“गण” और “तंत्र” करें “गणतंत्र” को मजबूत

0 संजीव वर्मा

देश आज 26 जनवरी को 77वॉ गणतंत्र दिवस मना रहा है। यह भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है, जब देश ने स्वयं को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया था। 1950 में इसी दिन भारतीय संविधान लागू हुआ और सत्ता का सर्वोच्च अधिकार जनता के हाथों में सौंपा गया। गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि अधिकारों के साथ कर्तव्य भी जुड़े हैं। आज जब लोकतंत्र के सामने असहिष्णुता, भ्रष्टाचार, सामाजिक असमानता और संस्थागत दबाव जैसी चुनौतियाँ खड़ी हैं, तब संविधान की भावना को जीवित रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। साथ ही जनता द्वारा निर्वाचित सभी जनप्रतिनिधियों का यह दायित्व हो जाता है कि वह गणतंत्र की मजबूती के लिए अपने ऊपर तंत्र को हावी न होने दें। तंत्र यानी नौकरशाही जिसमें अफसरों से लेकर प्रभावशाली अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं वे हावी न हो पाएं। जनता द्वारा निर्वाचित व्यक्ति गणतंत्र की मूल भावना को भलीभॉति समझता है क्योंकि उसे उस जनता ने चुना है। जहां तक नौकरशाहों का सवाल है वह हमेशा इस बात की कोशिश करते हैं कि सत्ताधीश उसकी मर्जी से चलें। लेकिन वास्तव में गणतंत्र की मजबूती के लिए गणों का मजबूत होना जरुरी है और तंत्र को उनका सहभागी होना चाहिए। दोनों मिलकर ही गणतंत्र को फलीभूत कर सकते हैं। गणतंत्र का मूल, तंत्र नहीं बल्कि वह आम आदमी है, जिसके द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि के माध्यम से देश की समस्याओं को हल किया जाता है और देश कैसे मजबूत हो ऐसी नीतियों को आकार दिया जाता है।
देश के सामने समस्याएं और चुनौतियां हमेशा ही मुंह बाये सामने खड़ी रहती हैं, लेकिन उनका समाधान करना राष्ट्र का नेतृत्व करने वाले नेता को खोजना होता है। समस्याएं अनेकों रही हों, चुनौतियां भले ही हिमालयीन ऊंचाई लिए हों लेकिन हमने देखा है कि जब-जब जो चुनौती आई है उस पर विजय प्राप्त कर भारत और अधिक मजबूती से आगे बढ़ने के लिए कृतसंकल्पित हुआ है। इसमें दो-मत नहीं हो सकते कि भारत पिछले 76 सालों में हर साल सशक्त और मजबूत होता गया है और आज विश्व फलक पर मजबूत पायदान पर खड़ा है, जिसकी ओर अब विकसित माने जाने वाले देश भी देख रहे हैं। किसी भी लोकतांत्रिक देश में गणतंत्र का मूल तंत्र नहीं बल्कि वह सर्वहारा आदमी है जो अंतिम पंक्ति के अंतिम छोर तक खड़ा रहता है। अक्सर देखने में आया है कि तंत्र की यह सोच रहती है कि वह अपने आपको शासक और गण को प्रजा समझता है। समय की मांग यह है कि गण को अधिक से अधिक मजबूत किया जाए और उसकी मजबूती के लिए समस्त उपलब्ध संसाधनों को झोंक दिया जाए। हाल के कुछ वर्षों में यह देखने में आया है कि केंद्र व राज्यों के बीच टकराव की नौबत आ रही है, यह हमारे गणतंत्र को कमजोर करने वाली बातें हैं। संविधान निर्माताओं ने संविधान में केंद्र व राज्यों की शक्ति और अधिकार तथा उनकी सीमाओं को बहुत ही स्पष्ट तरीके से रेखांकित किया है। जब-जब कोई भी उस सीमा रेखा को लांघने की कोशिश करता है या केवल अपना वर्चस्व स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ता है तब-तब केंद्र तथा राज्यों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है। यह टकराहट उन राज्यों में देखने को मिलती है जहां केंद्र और राज्य के सत्ताधारी दल अलग-अलग हैं। गणतंत्र की मजबूती के लिए यह जरुरी है कि इस प्रकार की समस्याएं व टकराव की घटनाएं न्यूनतम हों, क्योंकि लोकतंत्र में केंद्र में किसी दल की और राज्य में किसी अन्य दल की सरकार होगी। इनके बीच आपसी टकराव की स्थितियां पैदा न होने पाएं इसके लिए यह नितान्त जरुरी है कि संवैधानिक प्रावधानों के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्धता हो और संविधान द्वारा जो लक्ष्मण रेखा खींची गयी है, उसका उल्लंघन न किया जाये।सत्ता प्राप्ति को एकमेव लक्ष्य मानते हुए एक शार्टकट के रुप में सामाजिक वैमनस्य फैलाने के यदाकदा जो प्रयास होते हैं, उनमें तीव्रता के स्थान पर उन्हें तिरोहित करने की भावना केंद्र व राज्यों के बीच होना चाहिये। हमें यह याद रखना चाहिए कि सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारा भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का मूल आधार है और अनेकता में एकता ही हमारी असली पूंजी व ताकत है। भारत में बहुसंख्यकों और अल्पसंख्यकों के बीच परस्पर अविश्वास की लकीरें गहरी होती जा रही हैं, जबकि आवश्यकता इस बात की है कि इस प्रकार के अविश्वास की भावना को धीरे-धीरे तिरोहित किया जाए। आज सत्ता में आने के लिये देशवासियों को धर्म, जातियों और समूहों में बांटकर अपना वोट बैंक तैयार करने की राजनीति परवान चढ़ रही है और लोग भी इसमें ही अपना भला समझने लगे हैं। ऐसी प्रवृत्तियों से हर हाल में बचा जाना चाहिए। हमारा यह प्रयास होना चाहिये कि जनता का हित और उसकी आकांक्षाओं की पूर्ति सर्वोपरि रहे और हमारा गणतंत्र स्वच्छ, सरल व निर्मल बना रहे।
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं…!