राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति से भारत वैश्विक ज्ञान की महाशिक्‍त बनकर उभरेगा – प्रो.शर्मा

0 राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 पर वेबिनार का आयोजन

 रायपुर/ राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति- 2020, इक्‍कसवीं सदी की पहली शिक्षा नीति है और इस क्रांतिकारी शिक्षा नीति के माध्‍यम से भारत, वैश्विक ज्ञान की एक महाशक्ति बनकर उभरेगा । य‍ह बात, अटल बिहारी वाजपेयी विश्‍वविद्यालय, बिलासपुर के कुल‍पति प्रोफेसर जी.डी. शर्मा ने पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) और रीनजरल आऊटरीच ब्‍यूरो (आरओबी), रायपुर के संयुक्‍त तत्‍वावधान में आज, राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 पर आयोजित एक वेबीनार में कही ।

     पत्र सूचना कार्यालय, रायपुर के अपर महानिदेशक  सुदर्शन पनतोड़े, सहायक निदेशक  सुनील कुमार तिवारी, प्रादेशिक समाचार एकांश, आकाशवाणी, रायपुर के सहायक निदेशक  विकल्‍प रंजन शुक्‍ला, फील्‍ड आऊटरीच ब्‍यूरो, बिलासपुर के क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी, डॉ. प्रेम कुमार, भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी डॉ. सुशील त्रिवेदी, बस्‍तर के प्रख्‍यात शिक्षाविद  धर्मपाल सैनी, अनेक शिक्षाविद् एवं अधिकारियों सहित लगभग 65 प्रतिभागी इस राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 पर आयोजित वेबिनार में शामिल हुए

  कुलपित, प्रोफेसर जी.डी. शर्मा ने कहा कि  राष्ट्रीय शिक्षा का विजन भारतीय मूल्यों से विकसित एक ऐसी प्रणाली विकसित करना है जिसमें उच्‍चत्‍तर गुणात्‍मक शिक्षा उपलब्‍ध कराकर भारत को वैश्विक ज्ञान की महाशक्ति बनाना है। इस नीति में शिक्षा के साथ ही साथ छात्रों और शिक्षकों में भी गुणात्‍मक सुधार करना है ताकि वे विश्‍व पटल पर नवाचार एवं अनुसंधान में अपनी महती भूमिका निभा सकें। उन्‍होंने कहा कि इस नीति से न केवल शिक्षा का स्‍तर ऊंचा होगा बल्कि शिक्षकों का कौशल विकास भी होगा, जिसमें उन्‍हें उच्‍चस्‍तर की ट्रेनिंग दी जाएगी । इसके अलावा परीक्षा का स्‍तर सुधरेगा जिससे अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा । विद्यार्थी माध्‍यमिक शिक्षा के साथ ही अपनी रूचि अनुसार रोजगार मूलक कौशल भी सीख सकेंगे । विद्यालयों और विश्‍वविद्यालयों के नियमन और संचालन के लिए अलग-अलग संस्‍थान होंगे । अनुसंधान मामले में जहां हम पीछे रह जाते हैं उसके लिए भी अलग से फोरम होगा।

प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि उन्‍हें आशा ही नहीं पूर्ण विश्‍वास है कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति से ‘वाट टू डू’ वाली मानकिसता से निकल कर  ‘हाऊ टू डू’ वाली मानसिकता विकसित होगी और ज्ञान, विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा । इस नीति से विद्यार्थी न केवल सामाजिक और सांस्‍कृतिक मूल्‍यों को जान पाएंगे बल्कि उन पर गर्व भी होगा ।

 माता रूक्मिणी सेवा संस्‍थान, डिमरापाल, जिला बस्‍तर के प्रख्‍यात शिक्षाविद् श्री धर्मपाल सैनी ने अपने विद्यालयों में शिक्षा के साथ किए गए प्रयोगों और उनकी सफलता के बारे में बताया । श्री सैनी ने कहा कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में माध्‍यमिक शिक्षा के साथ ही कौशल विकास को शामिल किया गया है । यह बहुत ही स्‍वागत योग्‍य कदम है । इससे स्‍वरोजगार के नए द्वार खुलेंगे । उन्‍होंने कहा कि इस नीति में प्रि-प्रायमरी सिस्‍टम्‍स को भी शामिल किया गया है । यह भी एक सराहनीय कदम है । यदि प्रि-प्रायमरी स्‍तर पर यानी आंगनवाड़ी केन्‍द्रों को बहुत सशक्‍त बनाया जाता है तो यह बहुत ही अच्‍छा होगा । राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति की खामियों का भी जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि इसमें शिक्षकों के प्रशिक्षण किस प्रकार किया जाएगा इसका जिक्र नहीं किया गया है ।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी डॉ सुशील त्रिवेदी ने राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को क्रांतिकारी और रूपान्‍तरकारी बताया । उन्‍होंने कहा कि इस नीति में बचपन से लेकर युवा अवस्‍था तक के जीवन को व्‍यवस्थित करने का मार्ग बताया गया है । डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि इसमें जिज्ञासात्‍मक, प्रतिबद्धता और सांस्‍कृतिक मूल्‍यों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया । इस नीति में 100 प्रतिशत एनरोलमेंट के साथ ही ड्रॉपआऊट जैसी समस्‍याओं पर भी ध्‍यान दिया गया है । इसके अलावा यह पहली शिक्षा नीति है जिसमें द्विवांगों के लिए समान रूप से शिक्षा देने की व्‍यवस्‍था की गयी है ।

वेबिनार के दौरान प्रतिभागियों द्वारा राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति पर सवाल भी किए गए जिनका जवाब विशेष अतिथियों द्वारा दिया गया । वेबिनार का संचालन रीजनल आऊरीच ब्‍यूरो, रायपुर के कार्यालय प्रमुख शैलैष फाये ने किया ।

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