0 संजीव वर्मा
राज्य की भूपेश बघेल सरकार के वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में चुनावी साल होने के बावजूद ‘रेवड़ी कल्चर’ से बचने के साथ ही वित्तीय अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने की कोशिश के साथ दृढ़ इच्छा शक्ति का परिचय बतौर वित्त मंत्री मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देने का हर संभव प्रयास किया है। मुख्यमंत्री बघेल ने पहली बार ई-बजट पेश किया। यह उनकी सरकार के अपने 5 साल के कार्यकाल का अंतिम बजट था। लिहाजा, लोगों को उम्मीद थी यह पूरी तरह चुनावी होगा, लेकिन बजट से ऐसा नहीं लगा। चुनावी लब्बोलुबाब और लीक से हटकर यह बजट सभी वर्गों के लिए है। जिसमें गांव-गरीब और किसान के साथ-साथ शहरों की भी सुध ली गई है। पिछले चार सालों में सरकार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना के अनुरूप काम करने के प्रयास के तहत नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी की चार चिन्हारी को आधार मानकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का प्रयास किया। इसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दी है। इसे राष्ट्रीय स्तर पर ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ के रूप में पहचान मिली है। गोबर को गोधन बनाने वाली गोधन न्याय योजना को केंद्र सरकार ने भी अपनाने की बात कही है। वैसे, 1 लाख 21हजार 500 करोड़ के इस बजट में मुख्यमंत्री ने सभी वर्गों को कुछ न कुछ देने का प्रयास किया है, ताकि हर वर्ग यह महसूस कर सके कि उसे कुछ ना कुछ बजट में मिला है। बजट में राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना को इस वर्ष ग्रामीण क्षेत्र के साथ-साथ नगर पंचायत क्षेत्र के लिए विस्तार किए जाने की घोषणा महत्वपूर्ण है। इससे शहरी क्षेत्र के भूमिहीन मजदूरों के साथ न्याय हो सकेगा। शिक्षित बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने के साथ ही निराश्रितों, बुजुर्गों, दिव्यांगों, विधवा एवं परित्यक्ता महिलाओं को दी जाने वाली मासिक पेंशन की राशि में बढ़ोत्तरी की गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि की घोषणा से पिछले एक महीने से आंदोलनरत कार्यकताओं को संतुष्टि मिली होगी। मितानिनों, कोटवारों तथा ग्राम पटेल के मानदेय में भी वृद्धि की गई है। साथ ही मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोइयों के मानदेय में वृद्धि के अलावा गोठानों की संचालन समिति के अध्यक्ष और सदस्यों को भी मानदेय दिए जाने का ऐलान किया गया है। पिछले कई सालों से आस लगाए बैठे होमगार्ड के जवानों को मानदेय में 6 हजार रु. से अधिक की वृद्धि की गई है। बजट में 101 नए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने, मनेन्द्रगढ़, गीदम, जांजगीर-चांपा और कबीरधाम जिले में नए चिकित्सा महाविद्यालय तथा कोरबा पश्चिम में नए ताप विद्युत गृह की स्थापना का भी बजट में घोषणा की गई है। इस साल बजट में नये कर का कोई प्रस्ताव भी नहीं है। जहां तक आर्थिक स्थिति का सवाल है तो चालू वित्त वर्ष के सकल घरेलू उत्पाद में 8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जो केंद्र सरकार के 7 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है। बजट में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए सर्वाधिक 19 हजार 489 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसी तरह पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा कृषि विकास एवं किसान कल्याण के लिए 10 हजार करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है, जो यह दर्शाता है कि सरकार के केन्द्र में गांव, गरीब, किसान के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य भी है। बहरहाल, यह अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ राजनीतिक हितों को साधने की कोशिश वाला बजट भी है। विपक्ष भले ही इसे भरोसा तोड़ने वाला बजट करार दे, लेकिन सही मायनों में इसे आम लोगों का भरोसा जीतने वाला बजट कहा जा सकता है, जिसमें आम से लेकर खास तक का ध्यान रखा गया है। इसी साल राज्य विधानसभा के चुनाव होने हैं, बावजूद ‘रेवड़ी कल्चर’ से बचा गया है। जिससे विपक्ष के हाथ से ‘रेवड़ी कल्चर’ के आरोप लगाने का मौका भी निकल गया। दरअसल, मुख्यमंत्री ने समावेशी विकास के अपने मंत्र को कायम रखते हुए बजट में प्रावधान किए हैं। उन्होंने जिस तरह से वित्तीय अनुशासन के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को निभाने की कोशिश की है, वह उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति को दर्शाती है।
