0 संजीव वर्मा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शराब घोटाले की गूंज अभी थमी भी नहीं है कि छत्तीसगढ़ में भी शराब घोटाले की धमक ने सबको चौंका दिया है। अब इसकी गूंज छत्तीसगढ़ में भी हो रही है।प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने दावा किया है कि शराब की अवैध बिक्री के जरिए दो हजार करोड़ रुपए का घोटाला किया गया है। ईडी ने कहा है कि इस पूरे रैकेट का मास्टर माइंड अनवर ढेबर था, जिसके नेतृत्व में एक संगठित अपराधिक सिंडिकेट राज्य में काम कर रहा था। वह शराब के जरिए अवैध वसूली कर एक फीसदी कमीशन अपने पास रखने के बाद बकाया राशि अपने आकाओं तक पहुंचाता था। ईडी की ओर से जारी बयान के अनुसार इस सिंडिकेट में शराब कारोबारी, राजनेता और उच्च प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। इसके जरिए प्रदेश में बिकने वाली शराब की हर बोतल से अवैध राशि वसूली जाती थी। अब इसमें कितनी सच्चाई है, यह तो विस्तृत जांच के बाद ही पता चलेगा। लेकिन इस पर राजनीति शुरु हो गई है। भाजपा ने ईडी की कार्रवाई के बाद राज्य सरकार को निशाने पर लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आरोप लगाया है कि इस घोटाले के सामने आने से कांग्रेस सरकार की सच्चाई सामने आ गई है। दो हजार करोड़ के भ्रष्टाचार ने दिल्ली के शराब मॉडल को भी पीछे छोड़ दिया है। वहीं, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ईडी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि आबकारी राजस्व में डेढ़ गुना बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसे में आबकारी राजस्व में कमी के आरोप पूरी तरह मिथ्या और मनगढ़ंत हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र की एजेंसियां भाजपा के एजेंट के रूप में काम कर रही है।ईडी के राजस्व कमी के आरोप पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा शासनकाल में वर्ष 2017 में आबकारी राजस्व करीब 4 हजार करोड़ मिला था। अब बढ़कर 6 हजार करोड़ हो गया है। ऐसे में आबकारी राजस्व में कमी का आरोप समझ से परे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि महालेखाकार ने भी जांच की थी और आबकारी विभाग को क्लीनचिट दी थी। उन्होंने साफ कहा कि ईडी सरकार को परेशान करने के लिए भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रही है। अभी तक जितनी भी छापेमारी की है। इसमें वह यह तक नहीं बता पायी है कि किसकी कितनी चल-अचल संपत्ति है। ऐसे में साफ है कि यह सब कार्रवाई सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक है, इसमें कोई तथ्य नहीं है। यहां यह बताना भी लाजिमी है कि छत्तीसगढ़ी की आबकारी नीति पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल से चली आ रही है। सरकार बदलने के बाद भी आबकारी नीति में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। प्लेसमेंट एजेंसियों और डिस्टलरी भी पहले से काम कर रहे हैं। कांग्रेस सरकार ने इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया है। शराब दुकानें आज भी सरकारी नियंत्रण में पूर्व की तरह चल रही है।
बहरहाल, ईडी के दावों के बाद जिस तरह से राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। उससे साफ हो गया है कि अब यह मामला दूर तक जाएगा। भाजपा ने इसे हाथों-हाथ लिया है। उसने पूरे प्रदेश में प्रदर्शन की तैयारी कर ली है। वह सरकार को शराब बंदी पर घेरने की बजाए अब घोटाले पर घेरने में जुट गई है। दरअसल राज्य में विधानसभा चुनाव को महज 5-6 महीने ही रह गए हैं। ऐसे में दोनों ही राजनीतिक पार्टियों ने अपनी चालें चलनी शुरू कर दी हैं । कांग्रेस सत्ता में है। वह भाजपा पर भारी दिख रही है। वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकुमार साय के कांग्रेस प्रवेश के बाद भाजपा बैकफुट पर है। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि साय कांग्रेस में जा सकते हैं। मुद्दों के अभाव में जूझ रही भाजपा के लिए यह घटना किसी सदमे से कम नहीं थी। ऐसे में उसे शराब घोटाले के रूप में एक नया मुद्दा मिल गया है। लेकिन जनता के सामने यह टिक पाएगा या नहीं यह देखना होगा, क्योंकि पूरे देश में ईडी की कार्रवाई को विपक्ष को डराने-धमकाने के रूप में ही देखा जाने लगा है। जनता भी अब समझदार हो चुकी है। वह सब देख -समझ रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता इसे किस रूप में लेगी?