0 अतिथियों ने कहा- स्व. वोरा की पत्रकारिता, शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्रों में भूमिका अविस्मरणीय

रायपुर। प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद् एवं प्रगति कॉलेज के संस्थापक अध्यक्ष गोविन्दलाल वोरा की मूर्ति का कॉलेज परिसर में शुक्रवार को अनावरण किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.केशरीलाल वर्मा थे। मूर्ति अनावरण के पश्चात् अतिथियों ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरूआत की।
इस मौके पर मुख्य अतिथि पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.केशरीलाल वर्मा ने शिक्षा के क्षेत्र में स्वर्गीय वोरा के योगदान को याद करते हुए कहा कि रायपुर में पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग शुरू करने में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई थी। विशेष अतिथि कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बलदेव भाई शर्मा ने गोविंदलाल वोरा के साथ बिताए पल को साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। शंकराचार्य व्यावसायिक विश्वविद्यालय भिलाई के कुलपति प्रोफेसर एल.एस.निगम ने कहा कि वोराजी की पत्रकारिता, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों में भूमिका अविस्मरणीय है।
वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर ने वोराजी को भारतीय राजनीति का कर्णधार एवं सामाजिक चेतना का पुरोधा बताया जबकि वोराजी के साथी वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक जयशंकर नीरव ने कहा कि उन्होंने पत्रकारों के हितों से जुड़ी कई संस्थाओं और संगठनों में अद्वितीय कार्य किया। वहीं वरिष्ठ पत्रकार एवं विख्यात लेखक गिरीश पंकज ने उनकी उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में उनके सक्रिय योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पत्रकारिता के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिए हैं। छ.ग. शासन के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव बी.के.एस.रे ने वोरा जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने वाल स्ट्रीट जनरल एवं न्यूयार्क टाइम्स जैसे अंतर्राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों में अपने लेखों के रूप में एक अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा स्थापित की। इससे पहले स्वागत भाषण में प्रगति कॉलेज के अध्यक्ष गिरीश वोरा ने मंच पर अतिथियों का स्वागत करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रगति कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सौम्या नैयर ने वोरा जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे अनुभवी पत्रकार थे, शैक्षणिक एवं परोपकारी संस्थानों के सलाहकार के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषक भी थे। कॉलेज की सलाहकार डॉ.श्रुति झा ने कहा कि वे प्रबंधन और रणनीतिक कार्यान्वयन से अधिक जिन मूल्यों के लिए खड़े थे उसकी नींव को उस मुकाम तक पहुंचाने में मदद की, जहॉ वे पहुंचे थे।
