कोरबा। छत्तीसगढ़ प्रदेश में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार लगातार मजबूत हो रही है। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस संगठन में भूपेश का कद लगातार बड़ा हो रहा है। जाहिर है उनकी इच्छा के बिना प्रदेश में एक पत्ता भी नहीं खड़क सकता। हालांकि प्रदेश की कई घटनाएं ऐसी भी हैं जिनको देखकर एकबारगी लगता है कि नौकरशाहों ने अपने फायदे-नुकसान को देखते हुए भूपेश सरकार और उनके मंत्रियों की मरजी को भी ताक पर रख दिया है। प्रदेश की ऊर्जा नगरी कोरबा में तो कम से कम ऐसा ही दिखता है।
कोरबा में आलम यह है कि भूपेश के कद्दावर मंत्री ने अपने बयान में जिला कलेक्टर को भ्रष्टाचार में लिप्त घोषित कर दिया। मंत्री और कलेक्टर के बीच तल्खी के बाद भी कलेक्टर जमी हुई हैं।
प्रश्न तो तब उठता है जब मुख्यमंत्री कार्यालय के दखल के बीच किसी दूसरी विचारधारा की पार्टी किसी उद्योग के खिलाफ बड़ा अभियान चलाने में सफल हो जाती है। हाल-फिलहाल कोरबा की एक घटना है जहां प्रदेश के एकमात्र एल्यूमिनियम प्लांट के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के समर्थन वाली मजदूर इकाई भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की आड़ में एल्यूमिनियम प्लांट के कामगारों को लामबंद किया गया। भाजपा के समर्थन में इतना बड़ा आंदोलन सरकार के एक मंत्री के गृह जिले में हो गया और शासन-प्रशासन मूक बनकर देखता रहा गया। एल्यूमिनियम संयंत्र के खिलाफ बीएमएस के एक हफ्ते के आंदोलन में एक बार भी यह नहीं दिखा कि प्रशासन की तनिक भी मंशा आंदोलन को खत्म करने की है। पुलिस के सामने ही प्लांट में काम के लिए जाने वाले मजदूरों, कर्मचारियों और महिलाओं को हड़ताली कर्मचारी गरियाते रहे, उनके साथ धक्का-मुक्की करते रहे लेकिन प्रशासन से यह तक न हुआ कि वह आंदोलन करने वालों को रोक ले। उल्टे जब मामला बड़ा हो गया तो गर्म तवे पर फायदे की रोटी सेंकने प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री आंदोलनकारियों के समर्थन में कूद पड़े।
एक बड़े उद्योग के खिलाफ भाजपा के समर्थन में हुए आंदोलन को कांग्रेस के वाक-ओव्हर से यह संकेत तो मिलता है कि फिलहाल वह भी शांति बनाए रखकर अदालती प्रक्रिया और उसके फैसले का इंतजार करने के मूड में है।बीएमएस के मजदूरों की मांगों पर लेबर कोर्ट में सुनवाई होगी तब तक औद्योगिक शांति तो होगी पर भाजपा के समर्थन से एक नए आंदोलन की तैयारी से इनकार नहीं किया जा सकता।
