पोटा केबिन में नाबालिग छात्राओं के गर्भवती होने का मामला विस में उठा, विपक्ष ने किया बहिर्गमन


रायपुर। बीजापुर जिले के पोटा केबिन स्कूल में तीन नाबालिग छात्राओं के गर्भवती होने का मामला सोमवार को विधानसभा में जोर-शोर से उठा। विपक्षी कांग्रेस सदस्यों ने विधानसभा में काम रोको प्रस्ताव के जरिए इस पर तत्काल चर्चा की मांग की, लेकिन सरकार के जवाब के बाद प्रस्ताव अस्वीकृत कर दिया गया। इससे नाराज विपक्षी सदस्यों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया। प्रश्नकाल के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मामला उठाते हुए कहा कि पोटा केबिन स्कूलों में छात्राओं के गर्भवती होने की घटनाएं सामने आ रही हैं और वर्ष 2024 से इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने बीजापुर के गंगालूर का हालिया मामला उठाते हुए काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग की। कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी और लखेश्वर बघेल ने भी मामले को गंभीर बताते हुए तुरंत चर्चा कराने की मांग की। वहीं कांग्रेस विधायक देवेन्द्र यादव ने आशंका जताई कि छत्तीसगढ़ में भी एपस्टीन फाइल्स जैसी स्थिति बन सकती है, इसलिए इस विषय पर तत्काल चर्चा जरूरी है। काम रोको प्रस्ताव में कहा गया कि बीजापुर जिले के गंगालूर स्थित पोटा केबिन हाई स्कूल के छात्रावास में अध्ययनरत तीन नाबालिग छात्राओं के गर्भवती होने का मामला सामने आने के बाद घटना को दबाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि मामला उजागर होने के बाद तीनों छात्राओं को छात्रावास से उनके घर भेज दिया गया और अनुपस्थिति दिखाकर मामले को शांत करने की कोशिश की गई। आरोप लगाया गया कि घटना की जानकारी मिलने के बावजूद दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें संरक्षण दिया गया और मामले को दबाने की कोशिश की गई। विपक्षी सदस्यों ने तीनों प्रकरणों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा मामले को दबाने का प्रयास करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने की मांग की। साथ ही इस विषय पर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर चर्चा कराने का आग्रह किया गया। आसंदी ने स्थगन की सूचना को अग्राह्य करने पर विपक्ष ने बहिर्गमन कर दिया।

छात्रावास की छात्राओं के संबंध में प्रसारित खबर भ्रामक एवं तथ्यहीन
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पोटा केबिन हाई स्कूल छात्रावास की तीन छात्राएँ गर्भवती हैं। इस संबंध में शिक्षा विभाग द्वारा मामले की तथ्यात्मक जांच कराई गई, जिसमें उक्त खबर भ्रामक एवं निराधार पाई गई है। उक्त मामले में आज विधानसभा के सदन में सरकार की ओर से स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि मामले में प्रस्तुत तथ्यों की विस्तृत जांच की गई है। मंत्री ने कहा कि जिन तीन छात्राओं का उल्लेख किया जा रहा है, उनमें से दो छात्राएँ पोटा केबिन हाई स्कूल छात्रावास की निवासी नहीं हैं। वे स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम विद्यालय, गंगालूर में अध्ययनरत हैं और अपने घर से ही विद्यालय आना-जाना करती हैं। मंत्री ने आगे बताया कि समाचार में उल्लेखित तीसरी छात्रा पूर्व में पोर्टा केबिन हाई स्कूल छात्रावास में अध्ययनरत थी, लेकिन 18 अक्टूबर 2025 को दीपावली अवकाश में घर जाने के बाद से वह छात्रावास वापस नहीं आई। इसके बाद 6 नवंबर 2025 को छात्रा ने छात्रावास में उपस्थित होकर स्वेच्छा से घर से आना-जाना करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था।

तब से वह छात्रावास में निवास नहीं कर रही है। मंत्री के अनुसार छात्रा को छात्रावास से निष्कासित नहीं किया गया है, बल्कि उसने स्वयं छात्रावास छोडक़र अन्यत्र रहकर पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि संबंधित छात्राओं एवं उनके अभिभावकों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।—-
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