आपकी बात: नए साल में नए संकल्प के साथ आगे बढ़े

0 संजीव वर्मा
       वर्ष 2022 की विदाई के साथ ही नई उम्मीद, नई संभावनाओं और संकल्पों के साथ वर्ष 2023 में हम प्रवेश कर चुके हैं। वर्ष 2022 अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है। नया वर्ष जहाँ एक ओर उत्साह-उल्लास का मौका प्रदान करता है। वहीं एक सुनहरे सपने को साकार करने का संकल्प लेने का भी अवसर होता है। इसलिए नए साल में पुरानी विफलताओं को भूलकर नई सफलताओं के लिए गल्तियों से सबक लेकर आगे बढ़े। वैसे बीते साल हमने सामाजिक, आर्थिक और राजनीति सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलताएं अर्जित की हैं। सभी में कुछ न कुछ उपलब्धियों के क्षण रहे हैं। साथ ही उन घटनाओं की भी याद आती है, जहाँ अमानवीय हाथों ने मानवता को कलंकित किया। बीते साल भी कोरोना का साया रहा। रूस-यूक्रेन युद्ध तो बदनसीबियों में सबसे उपर रहा। उस देश के लोग अंतहीन पीड़ा झेल रहे हैं। कितने सैनिकों ने यूक्रेन में अपनी जान गंवाई है। कितनी माताओं की गोद सूनी हो गई है। कितनी महिलाओं का सुहाग छीन लिया गया। यह सब शासकों के अहम् का परिणाम है। जहाँ तक हमारे देश की बात है तो बीते साल हमने प्रकृति का प्रकोप भी देखा है। असम में बाढ़, उत्तराखंड में वनाग्नि और कई जगह भूकंप के झटके भी महसूस किए गए। वहीं, कुछ अच्छे निर्णय भी लिए गए। देश को पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति का अमूल्य तोहफा मिला है। कुछ राज्यों में विधानसभा के चुनाव हुए, जहाँ कुछ जगहों पर सत्तारूढ़ पार्टी को पुन: जीत मिली है तो कहीं जनता ने उसे नकार दिया। गुजरात में भाजपा पुन: सत्तारूढ़ हुई तो उसे हिमाचल में हार का सामना करना पड़ा। आम आदमी पार्टी ने पंजाब में सरकार बनाई तो हिमाचल का ताज कांग्रेस के सिर सजा। यहीं हमारे लोकतंत्र की ताकत भी है। जहाँ तक अर्थव्यवस्था का सवाल है तो बीते साल अर्थव्यवस्था डोलती रही। मंदी का साया लोगों को परेशान करता रहा। महंगाई चरम पर पहुंच गई। हालांकि सरकार आंकड़े पेश कर बीच -बीच में महंगाई के नियंत्रण में होने का दावा करती रही। लेकिन सच यही है कि पूरे साल महंगाई की मार से लोग दो-चार होते रहे। भारत के लिए यह बड़े सम्मान की बात है कि साल बीतते-बीतते भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-20 का अध्यक्ष बना। यह अध्यक्षता भारत को अपनी प्रतिष्ठा को और निखारने का मौका है। जहाँ तक छत्तीसगढ़ का सवाल है तो बीते साल इस राज्य ने भी कई उपलब्धियां हासिल की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश के प्रभावशील दिग्गजों की सूची में अपना स्थान बनाया, जो प्रदेश के लिए गौरव की बात है। भूपेश सरकार के छत्तीसगढ़ मॉडल की पूरे देश में चर्चा रही। नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी से लेकर छत्तीसगढ़ की संस्कृति और कला को विश्व पटल पर लाने में सरकार ने कोई कसर बाकी नहीं रखी। अंतरराष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसमें कई देशों के कलाकार शामिल हुए। जहाँ तक 2023 का सवाल है तो राज्य में अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा के चुनाव होंगे। सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण होगा। ऐसा माना जा रहा है कि इस चुनाव के नतीजे 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भी अहम होंगे। वहीं, नए साल में छत्तीसगढ़ में कई महत्वपूर्ण आयोजन होंगे। राज्य में पहली बार 21 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच का आयोजन होगा। इस दौरान न्यूजीलैंड और भारत की टीमें आमने-सामने होंगी। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण जी-20 की बैठक है। 22 और 23 सितंबर को राजधानी रायपुर में जी-20 देशों की चौथी स्थायी वित्त कार्य समूह की बैठक होगी। बहरहाल, आने वाला साल कैसा हो? यह सवाल लोगों के दिमाग में उमड़-घुमड़ रहा है। सभी चाहते है कि भय और भ्रष्टाचार मुक्त साल बीते। भारत के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि देश लोकतंत्र और पंथ निरपेक्षता के मूल्यों पर प्रतिबद्ध हो रहा है। परिवर्तन से भय नहीं है। अक्सर बदलाव-तरक्की को हवा देता है। हालांकि वर्ष 2023 में हम कुछ आशंकाएं लेकर प्रवेश कर रहे है। पूरी दुनिया में कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध का डर व्याप्त है, तो आर्थिक स्थिति डॉवाडोल है। यह सब देखने से लगता है कि कहीं हम अराजकता की ओर तो नहीं बढ़ रहे हैं। इसका मतलब साफ हैे कि बीता साल हमें कई चुनौतियां सौंपकर गया है और हमें इन सबसे जूझते हुए आगे बढ़ना होगा। समय का कालचक्र तो घूमता रहता है वह न कभी रूकता है और न थकता है। तो आइए! हम भी समय के साथ चले और नए साल में नए संकल्प के साथ आगे बढ़े।