छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र अंतिम दिन बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सदन गरमाया; कांग्रेस विधायक निलंबित 

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आज समापन हो गया है। सोलह से बीस दिसंबर तक चले इस सत्र के दौरान कुल चार बैठकें हुईं।
सत्र के अंतिम दिन आज शून्यकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों द्वारा प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाया गया, जिसे उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा के वक्तव्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह ने अग्राह्य कर दिया। स्थगन प्रस्ताव की ग्राह्यता पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष की तीखी नोंकझोंक हुई। शोरशराबे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर कांग्रेस विधायक उमेश पटेल और अन्य कांग्रेस विधायक विधानसभा अध्यक्ष से स्थगन प्रस्ताव को ग्राह्य करने की मांग करते हुए गर्भगृह में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। विधानसभा के नियम के अनुसार गर्भगृह में पहुंचे विपक्षी विधायक विधायक स्वमेव निलंबित हो गए। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने सभी कांग्रेस विधायकों के निलंबन को समाप्त कर दिया। लेकिन कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास धरना दिया और सदन की शेष बची कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया।
भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने सदन में आज ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए पिछली राज्य सरकार के दौरान दवा खरीदी में वित्तीय अनियमितता का मामला उठाया। इस पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पाेरेशन द्वारा की गई दवाओं की खरीदी में वित्तीय अनियमितताओं की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो-ईओडब्ल्यू से कराने की घोषणा की।
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने आदिवासी क्षेत्रों में आश्रम-छात्रावास और पोटोकेबिन में बच्चों की मौत का मामला उठाया। अपने लिखित जवाब में मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि बीते बारह महीनों में अलग-अलग कारणों से चौदह बच्चों की मौत हुई है। इस पर श्री बघेल ने कहा कि इस वर्ष में पच्चीस से तीस बच्चों की मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि उनके पास इसकी पूरी सूची है। इस पर मंत्री श्री नेताम ने सभी मामलों की जांच कराने की घोषणा की और कहा कि जो भी दोषी पाया जाएगा। उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विधानसभा में आज उपमुख्यमंत्री और पंचायत तथा ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज संशोधन अध्यादेश-दो हजार चौबीस को सदन के पटल पर रखा। वहीं, भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर द्वारा प्रस्तुत अशासकीय संकल्प, जिसमें प्रदेश में स्थापित पोहा उद्योगों पर मंडी शुल्क दो रूपए प्रति सैकड़ा के स्थान पर एक प्रतिशत यानि एक रूपए लेने का प्रस्ताव किया गया था, को ग्राह्य कर लिया गया।
विधानसभा सत्र के समापन अवसर पर दिए गए अपने उद्बोधन में               विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह ने बताया कि इस सत्र में विनियोग विधेयक सहित सात विधेयकों की सूचना प्राप्त हुई और सभी विधेयक चर्चा के बाद पारित हो गए। सत्र के दौरान चार बैठकों में सदन में करीब इक्कीस घंटे चर्चा हुई। एक स्थगन प्रस्ताव की सूचना की ग्राह्यता पर भी चर्चा कराई गई। इसके अलावा अशासकीय संकल्पों की दो सूचनाओं पर भी सदन में चर्चा हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि विधानसभा का अगला सत्र बजट सत्र होगा, जो अगले वर्ष फरवरी महीने में संभावित है। इसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।