छत्तीसगढ़ में बिजली की दरों में बढ़ोत्तरी किए अभी एक महीना भी नहीं गुजरा है और राज्य सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को एक और बड़ा झटका दे दिया है। सरकार ने हाफ बिजली बिल योजना में भारी कटौती कर दी है। इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश जारी किया गया है। 400 यूनिट प्रति माह खपत पर मिलने वाली हाफ बिजली बिल का लाभ पूरी तरह से खत्म हो गया है। अब केवल 100 यूनिट प्रति माह बिजली खपत करने पर ही हाफ बिजली का लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गया है। निश्चित रूप से इस आदेश से राज्य के बहुसंख्यक उपभोक्ता बिजली बिल हाफ योजना से वंचित हो गए हैं। खासकर मध्यम वर्ग के उपभोक्ता इससे ज्यादा प्रभावित होंगे और 20 से 22 लाख उपभोक्ता इसके दायरे से बाहर हो जाएंगे। सरकार का दावा है कि संशोधित योजना से 45 लाख उपभोक्ताओं में से 31 लाख सामान्य और कमजोर वर्ग के उपभोक्ताओं को पूर्ववत लाभ मिलता रहेगा। इनमें बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक मुक्त बिजली भी जारी रहेगी। यहां यह बताना जरूरी है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए हाफ बिजली बिल योजना शुरू की थी। इसके तहत 400 यूनिट तक मासिक खपत पर 50 फीसदी रियायत मिलती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकार ने 400 यूनिट की सीमा घटाकर 100 यूनिट कर दिया है। सरकार का दावा है कि अब प्रदेश सस्ती नहीं बल्कि मुफ्त बिजली की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके लिए पीएम सूर्याघर मुफ्त बिजली योजना लागू की जा रही है। इसके तहत घरेलू उपभोक्ता अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगाकर 25 सालों तक मुफ्त बिजली पा सकते हैं। सरकार का कहना है कि इससे उपभोक्ता न सिर्फ बिजली बिल से मुक्त होंगे बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर आय भी कमा सकेंगे। लेकिन, आम उपभोक्ताओं के लिए सोलर पैनल लगाना आसान नहीं है। भले ही सरकार सब्सिडी दे रही हो, पर उपभोक्ताओं को सोलर पैनल आकर्षित नहीं कर पा रहा है। दरअसल विशेषज्ञ मानते हैं कि बिजली सब्सिडी लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होती। शायद यही वजह है कि आम उपभोक्ता का झुकाव सोलर पैनल की ओर नहीं है। इस बीच, बिजली बिल हाफ योजना में कटौती को लेकर आम उपभोक्ताओं में गुस्सा है, तो वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को बैठे बिठाए ही एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। दरअसल, यह आम लोगों से जुड़ा हुआ मसला है। लिहाजा, कांग्रेस इसे लपकने में जरा भी देर नहीं की और आंदोलन की तैयारी में लग गई है। वैसे यह सच है कि बढ़ती महंगाई के बीच राज्य की जनता पर यह एक बड़ा बोझ है। इसकी मार सीधे मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं पर पड़ेगी। पिछले 6 सालों से बिजली बिल हाफ योजना से मध्यम वर्ग को काफी राहत मिली थी। एक अनुमान के मुताबिक इस योजना से प्रत्येक उपभोक्ताओं की 40 से 50 हजार रुपए की बचत हुई है। लेकिन अब कटौती का तड़का लग गया है। यह सुरसा के मुंह की तरह दिन दूनी रात चौगुनी की रफ्तार से बढ़ रही महंगाई के बीच आम उपभोक्ताओं के लिए दुबले पर दो आषाढ़ वाली स्थिति बन गई है। आखिर जनता करे तो क्या करें? सबकी मार उसे ही झेलनी पड़ती है। कांग्रेस अपना विपक्षी धर्म निभा रही है। उसके आंदोलन करने की मंशा पर किसी को शक नहीं है, लेकिन क्या सरकार पर इसका असर पड़ेगा? इसका उत्तर ना में ही है। ऐसे में आम जनता के सामने इसे स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। सरकार आम लोगों की सुविधा के लिए कई योजनाएं भी चला रही है, जिनमें महतारी वंदन, किसान समृद्धि योजना और केंद्र सरकार की पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं शामिल हैं, लेकिन बिजली बिल हाफ योजना बंद करने के आदेश से लग रहा है कि सरकार एक हाथ से दे और दूसरे हाथ से लें वाली कहावत को चरितार्थ करने में लगी हुई है।
उपभोक्ताओं को झटके पर झटका देती सरकार
