0 संजीव वर्मा
देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह अडानी ग्रुप छत्तीसगढ़ में 65,000 करोड रुपए का निवेश करेगा। अडानी ने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड रुपए भी देने की घोषणा की है। यह घोषणा अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अभी हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात के दौरान की। उन्होंने बताया कि उनका ग्रुप रायपुर, कोरबा और रायगढ़ में पावर प्लांट्स के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। अडानी की इस प्रतिबद्धता से छत्तीसगढ़ की विद्युत उत्पादन क्षमता में 6,120 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की वृद्धि होगी। इससे छत्तीसगढ़ न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि अन्य राज्यों को भी ऊर्जा आपूर्ति में मदद करेगा। इस प्रकार छत्तीसगढ़ भी अन्य राज्यों को बिजली की आपूर्ति करेगा। ऐसा माना जा रहा है कि अडानी ग्रुप ने सीमेंट उद्योग में भी निवेश करने का मन बनाया है। ग्रुप ने राज्य में सीमेंट प्लांट्स के विस्तार के लिए 5,000 करोड रुपए के निवेश पर भी सहमति जताई है। इससे राज्य में सीमेंट उद्योग को मजबूती मिलेगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इस प्रकार छत्तीसगढ़ राज्य में बेरोजगारी की समस्या कुछ कम होगी। वहीं, अडानी ग्रुप राज्य में रक्षा उपकरण निर्माण, डाटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने की संभावनाएं भी टटोल रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात के दौरान चर्चा होने की खबर है। इसके अलावा वह युवाओं में रोजगार आधारित कौशल विकास के लिए काम करेगा। इससे तकनीकी कौशल आधारित मानव संसाधन की पर्याप्त उपलब्धता होगी। साथ ही उसने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अगले 4 वर्षों में लगभग 10,000 करोड़ रुपए का व्यय करने की घोषणा की है। यह पहल राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। दरअसल, राज्य सरकार प्रदेश को उभरते उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाना चाहती है। इसके लिए वर्तमान समय की जरूरत को देखते हुए नवाचारी गतिविधियों को बढ़ावा देना जरूरी है। इसमें अडानी समूह अपनी भागीदारी निभाना चाहता है। यही नहीं वह उद्योगों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए एम्स रायपुर और अंबेडकर अस्पताल के पास मरीजों के परिजनों के लिए 1000 बेड डार्मिटरी की सुविधा भी शुरू करने की बात कही है। निश्चित रूप से अडानी ग्रुप की यह पहला सराहनीय है। यह राज्य में युवाओं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अत्यधिक कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध होगा। हालांकि, अडानी समूह की इन घोषणाओं पर कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि यह घोषणा लोगों के बीच भ्रम पैदा करने का एक माध्यम मात्र है। उसने राज्य के लिए अब तक कुछ नहीं किया है, सिर्फ अपना स्वार्थ ही सिद्ध किया है। खैर, सबका देखने का अपना अलग-अलग नजरिया होता है। लेकिन यह भी सच है कि अडानी ग्रुप ने इस बहाने एक तीर से कई निशाने साध लिए हैं। सरगुजा से लेकर बस्तर तक वह अपना साम्राज्य फैलाना चाहता है। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। सरगुजा में उद्योग के नाम पर लाखों पेड़ कट चुके हैं। अब बस्तर की बारी है। हालांकि बस्तर में अभी कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि यहां भी उसकी नजर है। सरगुजा में तो स्थानीय लोगों के कड़े विरोध के बावजूद जंगल बचाए नहीं जा सके। धरना-प्रदर्शन से लेकर वह सब कुछ किया गया जिससे जंगल बचाए जा सके और पर्यावरण सुरक्षित हो। यही नहीं स्थानीय विधायक, सांसद से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई गई, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ और औद्योगिक विकास के नाम पर लाखों-करोड़ों पेड़ धडाधड़ काट दिए गए। ऐसे में लोगों का एकदम से उस पर भरोसा कर पाना मुश्किल है। अब देखना होगा कि इस घोषणा का क्या असर होता है और प्रदेश को तथा यहां के युवाओं को इसका कितना लाभ मिलेगा?