रायपुर/ छत्तीसगढ़ का वार्षिक बजट को विधान सभा में प्रस्तुत किया गया. बजट में सामान्यतः नीतिगत घोषणाएँ और वित्तीय प्रावधान प्रमुख होते हैं, किंतु वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी का दृष्टिकोण अपनी क्रमिक और सुसंगत विकास-रचना के कारण विशिष्ट है । वर्ष 2024 में GYAN (क्षमता निर्माण), 2025 में GATI (अधोसंरचना के माध्यम से विकास में तेजी) और अब 2026 में SANKALP (मिशन-आधारित एकीकृत प्रयास) SANKALP के सात स्तंभ उस बजट की विकास-दिशा को आकार देते हैं, जो 5,000 करोड़ रूपए से बढ़कर 1,72,000 करोड़ रूपए तक, लगभग 35 गुना विस्तार प्राप्त कर चुका है।
सामाजिक-आर्थिक और भौगोलिक समावेशन (समावेश)ः- उत्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों में अधोसंरचना, शिक्षा और खेल सुविधाओं पर विशेष बल देते हुए यह बजट सुनिश्चित करना चाहता है कि इन क्षेत्रों के निवासी केवल विकास के लाभार्थी न रहें, बल्कि उससे संस्थागत रूप से जुड़कर विकास में भागीदार बनें। बजट में बस्तर और सरगुजा विकास प्राधिकरणों को संयुक्त रूप से 150 करोड़ रूपए का प्रावधान किए गए हैं। कृषि-आधारित एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 100 करोड़ रूपए की विशेष निवेश प्रोत्साहन योजना इन क्षेत्रों की उत्पादक संरचना को सुदृढ़ करने का प्रयास है।
पिछड़े क्षेत्रों में सर्व-ऋतु सड़कों का निर्माण तथा मौजूदा सड़कों का उन्नयन एक क्रमबद्ध दृष्टिकोण को दर्शाता है। पहले पहुंच सुनिश्चित करना, फिर गुणवत्ता सुधारना। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी की स्थापना, जो पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे हैं, इस नीति-दृष्टि का स्पष्ट संकेत है। इसके लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है, जिससे संघर्ष-प्रभावित भू-भाग को शैक्षणिक केंद्रों में रूपांतरित करने का प्रयास किया जा रहा है।
*अधोसंरचना- दीर्घकालिक विकास का सक्षमकारी ढांचा*
नगरीय क्षेत्रों में ध्यान उन्नयन और आधुनिकीकरण पर केंद्रित है। रायपुर में 100 करोड़ रूपए की लागत से विद्युत आपूर्ति की भूमिगत केबलिंग, सड़क विकास, तथा CG VAYU योजना के माध्यम से विमानन सुविधाओं का विस्तार। ये सभी तीव्र आर्थिक विस्तार के लिए आधारभूत तंत्र को मजबूत करेंगे। दंतेवाड़ा, मनेन्द्रगढ़ और कबीरधाम में मेडिकल कॉलेजों का विस्तार, अंबिकापुर और धमतरी में जिला अस्पतालों का सुदृढ़ीकरण, तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 2,000 करोड़ रूपए का प्रावधान। स्वास्थ्य संस्थागत क्षमता को गहराई प्रदान करेंगे। पूंजीगत व्यय 27,000 करोड़ रूपए निर्धारित है, जबकि जल संसाधन विभाग को 3,500 करोड़ रूपए का ऐतिहासिक आवंटन प्राप्त हुआ है, जिससे जल प्रबंधन बेहतर होना अपेक्षित है। अधोसंरचना को यहाँ केवल पूंजीगत व्यय के रूप में नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास के सक्षमकारी ढांचे के रूप में परिभाषित किया गया है।
*निवेश नीति- विस्तार और रणनीतिक स्थिति-निर्धारण*
यह बजट औद्योगिक प्रतिबद्धता के विस्तार का संकेत देता है। उद्योग विभाग का आवंटन 2024-25 के 648 करोड़ रूपए से बढ़कर इस वर्ष 1,750 करोड़ रूपए हो गया है, अर्थात दो वर्षों में इसमें लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। राज्य में निवेश प्रोत्साहन नीति तीन आयामों में संगठित है।
पहला पारंपरिक औद्योगिक विस्तार के अंतर्गत 23 नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना तथा भविष्य के औद्योगिक जोनों के लिए 200 करोड़ रूपए का भूमि बैंक प्रस्तावित है।
दूसरा मुख्यमंत्री AI मिशन के माध्यम से नवीन प्रौद्योगिकी में रणनीतिक मजबूती प्राप्त करना। यह मिशन AI प्रतिभा निर्माण, AI -आधारित स्टार्टअप प्रोत्साहन, तथा अनुसंधान एवं नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर केंद्रित है।
तीसरा, महत्वपूर्ण खनिजों और कृषि-आधारित मूल्य शृंखलाओं में विविधीकरण। सामरिक खनिज अन्वेषण ऊर्जा संक्रमण और उन्नत विनिर्माण की वैश्विक दिशा के संदर्भ में राज्य की स्थिति को सुदृढ़ करता है। 150 करोड़ रूपए की ऑयल पाम पहल के साथ साथ तिलहन, दलहन और प्राकृतिक खेती से संबंधित कार्यक्रम कृषि-औद्योगिक एकीकरण को प्रोत्साहित कर सकेंगे। इस प्रकार राज्य की निवेश नीति विभिन्न घोषणाओं के स्थान पर स्पष्ट मिशन-आधारित ढांचे में ढली दिखाई देती है।
*कुशल मानव संसाधन*
विकसित होती अर्थव्यवस्था की स्थिरता उसके कार्यबल की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। इस बजट में मानव संसाधन रणनीति व्यापक है और विभिन्न कौशल स्तरों को संबोधित करती है। नई CG-ACE योजना के अंतर्गत NEET/JEE, UPSC/CGPSC तथा बैंकिंग/रेलवे परीक्षाओं की तैयारी हेतु 33 करोड़ रूपए का प्रावधान है। राज्य में सात छत्तीसगढ़ प्रौद्योगिकी संस्थान संचालित किए जा रहे हैं।
*संरचनात्मक स्तर पर*, Mission NIPUN (New-Age Industry Preparedness through Up-skilling of New Generation Youth) प्रशिक्षण और कौशल उन्नयन के माध्यम से उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यबल निर्माण का प्रयास इस बजट में दिखाई देता है। ।प् मिशन द्वारा भी उत्कृष्टता केंद्रों और उच्च स्तरीय कौशल विकास के माध्यम से उन्नत क्षमता निर्माण में योगदान दिए जाने की आशा है ।शिक्षा और कौशल को अब केवल पहुँच के संदर्भ में नहीं, बल्कि रोजगारपरक योग्यता और उत्पादकता के परिप्रेक्ष्य में इस बजट से व्यापक सुधार की आशा की जा सकती है ।
*अंत्योदय*
अंत्योदय का सिद्धांत है कि विकास तब तक अधूरा है जब तक वह अंतिम व्यक्ति तक न पहुँचे। यह बजट इस सिद्धांत को बहुस्तरीय प्रावधानों के माध्यम से क्रियान्वित करता है। अनुसूचित क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों को अतिरिक्त अनुदान, बस्तर और सरगुजा में लक्षित विकास, शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना (1,500 करोड़ रूपए, 5 लाख तक निःशुल्क उपचार), दृष्टि एवं श्रवण बाधित बच्चों के लिए आवासीय विद्यालय, 33 जिलों में नशा मुक्ति केंद्र तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए डे-केयर सुविधाएँ । ये सभी अंतिम छोर तक सेवा-संप्रेषण को सुदृढ़ करते हैं।
महतारी वंदन योजना, जिसके अंतर्गत 70 लाख महिलाओं को 24 किश्तों में 14,000 करोड़ रूपए से अधिक वितरित किए जा चुके हैं, इस बजट में 8,200 करोड़ रूपए के प्रावधान के साथ जारी है।
*आजीविका*
अधोसंरचना, निवेश, कौशल विकास और सामाजिक प्रावधान विकास के साधन हैं; आजीविका उनका परिणाम है। कृषक उन्नति योजना – जिसके माध्यम से तीन खरीफ सत्रों में किसानों को 1,40,000 करोड़ रूपए से अधिक प्रदान किए गए हैं और इस बजट में 10,000 करोड़ रूपए का प्रावधान है कृ से लेकर कृषि-आधारित उद्योग प्रोत्साहन, स्टार्टअप समर्थन और तिलहन विविधीकरण तक, बजट यह स्पष्ट करता है कि उत्पादक अवसर विकास का उप-उत्पाद नहीं, बल्कि उसका घोषित उद्देश्य है।
*नीति से परिणाम*
क्रियान्वयन की विश्वसनीयता पर विशेष बल दिया गया है। शासकीय कर्मचारियों के लिए कैशलेस उपचार सुविधा, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली तथा ई-ऑफिस का कार्यान्वयन प्रशासनिक दक्षता और निगरानी को सुदृढ़ करते हैं।
SNA Sparsh (रीयल-टाइम भुगतान सुधार) में राज्य के प्रदर्शन के परिणामस्वरूप 500 करोड़ रूपए का अतिरिक्त केंद्रीय हस्तांतरण प्राप्त हुआ है, जिसे प्रशासनिक अनुशासन के प्रत्यक्ष वित्तीय प्रतिफल के रूप में देखा जा सकता है।
*निष्कर्षात्मक मूल्यांकन*
2026-27 बजट की विशिष्टता उसकी संरचनात्मक संगति में निहित है। अधोसंरचना विस्तार, निवेश प्रोत्साहन और मानव पूंजी निर्माण स्पष्ट उद्देश्यों से जुड़े मिशन-आधारित ढांचे में समाहित हैं। यह बजट व्यय-सूची से आगे बढ़कर कार्यक्रम-आधारित विकास-अभिकल्पना की दिशा में संगठित प्रयास दिखाई पड़ता है। मापने योग्य लक्ष्यों, संस्थागत सुधारों और उभरती आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप मानव पूंजी निवेश के माध्यम से यह छत्तीसगढ़ के विकास के अगले चरण का आधार निर्मित करेगा, ऐसी आशा की जा सकती है। यह ऐसा बजट है, जो विकास के संकल्प को संस्थागत ढांचे में समाहित करने का प्रयास करता है और इसे दीर्घकालिक स्वरूप प्रदान करता है।
0 डॉ दिनेश कुमार मस्ता
सहायक प्राध्यापक (अर्थशास्त्र)
आईआईएम बैंगलोर से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट
