बेमेतरा/ एक ओर जहां कोरोना वैश्विक महामारी के बाद देश की जीडीपी में भी काफी गिरावट की बात कही जा रही है। इसके साथ ही व्यापारी चाहे किसी भी व्यापार से जुड़ा हुआ हो मंदी का रोना एक सामान्य बात हो गई है। हो भी क्यों न, आज की तारीख में पूरे देश में मंदी के हालात बने हुए हैं, जिसके चलते व्यापारी वर्ग में खासी निराशा व परेशानी देखी जा रही है, किंतु इन सबसे हटकर शासन द्वारा बेची जा रही शराब दुकान के आंकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि बिक्री के आंकड़े यह बताने के लिए काफी है कि इस शराब के व्यवसाय पर इसका कोई विपरीत असर नहीं पड़ा। इसके चलते ही करोना के हालात के बाद भी मार्च माह से अब तक जिले में 68 करोड़ 53 लाख की शराब बेची जा चुकीबहै। हालांकि उक्त आंकड़ा नए वित्तीय वर्ष से शुरुआत के बाद की है, तथा यह कहा जा सकता है कि नए वित्तीय वर्ष के साथ ही कोरोना की मार शुरू हुई है। इसके चलते सभी व्यापार-व्यवसाय तो प्रभावित हुए हैं पर शराब के धंधे पर इसका कोई खास असर हो नहीं पाया है।तुलनात्मक अध्ययन की अगर बात की। जाए तोगत वर्ष इसी अवधि में जहां जिले में लगभग 93 करोड़ की शराब बेची गई थी। आंकड़े गत वर्ष की तुलना में कम कहे जा सकते हैं किंतु यह बताना भी लाजिमी होगा कि इस दौरान लॉकडाउन के बने हालात के चलते 40 दिन शराब की दुकानें बंद भी रहीं तथा इन 40 दिनों के बंद के हालात के औसत को भी यदि जोड़ दिया दिया जाए तो आंकड़े गत वर्ष से कम नहीं कहे जा सकते।
हालांकि शराब की बिक्री के आंकड़े शासन के द्वारा बेची जा रही शासकीय शराब दुकानों के ही हैं किंतु इसके अतिरिक्त40 दिन के बने लॉकडाउन के हालत के चलते शासकीय दुकानों का बंद होना तथा इस दौरान अंचल में अवैध शराब की बिक्री भी खूब होना । यदि इन सब आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो लॉक डाउन की अवधि में आंकड़े गत वर्ष से भी आगे जाने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। लॉकडाउन में जिले में ही नहीं वरन पूरे प्रदेश में जिस मात्रा में अवैध शराब की बिक्री हुई है वह निश्चित रूप से आंकड़े चौकाने वाले कहे जा सकते हैं। इसके साथ ही साथ शराब की दुकान खोलने के बाद भी जिस तरह से अंचल में प्रतिदिन आबकारी विभाग तथा पुलिस के द्वारा जिस तरह से अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है वह न केवल यह बताती है कि अंचल में अवैध शराब का कारोबार भी बेखौफ किया जा रहा है। बल्कि लॉकडाउन के बने हालात में भी यह व्यापार फला और फूला तथा पूरे देश में यही एक ऐसा व्यापार रहा जिसे कोरोना वैश्विक महामारी प्रभावित नहीं कर पाया।
