कवर्धा व पत्थलगांव घटना की न्यायिक जांच हो: शिवरतन

भाटापारा। स्वर्गीय गोविन्द सारंग स्मृति परिसर,भारतीय जनता पार्टी कार्यालय भाटापारा में उपाध्यक्ष भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने प्रेसवार्ता ली,जिसमे उन्होंने प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में 15 दिनों के अंदर प्रदेश के बहुसंख्यक वर्ग की भावनाओं को आहत करने वाली दो घटनाये घटित हुई है। विजया दशमी के पावन पर्व के दिन माता दुर्गा के मूर्ति विसर्जन जुलूस को कुचलते हुए एक गाड़ी वहाँ से भागी जिसमे एक श्रद्धालु की मृत्यु हुई तथा 16 लोगो विभिन्न चिकित्सालय में भर्ती है। (घायल सभी आदिवासी वर्ग के है)।
विधायक शर्मा ने आगे कहा कि उसी तरह 03 अक्टूबर को कवर्धा में भगवा ध्वज को अपमानित करने की घटना घटित हुई। एक वर्ग विशेष ने उक्त घटना की विरोध करने पर थानेदार व तहसीलदार की उपस्थिति में लोगो से मार पीट की। हिन्दू समाज जब थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने गया तो उन्ही लोगो ने रिपोर्ट लिखवाने गए लोगो को नंगी तलवार लेकर दौड़ाया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री को लखीमपुर (उत्तरप्रदेश) जाने की फुर्सत है, किंतु कवर्धा और पत्थलगांव जाने कि उन्हें फुर्सत नहीं है। शर्मा ने आगे कहा कि मुझे स्वयं और कुरूद के विधायक अजय चंद्राकर को कवर्धा के शहर में प्रवेश नहीं करने दिया गया जो कि लोकतंत्र के खिलाफ है।
नेता प्रतिपक्ष धरम लाल कौशिक तथा बृजमोहन अग्रवाल जैसे वरिष्ठ भाजपा नेता कवर्धा जाकर पीड़ित परिवार व घायलों से पुलिस के बंदिश के चलते मुलाकात नही कर सके। तो क्या छत्तीसगढ़ में लोकतंत्र है..? मुख्यमंत्री का यह कथन की पत्थलगांव में जो गाड़ी से दुर्घटना हुई वो गाड़ी मध्यप्रदेश की थी,पकड़े गये लोग मध्यप्रदेश के है भाजपाइयों को घेरना है तो शिवराज सिंह को घेरे, हम मुख्यमंत्री से पूछना चाहते है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में चारो तरफ़ बेरीयर लगे है तो गाड़ी उडीसा से छत्तीसगढ़ में प्रवेश कैसे कर गई। बेरीयर (जांच चौकी) में आपके अधिकारी कर्मचारी क्या कर रहे थे.? वास्तव में पूरे प्रदेश में नशे का व्यापार सरकार के संरक्षण में संचालित हो रहा है और फल फूल रहा है तथा समय समय पर कांग्रेस के प्रमुख पदाधिकारीयो की संलिप्तता इस व्यापार में पाई गई है।
शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में बार्डर में पिछले कई महीने से बेरीयर लगे है किंतु आज तक एक भी नशे के पदार्थ में लिप्त वाहनों को नही पकड़ा गया है। मुख्यमंत्री को अपने आकाओं के साथ लखीमपुर(उत्तरप्रदेश) जाकर राजनीति करने का समय है, किंतु खुद के प्रदेश में घटित घटनाओं के पीड़ितो से मिलने का समय नही है। वहा वो 50-50 लाख रुपये मृतको के परिवार को दे सकते है किंतु पत्थलगांव की घटना पर गृहमंत्री का बयान की मृतक परिवार को एक करोड़ रूपये मध्यप्रदेश सरकार दे, ये सरकार की ओछी मानसिकता को प्रदर्शित करता है। हम प्रदेश सरकार से मांग करते है कि मृतक परिवार को सहायता राशि के रूप में 01 करोड़ रुपये एवं घायलों को 50-50 लाख रुपये छत्तीसगढ़ सरकार प्रदान करे। दोनो घटनाओं (कवर्धा/पत्थलगांव) की न्यायिक जांच एवं शांति का टापू छत्तीसगढ़ जो अपराध का गढ़ बन चुका है वहा कानून राज को स्थापित करे।

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