0 संजीव वर्मा
छत्तीसगढ़ की धरा पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आए और भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई की गारंटी दे गए। उनकी गारंटी से प्रदेशवासी गदगद हैं। कह रहे हैं कि अब एक-एक कर भ्रष्टाचारी जेल की सलाखों के पीछे होंगे। हालांकि छत्तीसगढ़वासी भोपाल में दी गई उनकी गारंटी और उसके उलट महाराष्ट्र में भाजपा द्वारा उठाया गया राजनीतिक कदम देखकर यह तोल रहे हैं कि उनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है? लोगों के बीच चर्चा का विषय है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले महीने 27 जून को प्रधानमंत्री इसी तरह की गारंटी देकर गए थे और ठीक 5 दिन बाद सारे भ्रष्टाचारी पाक साफ निकलकर महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री और मंत्री बन गए। अब लोग कह रहे हैं कि अगली बारी किसकी है? क्या अब बिहार में ‘खेला’ होने वाला है। या फिर किसी अन्य राज्य में। छत्तीसगढ़ में तो मतदाताओं ने भाजपा की ऐसी हैसियत ही नहीं बनाई कि वह यहां पर कोई खेला कर सके। खैर! प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में भाजपा के चुनावी अभियान की शुरूआत की और कांग्रेस सरकार पर खूब बरसे। भ्रष्टाचार से लेकर वादा खिलाफी तक एक-एक कर कांग्रेस सरकार की बखिया उधेड़ी। भाजपाई भरी बरसात में रिमझिम-रिमझिम बारिश का मजा लेते हुए उनकी बातों को ध्यान से सुनते रहे और बीच-बीच में अपनी आदत के अनुसार मोदी-मोदी के नारे लगाते रहे। दरअसल मोदी ने जिस अंदाज में सभा को संबोधित किया उससे यह तय हो गया कि भाजपा के चुनावी मुद्दे क्या होंगे? उन्होंने लगभग 30 मिनट के अपने संबोधन में भ्रष्टाचार के अलावा केंद्रीय योजनाओं और शराब बंदी जैसे मुद्दों के जरिए महिलाओं, युवाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति सहित सभी वर्गों को साधने की कोशिश की। एक ओर उन्होंने शराबबंदी के जरिए महिलाओं को लक्ष्य बनाया और कहा कि गंगा जी की झूठी कसम खाने का पाप कांग्रेस ही कर सकती है। कांग्रेस ने शराबबंदी का वादा किया था, लेकिन इसको पूरा नहीं किया, तो दूसरी ओर धान खरीदी को लेकर भी किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। हालांकि मोदी के इन आरोपों का कांग्रेस ने भी जोरदार माकूल जवाब दिया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन पर ‘झूठ’ बोलने का आरोप लगाया। बघेल ने ट्वीट कर कहा कि ‘आप आए तो फिर झूठ की बयार बहने लगी मोदी जी।’ उन्होंने लिखा कि आपको छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं ने गलत जानकारी दी और आप भाषण पढ़कर चले गए। छत्तीसगढ़ का बच्चा-बच्चा जानता है कि हमने गंगाजल की कसम दस दिनों के भीतर किसानों की कर्जमाफी के लिए खाई थी और दो घंटों के भीतर कर्ज माफ हो गई। लेकिन भाजपा की सुई अटक गई है। बघेल ने कहा कि भाजपा का 2100 रुपए क्विंटल में धान की खरीदी और बोनस, का कभी पूरा न हुआ वादा किसानों को ठीक तरह से याद है। वो ये भी जानते हैं कि कांग्रेस की सरकार उनके लिए क्या कुछ कर रही है। अब छत्तीसगढ़ के किसानों को कोई गुमराह नहीं कर सकता। आप भी नहीं। भूपेश के इस ट्वीट के बाद प्रदेश की जनता सच और झूठ के इस दावे-प्रतिदावे पर क्या रूख अपनाएगी यह तो वक्त बताएगा। लेकिन यह सच है कि कांग्रेस ने गंगाजल की सौगंध किसानों की कर्जमाफी के लिए खाई थी, इसमें कोई संदेह नहीं है। यदि भाजपा को संदेह है तो वह अपनी ही पार्टी के नेता आर.पी.एन. सिंह से सच्चाई जान सकती है, क्योंकि गंगाजल की सौगंध खाने वालों में सिंह भी शामिल थे, तब वे कांग्रेस के बड़े नेता थे और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित थे। बहरहाल, मोदी की चुनावी आमसभा के बाद अब पूरा प्रदेश चुनावी मोड में आ चुका है। दोनों प्रमुख राजनैतिक पार्टियों के केंद्रीय नेताओं के एक दौर की रैलियां और सभाएं पूरी हो चुकी है। दूसरी जो बात उभरकर सामने आयी है, उससे तय हो गया है कि अब प्रदेश का चुनाव ‘मोदी बनाम बघेल’ होगा। भाजपा ‘मोदी है तो मुमकिन है’ और कांग्रेस ‘भूपेश है तो भरोसा है’ के नारों के साथ चुनावी मैदान में उतरने का मन बना चुकी है। हालांकि कांग्रेस आलाकमान सामूहिक नेतृत्व पर जोर दे रहा है। लेकिन भूपेश का चेहरा ही सामने होगा, क्योंकि राज्य में उनकी छवि, गांव-गरीब और किसान हितैषी की बन चुकी है, जो भाजपा नेताओं पर भारी है। जहां तक भाजपा का सवाल है तो उनका भरोसा केवल मोदी पर है और वह उन्हीं के सहारे चुनावी नैया पार लगाना चाहती है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर भाजपा के पास ऐसा कोई चेहरा नहीं है, जिस पर दांव लगाया जा सके। या फिर वह गुटबाजी के चलते कोई चेहरा सामने नहीं लाना चाहती। अभी हाल ही में भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मीडिया प्रभारी देवेन्द्र गुप्ता का अपने फेसबुक पेज पर लिखा पोस्ट ‘छत्तीसगढ़ भाजपा में हो क्या रहा है? न जनता समझ रही है न स्वयं उनका कार्यकर्ता समझ रहा है। कई नेता तो डिप्रेशन में है’ यह भाजपा के भीतरखाने का हाल बताने के लिए काफी है।