
भाटापारा। झूलेलाल मंदिर चकरभाटा में चालीहा महोत्सव का आयोजन किया गया है, यह 40 दिनों तक चलेगा। देशभर में सिंधी समाज के 15 हजार घरों में घाघर स्थापित कर व्रत, पूजन झूलेलाल मंदिर में चल रहा 40 दिन किया जा रहा है। का धार्मिक अनुष्ठान महोत्सव के दौरान प्रतिदिन सत्संग, भजन के कार्यक्रम में देशभर से संतों व ख्यातिलब्ध भजन गायकों का आगमन हो रहा है।
पांच दशक से यहां प्रतिवर्ष चालीहा महोत्सव का आयोजन हो रहा है। सिंधी समाज में इस धार्मिक अनुष्ठान का विशेष महत्व है। यहां पूरे चालीस दिन प्रातः व संध्या पूजन के साथ ही सत्संग व भजन का क्रम चलेगा। इसको लेकर समाज में उत्साह देखा जा रहा है। पूज्य बिरादरी पंचायत के सचिव महेश चंदानी ने जानकारी देते हुए बताया कि *इसी कड़ी में भाटापारा में प्रति दिन सिंधी समाज के घरों और दरबारों में रात्रि 9.00 बजे आरती, भगवान झूलेलाल की अमर कथा, धुनी,आरती,भजन व पल्लव के बाद प्रसाद वितरण किया जाता है।
*घाघर पूजा का खास महत्व*
चालीहा महोत्सव के दौरान झूलेलाल मंदिर के साथ ही सिंधी समाज के घरों में पहले दिन से घाघर स्थापित कर व्रत, पूजन शुरू हो जाता है। मनोकामना पूर्ति के लिए लोग इस दौरान घरों में सिक्का रखकर घाघर की स्थापना करते हैं। वहीं पुत्र की कामना से 40 छुआरे एक डिब्बे में रखकर पूजा स्थल पर रखते हैं। अंतिम दिवस, सिक्का व छुआरा लेकर देशभर से लोग या उनके प्रतिनिधि यहां पहुंचते हैं। पूजा के बाद यह उन्हें वापस कर दिया जाता है।
*होगा इनका आगमन*
चालीहा में प्रतिदिन अनेक संतों का आगमन होता है। प्रमुख रूप से इस बार 3 दिसंबर को श्रीराम कथा वाचक चिन्मयानंद बापू. 28 दिसंबर को लखनऊ सेसंत साई हरीशलाल 30 दिसंबर को उल्हासनगर से संत साई कालीराम, 31 दिसंबर को अहमदाबाद के संत जगदीश वहीं भजन गायकों में सिंधी भगत की टोली, पुनीत खुराना दिल्ली, सौम्या पंजवानी, लता बख्तानी, तरुण सागर, सी. के. जावेद यहां पहुंचेंगे।
झूलेलाल मंदिर के प्रमुख संत लाल साई का चालीहा महोत्सव के पहले दिन से मौन व्रत चल रहा है। अंतिम दिन 3 जनवरी को बहराणा साहिब व अखंड ज्योत विसर्जन के साथ ही उनका व्रत का पारण होगा। बाबा गुरुमुख दास ने इसकी शुरुआत की थी। 1976 में मंदिर स्थापना के बाद से यहां प्रतिवर्ष पारंपरिक रूप से यह धार्मिक अनुष्ठान चल रहा है।
