
मनेंद्रगढ़, ( मृत्युंजय चतुर्वेदी)। गणाचार्य विराग सागर महाराज जी के परम शिष्य मुनि द्वय विशुद्ध सागर एवं मुनि आनंग सागर का संघ मनेंद्रगढ़ में प्रवास हुआ हैं। मुनि संघ के सानिध्य में प्रतिदिन प्रवचन एवं स्वाध्याय के माध्यम से धर्म का प्रचार-प्रसार किया रहा है। जिससे जैन समाज में उत्साह एवं उमंग का वातावरण निर्मित हुआ है। परिणाम स्वरूप समाज में धर्म के प्रति अनुराग एवं ज्ञानार्जन हो रहा है।
अहिंसा भवन में आयोजित धर्मसभा में मुनि श्री विशुद्ध सागर जी ने प्रवचन करते हुए बहुत ही तार्किक आधार पर जैन धर्म की व्याख्या की और प्राचीन समय में किस प्रकार उत्तर भारत में अकाल की स्थिति में जैन मुनि एवं जैन धर्म की स्थिति का वर्णन किया। इन ऐतिहासिक जानकारियों से समाज के सदस्यों का ज्ञानार्जन हुआ जैन धर्म के अतिरिक्त अन्य धर्म के अनुयाई भी प्रवचन का लाभ उठा रहे हैं।
इस वनांचल/कोयलांचल में कभी-कभी लंबे अंतराल के पश्चात इस प्रकार के मुनि महाराजओं का आगमन होता है और जब इन का आगमन होता है तो समाज का दिशा दर्शन स्वाभाविक रूप से हो जाता है। समाज के सदस्य महिलाओं सहित उत्साह के साथ आनंद पूर्वक धर्म लाभ ले रहे हैं।
