युवा पीढ़ी में एप्स की डिमांड जिस प्रकार तेजी से बढ़ रही है इस फील्ड में करियर की संभावनाएं भी उसी रफ्तार से बढ़ती जा रही है। आज रेलवे टिकट बुक कराने से लेकर मूवी के टिकट तक के लिए युवा एप्स का इस्तेमाल करते हैं। चेन्नई, बेंग्लुरू, हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में इसका इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है। धीरे-धीरे इन एप्स का चलन देश के बाकी शहरों की ओर भी बढ़ रहा है।
एप्स की बढ़ती डिमांड को देखते हुए इसे पाठय़क्रम के रूप में भी शामिल किया जा रहा है। सर्च इंजन गूगल के अनुसार इस समय भारत में चार करोड़ भारतीय अपने मोबाइल फोन पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और एक सप्ताह में करीब तीन करोड़ एप्लीकेशंस डाउनलोड करते हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक एप्पल के एप्लीकेशन स्टोर से अब तक 40 बिलियन एप्स डाउनलोड किए जा चुके हैं जो पहले से काफी ज्यादा है। पिछले कुछ समय में तो एक नया रिकार्ड बना जब डाउनलोड का यह आंकड़ा 2 बिलियन को छू गया।
इस क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्येक भारतीय यूजर इन एप्लीकेशंस का इस्तेमाल करते हुए दिन में लगभग 52 मिनट खर्च करता है और यही कारण है कि एप्स की मांग बढऩे से कंपनियों की जमकर कमाई भी हो रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल भारतीय इंडस्ट्री में लगभग 2 लाख 50 हजार डेवलपर काम कर रहे हैं और बढ़ती डिमांड को देखते हुए अतिरिक्त डेवलपर्स की जरूरत होगी। ऐसे में एप्स में करियर, पैसा और प्रगति दोनों उपलब्ध कराएगा।
क्या है मोबाइल एप्लीकेशन
दरअसल एप्लीकेशन एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है जिसका उपयोग अलग-अलग रूप में मोबाइल डिवाइस, गूगल एंड्राइड, आइपैड और आईफोन के आपरेटिंग सिस्टम के लिए किया जाता है। वैसे आसान रूप में तो मोबाइल एप्लीकेशन दो तरह के होते हैं। नेटिव, एप्पल, आइओएस या गूगल एंड्राइड जैसे मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए तैयार किये जाने वाले एप्स पहले समूह में आते हैं और दूसरे वर्ग में मोबाइल वेब शामिल हैं जहां एचटीएमएल जैसी लैंग्वेज का उपयोग किया जाता है और चलाने के लिए ब्राउजर की जरूरत होती है।
मोबाइल डेवलपर का कार्य
मोबाइल डेवलपर सॉफ्टवेयर इंजीनियर या सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर होते हैं जो मोबाइल एप्लीकेशन की डिजाइन विकसित करने के साथ-साथ एक या एक से अधिक मोबाइल ऑप्रेटिंग सिस्टम और डिजाइंस जैसे एप्पल, आईओएस या गूगल एंड्राइड पर इनकी जांच करते हैं। बाजार में लांच होने के बाद एप्स यूजर्स से प्राप्त प्रतिक्रियाओं को समझते हैं। यूजर्स की जरूरतों के अनुसार उनमें परिवर्तन करते हैं। इसके अलावा नए संस्करण भी तैयार करते हैं।
अवसर
इस सेक्टर में काम करने के केंद्र मुख्य रूप से एम-वैस (मोबाइल वैल्यू ऐडेड सर्विसेज) इंडस्ट्री और आईटी कंपनियां हैं। आप अपने काम की तलाश मोबाइल ऑपरेटर, मोबाइल डेवलपमेंट एप्लीकेशन कंपनियों और वैल्यू एडेड सर्विसेज प्रदाता कंपनियों में कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में जिस तेजी से मांग बढ़ रही है उसकी तुलना में पर्याप्त आपूर्ति बहुत कम है। यहां आप मोबाइल यूआई डिजाइनर और यूजर एक्सपीरियंस एंड यूजेबिलिटी विशेषज्ञ के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा इस क्षेत्र में इंजीनियर और मोबाइल आर्किटेक्ट के रूप में भी अपने करियर को एक बेहतर मुकाम तक ले जा सकते हैं।
योग्यता
आईओएस (आईपैड, आईफोन) या जावा (एंड्राइड, ब्लैकबेरी ओएस) पर एप्लीकेशंस लिखने के लिए सी, सी प्लस, आब्जेक्टिव सी जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में कमांड होना बहुत जरूरी है। आपकी यूआई डिजाइन के बेसिक्स और एप्लीकेशन डिजाइन के बेसिक्स पर भी अच्छी कमांड होनी चाहिए।
एक बार आप बेसिक को समझ लेते हैं, तो उसके बाद आपको प्लेटफार्म और मोबाइल सिस्टम चुनना होगा। यदि आप आईफोन और आईपैड डेवलपर बनना चाहते हैं, तो आपको ऑब्जेक्टिव-सी एक्सकोड और मैक ओएस एक्स प्लेटफार्म पर इंटरफेस के निर्माण का हुनर सीखना होगा। यदि आप गूगल एंड्राइड डेवलपर बनना चाहते हैं तो आपको जावा में प्रवीण और एंड्राइड डेवलपमेंट में दक्ष होना होगा।
इसके अलावा एक अच्छा डिजाइनर बनने के लिए आपके पास कलात्मक और रचनात्मक हुनर होना चाहिए। कंप्यूटर साइंस में बीई, बी.टेक, एम.टेक, एमसीए या आइटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, इंस्ट्रूमेंटेशन और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन कर इस फील्ड में करियर बना सकते हैं।
सैलेरी
इस क्षेत्र में प्रोफेशनल डेवलपर के तौर पर शुरुआत में 3 से 5 लाख रुपये सालाना की कमाई कर सकते हैं। जिन डेवलपर्स को दो से तीन साल का एक्सपीरियंस होता है वे आसानी से 4-7 लाख रुपये सालाना तक कमा लेते हैं। आपकी सैलेरी पूरी तरह आपके टेक्निकल नॉलेज पर निर्भर करती है। जैसे-जैसे आपके अनुभव व योग्यता में बढ़ोतरी होती है, आपकी कमाई में भी इजाफा होता है।
संस्थान
एनआईआईटी, गुडग़ांव
कोडफक्स, बेंग्लुरू
जीनियस पोर्ट, पुणो व बेंग्लुरू
भारती विद्यापीठ डीम्ड यूनिवर्सिटी, पुणे