छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को लेकर पक्ष-विपक्ष दोनों अलर्ट मोड पर हैं। दोनों दलों के प्रमुख नेता चुनाव प्रचार में उतर चुके हैं। लेकिन राजनीतिक दलों का घोषणा-पत्र अभी तक जमीन पर नहीं उतर पाया है। यह अलग बात है कि घोषणाओं की झड़ी लगनी शुरू हो गई है। इस मामले में कांग्रेस, भाजपा से काफी आगे निकल चुकी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बार फिर मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है। उन्होंने कांग्रेस सरकार की वापसी होने पर एक बार फिर किसानों का कर्जा माफ करने की घोषणा कर दी है। उनकी इस घोषणा से भाजपा बैकफुट पर नजर आ रही है। वह न तो आलोचना कर पा रही है और न ही इस घोषणा को सही ठहरा पा रही है। यानी उसे न तो निगलते बन रहा है न उगलते। उपर से कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भानुप्रतापपुर की सभा में केजी से पीजी तक यानी सरकारी संस्थानों में मुफ्त शिक्षा का ऐलान कर तड़का लगा दिया है। साथ में तेंदूपत्ता पर आदिवासियों को हर साल 4 हजार रुपए बोनस देने और लघु वनोपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य से दस रुपए अतिरिक्त देने की घोषणा कर दी। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत गरीबों को 10 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देने और कृषि मजदूरों को 7 हजार के बजाए 10 हजार रुपए प्रति वर्ष दिए जाने का भी ऐलान किया है। यही नहीं, प्रियंका गांधी ने भी चुनावी घोषणाओं का पिटारा खोलते हुए 8 गारंटी दे डाली। उन्होंने कांग्रेस सरकार की वापसी पर गैस सिलेंडर में 5 सौ रुपए की सब्सिडी और 2 सौ यूनिट तक मुफ्त बिजली की घोषणा की। इन घोषणाओं ने भाजपा को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसा क्या करें कि वह कांग्रेस से आगे निकल आए। फिलहाल उसके पिटारे में क्या है? यह उसके घोषणा पत्र जारी होने के बाद ही पता चल सकेगा। हालांकि कहा जा रहा है कि कांग्रेस को मात देने के लिए भाजपा के पास भी ‘ब्रह्मास्त्र’ है और वह सही समय पर इसका इस्तेमाल करेगी। यहां तक बताना जरूरी है कि पिछले विधानसभा चुनाव में किसानों की कर्जमाफी और 2500 रु. प्रति क्विंटल के हिसाब से धान खरीदी राज्य में सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। कांग्रेस को इसका जबर्दस्त लाभ भी मिला और उसने एकतरफा जीत हासिल की थी। इस बार भी कांग्रेस ने खेती-किसानी को प्राथमिकताओं में शामिल किया है। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य को भी खूब तवज्जों दे रही है। वहीं, भाजपा अभी तक ऐसी कोई बड़ी घोषणाएं नहीं की है। अलबत्ता वह घोषणा-पत्र के जरिए अपनी प्राथमिकताओं को जनता के सामने रखेगी। वैसे आम जनता में यह चर्चा है कि भाजपा भी इस बार गांव-गरीब, किसान के साथ युवाओं पर केंद्रित घोषणा पत्र पेश करेगी। वह कांग्रेस की तरह किसानों की कर्जमाफी और धान की कीमत 3100 रु. प्रति क्विंटल करने की घोषणा कर सकती है। साथ ही कांग्रेस के 20 क्विंटल की जगह वह 22 क्विंटल धान खरीदी का वायदा कर सकती है। लेकिन उसके वायदे को राज्य के किसान स्वीकार करेंगे या नहीं, यह अलग बात है। पिछले 5 सालों में जिस तरह से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों के हितों को प्राथमिकता दी है और अपने वादों को पूरा किया है। इससे किसानों का भूपेश सरकार के प्रति विश्वास जगा है। यह अलग बात है कि भाजपा इससे इत्तेफाक नहीं रखती। उसका मानना है कि कांग्रेस ने किसानों के साथ छल किया है, लेकिन राज्य के किसानों के रूख से लगता है कि उनका विश्वास मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस पर बना हुआ है। कांग्रेस भी किसानों की हर समस्याओं को गंभीरता से लेती है और उसे सुलझाने का प्रयास करती है। साथ ही वह उनके साथ जुड़ने का कोई मौका भी छोडऩा नहीं चाहती। राहुल गांधी का किसानों के साथ धान कटाई का वीडियो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है। राहुल गांधी अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान खेतों में धान की कटाई कर रहे मजदूरों के बीच पहुंचे और उनके साथ धान की कटाई की। साथ ही उनकी समस्याओं को नजदीक से जाना-समझा। राहुल गांधी की यह छवि लोगों को खूब भा रही है। भारत जोड़ो आंदोलन के बाद राहुल गांधी की छवि जिस तरह से निखरकर सामने आई है, वह बेमिसाल है। बहरहाल, राज्य में चुनावी माहौल धीरे-धीरे गरमाने लगा है। दोनों प्रमुख दलों के नेता राज्य में लगातार चुनावी सभाएं ले रहे हैं। कांग्रेस से राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और खडग़े तो भाजपा की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह के अलावा कई केंद्रीय मंत्री सभाएं ले रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किनके वादों और बातों पर ऐतबार करेगी।
आपकी बात: आखिर जनता किसके वादों और बातों पर करे एतबार?
