छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। वित्त मंत्री ने अपने तीसरे बजट में दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ “संकल्प” थीम पर आधारित बजट पेश किया है। उन्होंने अपने पहले बजट में “ज्ञान” (GYAN) और दूसरे बजट में “गति” (GATI) को आधार बनाया था। अब तीसरे बजट में उन्होंने “संकल्प” (SANKALP) को दृढ़ता से रखा है। पहले बजट में ज्ञान यानी गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी को केंद्र बिंदु में रखकर योजना बनाई गई थी। जबकि दूसरे बजट में गति यानी सुशासन, अधोसंरचना, टेक्नोलॉजी और औद्योगिक विकास मुख्य बिंदु थे। अब संकल्प यानी समावेशी विकास, अधोसंरचना, निवेश, कुशल मानव संसाधन, अंत्योदय, लाइवलीहुड और पॉलिसी से परिणाम को आधार बनाया गया है। जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में रिफॉर्म को चिन्हित कर उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया है। वित्त मंत्री का मानना है कि यह बजट विकसित छत्तीसगढ़ के विजन डॉक्यूमेंट- छत्तीसगढ़ अंजोर- 2047 के लक्ष्यों की पूर्ति एवं राज्य की सतत विकास यात्रा में उठाया गया एक कदम है। वैसे इस बार के बजट में किसानों, महिलाओं, युवाओं से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और टेक्नोलॉजी तक हर क्षेत्र में कुछ ना कुछ नया करने का प्रयास किया गया है। कई नई योजनाओं की घोषणा की गई है, जिनमें विकसित भारत जी राम जी योजना, मुख्यमंत्री आदर्श शहर समृद्धि, मुख्यमंत्री द्रुतगामी सड़क संपर्क, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट शाला, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, सीजी एस, रानी दुर्गावती, लखपति दीदी भ्रमण, मुख्यमंत्री आस्था पथ और छत्तीसगढ़ युवा दर्शन योजना शामिल हैं। इसके अलावा अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी, राज्य में 23 नए औद्योगिक पार्क, लैंड बैंक विकास योजना जैसे कई महत्वपूर्ण नई पहल शुरू करने की बात कही गई है। बजट में सरगुजा, बस्तर और अन्य पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्र के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार का रोड मैप सामने रखा गया है। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसी पहलों के लिए भी संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिल सके। साथ ही बस्तर फाइटर्स के 1500 नए पदों का सृजन किया गया है। बजट में महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने महिलाओं के नाम से संपत्ति क्रय पर लगने वाले पंजीयन शुल्क में 50% की छूट का प्रस्ताव रखा है। वहीं, रानी दुर्गावती योजना के तहत 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर पात्र बालिकाओं को 1.5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। जहां तक अर्थव्यवस्था की बात है तो इस साल कुल व्यय 1.72 लाख करोड़ रुपए निर्धारित है, जिसमें राजस्व में 1.45 लाख करोड़ और पूंजीगत व्यय 26, 500 करोड़ रखा गया है। पूंजीगत व्यय में वृद्धि से सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसी स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण को गति मिलेगी। वहीं, राजकोषीय घाटा जीएसडीपी के 2.87 प्रतिशत पर नियंत्रित रखा गया है, जो संतुलित वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है और राज्य की मजबूत आर्थिक स्थिति का संकेत देता है। बहरहाल, वित्त मंत्री ने बजट के जरिए अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ समाज के सभी वर्गों को साधने की कोशिश की है, लेकिन उनके सामने वित्तीय अनुशासन के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को पूरा करने की चुनौती भी है। शायद इसलिए उन्होंने अपने बजट भाषण के अंत में कहा है-
विपदा चाहे वज्र बन आए, संकल्प न झुकने पाता है। दीप अकेला भी जल उठे तो, रात स्वयं झुक जाता है।
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