किसानों का भारत बंद: भाटापारा में भी दिखा बंद का असर

भाटापारा। कृषि कानून के खिलाफ किसानों का भारत बंद काे लेकर छत्तीसगढ़िया किसान, मजदूर संघ ने भाटापारा बंद का आव्हान किया था। सुबह मुख्य बाजार, कृषि उपज मंडी और हॉटल बंद रहे। सड़क किनारे ठेले-खोमचे लगाने वाले कुछ व्यवसायियों ने दुकानें खोली थीं, लेकिन बाद में दुकानें बंद कर दीं। सड़क पर किसान नेता निकले और लोगों से दुकानें बंद करने और किसानों के पक्ष में इस बंद को समर्थन देने की अपील की। कांग्रेस ने भी बंद को अपना पूरा समर्थन दिया। बंद आंशिक सफल रहा। सुबह 11,12 बजे के बाद से दुकानें खुलने प्रारंभ हो गई थी।

कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन में भारत बंद को व्यापारियों का पूर्ण समर्थन मिला है। शहरों में सभी छोटी-बड़ी दुकानें व्यापारियों ने स्वयं ही बंद रखीं। बंद का आयोजन छत्तीसगढ़िया किसान, मजदूर संघ के संयोजक कुबेर यदु, प्रभारी नरेन्द्र वर्मा, नीलकंठ ध्रुव, आर पी वर्मा, रंजित वर्मा, सुंदरलाल साहू, एम आर ध्रुव, चंद्रकांत साहू, बीरेन्द्र साहू, रामचरण साहू, उदय साहू आदि शामिल रहें।

कांग्रेस ने किया भारत बंद का समर्थन
सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा और किसान संगठन के भारत बंद का कांग्रेस ने समर्थन किया है. कांग्रेसी नेता रमेश यदु, सतीश अग्रवाल ,रामबिलास साहू, सुशील शर्मा, मनहरण वर्मा, अमर मंडावी, गिरीश परप्यानी, शेख गुलाम, प्रेम वर्मा, डॉ बसंत भृगु, सुरेन्द्र यदु, शैलेंद्र अहिरवार, मेवलाल बघेल, मनीष पंजवानी, महेन्द्र साहू, संतोष सोनी, गिरीश चावड़ा संजय बघेल, लोकेश शर्मा आदि समर्थन देने पहुचे। नेताओं ने एवं किसानों ने जय स्तंभ चौक पर प्रदर्शन किया और लोगों को तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ संबोधित किया। इस दौरान किसानों और नेताओं ने केंद्र की सरकार को अंधी बहरी गूंगी सरकार बताया और कहा कि इतने लंबे समय से देश के अन्नदाता आंदोलन कर रहे हैं पर उनकी बातों को सरकार सुन नहीं रही है केंद्र की मोदी सरकार किसान विरोधी सरकार है।

पिछले दस महीनों से जारी है किसान आंदोलन
तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली मे विभिन्न बॉर्डर्स पर पिछले दस महीनों से किसानों का आंदोलन जारी है. पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा आदि के किसान सरकार से कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर कानून बनाने की मांग कर रहे हैं.

Leave a Reply