारा 4, 5 एवं 10 छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 और धारा 316 बीएनएस का अपराध दर्ज किया गया है। पेपर खरीदने वाले सभी आरोपी भारती एग्रीकल्चर कॉलेज दुर्ग के छात्र हैं।
100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम ने सुलझाया मामला
बताया जा रहा है कि 17 अगस्त को प्रोफेसर योगेश रायपुर के कृषि महाविद्यालय पहुंचा था, जहां से उसे आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र मिले। इनमें 20 अगस्त को होने वाली कीट शास्त्र की परीक्षा का पेपर भी शामिल था। आरोप है कि योगेश प्रश्नपत्र का लिफाफा अपने घर ले गया और सुई और नुकीले उपकरण की मदद से लिफाफे में छेद कर मोबाइल कैमरे से प्रश्नपत्र की रिकॉर्डिंग कर ली। इसके बाद पेपर की सामग्री तैयार कर उसने अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक और दो अन्य छात्रों को करीब 11 हजार रुपये में बेच दिया। इसके बाद आरोपी अजय नायक ने इस पेपर को त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज एवं आदित्य साहू को भेज दिया। 20 अगस्त को परीक्षा शुरू होने से करीब दो घंटे पहले पेपर वायरल होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम लगाई। पुलिस ने साइबर तकनीक, सोशल मीडिया पर पेपर वायरल होने की टाइमलाइन और आरोपियों के डिजिटल कनेक्शन को खंगाला। इसी जांच के आधार पर पुलिस एक-एक करके आरोपियों तक पहुंची। मुख्य आरोपी प्रोफेसर समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं अभी दो आरोपी फरार हैं, जिनकी पुलिस तलाश कर रही है। वर्ष 2019 से इस कॉलेज में पदस्थ आरोपी प्रोफेसर पिछले करीब एक साल से कृषि महाविद्यालय रायपुर में अपने महाविद्यालय की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र को अपने कॉलेज तक लाने-ले जाने का काम कर रहा था।
आरोपियों के कब्जे से ये सामान बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 हजार रुपये नगद, 6 मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल, कनेक्टर, सुई, सूजा, कॉपी और फेविकोल समेत कई सामान बरामद किए हैं। यानी ढ्ढत्र्यङ्क पेपर लीक केस में पुलिस ने 36 घंटे के भीतर जिस तरह पूरे नेटवर्क का खुलासा किया है, उससे परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता पर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्लांट पैथोलॉजी का पेपर भी रद्द
शुरुआत में बीएससी सेकंड ईयर के कीट शास्त्र का पेपर लीक होने का मामला सामने आया। जब जांच आगे बढ़ी तो फस्र्ट ईयर के प्लांट पैथोलॉजी का पेपर लीक करने की बात भी सामने आई। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बीते 7 अगस्त को आयोजित प्लांट पैथोलॉजी की परीक्षा भी रद्द कर दी है।
ये हैं छह आरोपी
0 योगेश सोनकेसरिया, उम्र 38 साल निवासी ग्राम भैरोगंज, तहसील, थाना व जिला सिवनी (मध्य प्रदेश)हाल पता -चंदखुरी दुर्गा चौक थाना पुलगांव जिला दुर्ग।
0 अजय नायक, उम्र 20 साल, निवासी ग्राम कुशभाटा पोस्ट नगरदा जिला बलौदा बाजारहाल पता – मीनाक्षी नगर बोरसी जिला दुर्ग।
0 त्रिदेव पटेल, उम्र 22 साल, निवासी ग्राम कनकेवा थाना सरायपाली जिला महाससुंद। हाल पता – फेस 02 ब्लॉक ई 107 आनंद विहार जिला दुर्ग।
0 नितिन पाण्डेय, उम्र 22 साल, निवासी ग्राम आसना तामाकोनी थाना कोतवाली जिला बस्तर। हाल पता- मीनाक्षी नगर बोरसी जिला दुर्ग।
0 अनुज मिंज, उम्र 22 साल निवासी ग्राम पाकरगांव थाना पत्थलगांव जिला जशपुर। हाल पता-संजय साहू हॉस्टल पोटिया चौक जिला दुर्ग।
0 आदित्य साहू, उम्र 20 साल निवासी हथौद थाना बालोद जिला बालोद। हाल पता – मीनाक्षी नगर बोरसी जिला दुर्ग।
जानें क्या था मामला
बता दें कि बीएससी द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी विषय की परीक्षा के प्रश्नपत्र के लीक होने की सूचना विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले मिल गई थी। सुबह 8:50 बजे कवर्धा से प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए साढ़े दस बजे परीक्षा निरस्त करने का फैसला लिया। मामले की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है। समिति पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट पेश करेगी। इसके बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि विश्वविद्यालय के प्रश्नपत्रों की सेटिंग एवं छपाई विश्वविद्यालय स्तर पर होता है। इसके बाद प्रश्नपत्र संबंधित महाविद्यालयों को भेजे जाते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक होने की घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
