भाटापारा। प्रदेश राइस मिल एसोसिएशन के आह्वान पर जिला राइस मिल एसोसिएशन बलौदा बाजार भाटापारा ने जिला कलेक्टर के नाम जिला खाद्य अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर आगामी वर्ष की कस्टम मिलिंग कार्य करने में अपनी असमर्थता व्यक्त की है और कहा है कि यदि हमारी मांग पूरी नहीं की जाती है तो 1 दिसंबर से अपने राइस मिल संस्थान का विद्युत कनेक्शन कटवा कर काम बंद कर दिया जाएगा। राइस मिल एसोसिएशन ने कस्टम मिलिंग के विभिन्न मदों की बकाया राशि के भुगतान की मांग शासन से की है। इस संदर्भ में जिला राइस मिल एसोसिएशन के संरक्षक नरेंद्र भूषणीया ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत 2 वर्षों से हम राइस मिलर्स शासन को लगातार सहयोग करते आ रहे हैं एवं अमानक खराब हो चुके धान की मिलिंग स्वयं का नुकसान उठाकर भी करते रहे हैं किंतु हमें वर्ष 2019-20 एवं 2020-21 के कस्टम मिलिंग के अनेक मदो अभी तक भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है भुगतान हेतु मार्कफेड के बिलिंग माड्यूल में भारी विशेषताएं हैं जिसे दूर किए जाने की सख्त जरूरत है इसके साथ ही हम राइस मिलर ऊपर अन्याय पूर्ण रूप से भारी पेनाल्टी भी प्रस्तावित की जा रही है जो कि किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। इन सब वजह के कारण ही राइस मिलर्स मानसिक प्रताड़ना के लगातार शिकार हो रहे हैं इस संदर्भ में एक ज्ञापन कलेक्टर के नाम जिला खाद्य अधिकारी को सौंपा गया है ज्ञापन में यह स्पष्ट उल्लेख है कि विगत 2 वर्षों से भुगतान के अभाव में राइस मिलों के पास आगामी वर्ष की कस्टम मिलिंग कार्य हेतु पूंजी की बहुत ज्यादा कमी है पूंजी के अभाव में कस्टम मिलिंग का कार्य कर पाना असंभव है । ज्ञापन में यह स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 25 नवंबर तक कस्टम मिलिंग कार्य के सभी मद का पूर्ण भुगतान सरकार के द्वारा नहीं किया जाता है तो हम आगामी वर्ष के कस्टम मिलिंग हेतु पंजीयन और अनुबंध नहीं कराएंगे। इसके अतिरिक्त यदि 25 नवंबर तक राइस मिलरो की मांग नहीं मानी जाती है तो समस्त राइस मिल वाले 1 दिसंबर से अपने राइस मिल संस्थान का विद्युत कनेक्शन कटवाने हेतु विद्युत विभाग को अपना आवेदन सौंप देंगे।
इस मामले में राइस मिल एसोसिएशन के संरक्षक नरेंद्र भूषणीया ने आगे बताया कि मिलरो के द्वारा बलौदाबाजार- भाटापारा जिला के मिलर द्वारा समर्थन मूल्य में उपार्जित धान खरीद वर्ष 2020 -21 के साथ ही खरीफ वर्ष 19,,20 के शेष बचत धान की कस्टम मिलिंग शासन के निर्देशानुसार की गई है। मिलर द्वारा कस्टम मिलिंग कार्य करने में समस्त प्रकार के खर्चों को अपने पास से वाहन किया गया है। जिसमें धान का परिवहन, चावल परिवहन, हमाली, लोडिंग, अनलोडिंग, बारदाना जमा जैसे कार्य शामिल हैं। वर्ष 2020- 21 के बिल मॉड्यूल में बारदाना जमा में मिलर को मिलने वाला यूजर चार्ज परिवहन की वास्तविक राशि, हमाली राशि, बारदाना राशि, जैसे कई मदों में मिलों को मिलने वाले भुगतान बिल माड्यूल में नहीं जोड़ा गया है। जिससे मिलरों को भारी नुकसान हुआ है। मिलर द्वारा समितियों एवं संग्रहण केंद्रों में बारदाना की आपूर्ति की गई है। जिसमें मिलर को उपयोगिता शुल्क 7.32 रुपए पिछले वर्षों से प्राप्त होता रहा है।किंतु वर्ष 2021 में उपयोगिता शुल्क बिल में यह राशि नहीं जोड़ी गई है। समितियों से धान उठाव में मिलर द्वारा की गई लोडिंग और हमाली नहीं दी गई। जिससे मिलर को लोडिंग और अनलोडिंग की हमाली का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी तरह चावल प्रदाय में प्राप्त होने वाली हमाली भी नहीं दी गई। धान एवं चावल प्रदाय में परिवहन राशि बहुत कम दर्शाई गई है। जिसे मिलर ने पूर्णतः अनुचित बताया है। प्लास्टिक बारदाना मिलर द्वारा समिति में जमा किया गया है उसे बिल मॉडल में शामिल नहीं किया गया है। संग्रहण केंद्र से धान उठाव में कई बार बेमौसम वर्षा, गाड़ियों का ना लगना, हमालों की कमी, बारदाना की कमी, अधिक गाड़ियों का लगना जैसे कारणों के चलते धान उठव में विलंब हुआ है। जिसके कारण धान उठाव के पेनाल्टी को बिल माड्यूल में जोड़ दिया गया है, जो कि अनुचित है। शासन द्वारा नान/ एफसीआई के चावल प्रदाय की तिथि में वृद्धि की गई है। इसी नियम के तहत कस्टम मिलिंग अनुबंधों में भी समय वृद्धि की जानी चाहिए, एवं पेनाल्टी बिल को हटाना चाहिए। किंतु ना तो अनुबंध की समय वृद्धि की गई ना ही पेनाल्टी राशि को बिल से हटाया गया है। खरीफ वर्ष 2019-20 के बचत धान की मिलिंग इस वर्ष मिलों द्वारा की गई है। जिसका बिल माड्यूल मिलरों के खाते में प्रदर्शित नहीं किया गया है। जिसके कारण मिलरों को घाटा हुआ है। महंगाई को ध्यान में रखकर कस्टम मिलिंग की दर में कम से कम 8 गुना वृद्धि की मांग मिलरो द्वारा की गई है। वर्तमान में महंगाई को देखते हुए शासन द्वारा जो मिलिंग की राशि दी जा रही है उसके चलते मिलर को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी प्रकार मिलरों की सबसे बड़ी समस्या पतला धान खरीदी करने में है। पतला धान खरीदी करने के पश्चात चावल बनाकर शासन को देने में एलजी के कारण पास नहीं होता है। और समितियों की खरीदी के समय इसका कोई मापदंड नहीं होता। जिसके कारण मिलरो को कठिनाई और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। पतला धान को भी सरना धान की श्रेणी में रखकर खरीदी करने की मांग की गई है। प्रदेश में अरवा चावल क्वालिटी का धान 40- 50% ही होता है। बाकी मोटा धान उसना क्वालिटी का होता है। अरवा धान मिलिंग करने वाले मिलर को सरना धान की मिलिंग करने हेतु धान प्रदाय किया जाना चाहिए। एवं मोटा धान के लिए शासन और केंद्र सरकार से उसना चावल लेने की योजना बनानी चाहिए मिलरों ने मांग की है कि यदि टेंडर द्वारा धान विक्रय की योजना शासन बनाता है तो उसमें मोटा धान का ही विक्रय किया जाना चाहिए।
राइस मिल एसोसिएशन बलौदा बाजार -भाटापारा ने मांगें पूरी नहीं होने पर 1 दिसम्बर से काम बंद करने की दी चेतावनी
