आपकी बात: न्याय के नए प्रतिमान गढ़ते भूपेश 

O संजीव वर्मा
छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल के नेतृत्व में गठित कांग्रेस सरकार के सफलतम 4 साल पूरे हो गए। इन चार सालों में सरकार ने न्याय के जो नए प्रतिमान स्थापित किए हैं, वह राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। साथ ही उसमें पूरे देश के लिए एक संदेश भी छिपा है। बघेल सरकार के लिए न्याय का अर्थ गांव-गरीब-किसान को आर्थिक रूप से सशक्त और सबल बनाना  है। निश्चित रूप से इन चार सालों में सरकार की योजनाओं से गांव सशक्त हुए हैं, तो किसान मजबूत। गरीबों के लिए गोधन न्याय योजना तो वरदान साबित हुई है। साथ ही कर्मचारी-व्यापारी से लेकर सभी वर्ग के लोगों को कहीं न कहीं इन सालों में संतुष्टि मिली है। सरकारी कर्मचारियों के लिए तो पुरानी पेंशन योजना की बहाली ने उनके मन की सारी मुरादें पूरी कर दी है। वैसे, सरकार के इन 4 सालों में करीब दो साल तो कोरोना महामारी से जूझते हुए निकल गए। बावजूद उसकी उपलब्धि को किसी भी मामले में कमतर नहीं कहा जा सकता। भूपेश सरकार ने सत्ता संभालते ही सबसे पहले किसानों का कर्जा माफ किया। साथ ही उनकी उपज की भरपूर कीमत देने के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना लेकर आई। उसके जरिए उसने किसानों को इनपुट सब्सिडी देकर उनकी आर्थिक उन्नति के द्वार खोले दिए  वहीं, भूमिहीन किसानों के लिए राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना ने गरीबों के जीवन को आसान बनाया। इसी तरह गोधन न्याय योजना के तहत दो रुपए प्रति किलो की दर से गोबर खरीदी एक क्रांतिकारी योजना साबित हुई है। गांवों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। किसानों, मजदूरों, भूमिहीनों और महिलाओं को रोजगार मिला है। गौठानों में महिला स्व-सहायता समूह के जरिए महिलाएं और छत्तीसगढ़ ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत 2 लाख महिला स्व-सहायता समूह से 22 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने की ओर तेजी से अग्रसर हैं। युवाओं के लिए भी स्व-रोजगार के लिए प्रशिक्षित किए जाने का कार्यक्रम निरंतर जारी है। साथ ही ग्रामीण युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए 300 रूरल इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जा रहे हैं, जहां युवा अपने छोटे-छोटे उद्योग लगा सकते हैं। उन्हें बैंक से लोन दिलाने और रॉ-मटेरियल उपलब्ध कराने में भी राज्य सरकार सहयोग करेगी। शिक्षा के क्षेत्र में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल गरीब बच्चों के लिए सपने पूरा होने जैसा है। यह पूरे देश के लिए एक मिसाल है। वनवासी क्षेत्रों में रह रहे लोगों के जीवन में सरकार की नीतियों से बड़ा बदलाव आ रहा है। छत्तीसगढ़ वन संग्राहकों को सबसे ज्यादा पारिश्रमिक देने वाला राज्य है। लघु वनोपज प्रसंस्करण के लिए राज्य में 139 वन धन विकास केंद्रों की स्थापना की गई है। इन केंद्रों में वनांचल में रहने वाले लोगों को रोजगार मिला है। साथ ही वन अधिकार मान्यता से वनवासियों के जीवन में खुशहाली आई है। इन सबसे महत्वपूर्ण आदिवासी बहुल बस्तर क्षेत्र में शांति की आहट है, जो दशकों से नक्सलियों के आतंक से त्रस्त था। क्षेत्र में नक्सली घटनाएं नियंत्रित हुई है। साथ ही वहां को लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक होना भी सुकून देने वाला है। कुल मिलाकर राज्य सरकार अपने संकल्पों के अनुरूप राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के बताए रास्ते पर चलने की कोशिश कर रही है। इसमें वह कितनी सफल रही, वह तो आम जनता ही बताएगी। लेकिन हमारा मानना है कि भूपेश सरकार के केंद्र में आम आदमी का सशक्तिकरण ही है। छत्तीसगढ़ के लिए चिन्हारी-नरवा-गरवा, घुरवा-बाड़ी के नारे को साकार करने में जुटी सरकार के मुखिया भूपेश बघेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय देते हुए जिस तरह से सरकार की योजनाओं की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं वह काबिल-ए-तारीफ है। उनके भेंट-मुलाकात कार्यक्रम की सफलता इसकी बानगी  है।