0 शराब में पानी मिला कर बेचने का आरोप, मंत्री ने कहा कुछ जगह पाया गया कार्यवाही की
रायपुर/ पंचम विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन आज प्रश्नकाल में आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सदन में शराब बिक्री में राजस्व हानि पहुंचाने अधिकारियों द्वारा साठगांठ कर की जा रही गड़बड़ी के प्रश्न पर घेरते हुए नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक , संतराम नेताम ,अजय चंद्राकर,सौरभ सिंह,रजनेश सिंह ने अपने अपने प्रश्नों के माध्यम से असहज कर दिया। विभाग पर आरोप लगते हुए कहा गया कि बताया जा रहा है कि जहां गड़बड़ी पाई गई है वहां नौकरी से निकाला गया है। लेकिन वे प्लेसमेंट एजेंसी के लोग है ,अधिकारियों पर क्या कार्यवाही की गई ? अधिकारियों से सांठगांठ कर शराब बिक्री में ,खरीदी,भुगतान, अमानक शराब की बिक्री का मुद्दा उठाते हुए यह भी कहा गया कि करोड़ों रुपये का खेल प्रदेश में चल रहा है। मंत्री कवासी लखमा प्रश्नों की झड़ी से असहज हो गए फिर भी सधे हुए शब्दों में जवाब देते रहे। उनकी असहजता देख कर चंद्राकर ने सदन में चार बार कहा कि हम आप पर कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं, आपके विभागीय अधिकारी जिहोने व्यवस्था बिगाड़ी और लगातार गड़बड़ कर रहे हैं, उन पर कार्यवाही की बात कर रहे हैं। अंततः अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने आसंदी से हस्तक्षेप करते हुए निर्देश दिए कि मंत्री जांच करवा लें, दोषी अधिकारी पर कार्यवाही सुनिश्चित करें। प्रश्न से असहज मंत्री के बचाव में संसदीय मंत्री रविन्द्र चौबे व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत सामने आये और जवाब देने की कोशिश की तो चंद्राकर ने आपत्ति की।
मूल प्रश्न पर संतराम नेताम ने पूछा कि कितनी शराब खरीदी गई। जवाब में आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने बताया कि देशी मदिरा 2 कोड 17 लाख पच्चासी हजार छैसठ प्रूफ लीटर , विदेशी मदिरा 1 करोड़ उनसठ लाख दस हजार पांच सौ उन्नतीस प्रूफ लीटर व विदेसी माड़िया माल्ट चौरासी लाख सैतालिस हजार नवासी बल्क लीटर शराब 31 जुलाई 20 तक छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा क्रय की गई। हमने कोई के नीति नहीं बनाई है जो भी खरीदी नीति है वो पूर्ववर्ती सरकार द्वारा बनाई गई है उसी का हम पालन कर रहे हैं। खरीदी की प्रकिया कॉर्पोरेशन ही पूरी करता है,वो हमें एडवांस राशि जमा करता है। संत राम ने कहा कि किंग फिशर की बीयर बस्तर क्षेत्र में नहीं पहुंचती। मंत्री ने कहा कि में आईएन सलाह लेकर जो ये कहेंगें बस्तर के लोग जो जो मांगेंगे उसको पूरा करेंगें।
नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने अपने पशन में आरोप लगाते हुए कहा कि जो राजस्व की आय शराब से होनी चाहिए उसमे गड़बड़ी कर चुना लगाया जा रहा है। अधिक दाम पर बेची जा रही है और उसका निजी लाभ कमाया जा रहा है। मंत्री लखमा ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष की शिकायत समेत 5591 शिकायते प्राप्त हुई थी , उन पर जांच हुई थी। जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर दोषी 701 लोगों को नौकरी से निकाला गया, उन पर 28 लाख की शास्ति भी लगाई गई। । कौशिक ने कहा कि मेरी शिकायत पर हुआ पर शास्ति कैसे लगाई जाती है , और आपने कैसे नौकरी से निकाला, जबकि वे सभी प्लेसमेंट एजेंसी में काम करते हैं ,आपने किसी एजेंसी पर कार्यवाही की क्या ? करोड़ों को चुना लगाने वाली इन एजेंसियों पर एफआईआर क्यों नहीं की ? आपकी जानकारी में गड़बड़ी हो रही है। शराब में पानी मिला कर बेच रहे हैं,अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर यह संभव नहीं है। उन पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे हैं ? अनेक जिलों में पानी मिलाकर बेच रहे हैं आपने सिर्फ गनियारी में कार्यवाही वर्करों पर की है। मंत्री ने पानी मिलने की की बात स्वीकार करते हुए कहा कि आप जो अधिकारियों की बात कह रहे हैं वो भी दिखवा लेंगें। सौरभ सिंह ने बीयर की बात उठाते हुए कहा कि बड़ी मात्रा में खरीदी कर ली गई , लाभ कमाया गया और बहुत बड़ी मात्रा में रखी बीयर खराब हो गई , उसका जिम्मेदार कौन है ? नियम कहता है कि बिक्री न हो पाए तो 6 माह बाद नष्ट कर देना चाहिए। आपने एक पेटी भी नष्ट नहीं की। मंत्री लखमा ने कहा कि ऐसा तो नहीं है , पर आपकी नजर में कोई ऐसा मामला है तो बता देंगें तो उसे दिखवा लेंगें। भाजपा सदस्य रजनेश सिंह ने बताया कि प्लेसमेंट एजेंसियां 6 माह तक नगद राशि का खुद उपयोग करती है , लाखों रुपयों के ऐसे पड़े रहने से ब्याज का भारी नुकसान सरकारी विभाग को हो रहा है। सौरभ ने भी बताया कि सारे जिलों में यही हाल है , अधिकारियों की सांठ गांठ से ही यह सब चल रहा है ,एजेंसियां पैसे रखे रहती है, उसका भरपूर उपयोग करती हैं, और ब्याज का नुकसान सरकार का हो रहा है। पूरे मामले की चर्चा के बीच अंततः अध्यक्ष ने गड़बडी कर रहे अधिकारियों की जांच कर लेने और कार्यवाही करने का निर्देश आसंदी से दे दिया। मंत्री ने निर्देश का पालन करने की बात सदन में स्वीकार की।
जब कवासी ने आसंदी के जांच के निर्देश पर कहा दिखवा लेंगें
अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत व मंत्री कवासी लखमा के बीच के संवाद से थोड़ी देर के लिए हंसी का माहौल बन गया। जब अध्यक्ष ने आसंदी से जांच के सीधे निर्देश मंत्री को दिए तो स्वीकार्यता में मंत्री ने अपने भोले पन में कहा ठीक है दिखवा लेंगें। अध्यक्ष ने मुस्कुराते हुए कहा की दिखवा लेंगें नहीं जांच करवा लें। इसके बावजूद भी कवासी ने कहा ठीक है दिखवा लेंगें, इस पर सदन में सभी मुस्करा दिए। दरअसल लखमा बहुत ही सीधे सादे आदिवासी मंत्री हैं। संसदीय प्रक्रियात्मक शब्दों में अनेक बार उनसे इस प्रकार की हल्की फुल्की चूक होती है , उसे सदन में सुधार दिया जाता है। कोई भी सदस्य उसे गंभीर चूक नहीं मानता।
