मनुष्य से अगर इच्छाएं निकल जाए तो वह ईश्वर बन सकता है: सुमन लता मोदी


भाटापारा। श्री 1008 भगवान आदिनाथ नवग्रह पंच बाल्याती दिगंबर जैन मंदिर में आज दस लक्षण पर्व का सातवां दिन उत्तम तप धूमधाम से मनाया जा रहा है ।
आज सुगंध दशमी का भी शुभ पर्व है।
प्रातः 7:30 मंगलाष्टक प्रारंभ किया गया, श्री 1008 भगवान नेमिनाथ की प्रतिमा मस्तक पर विराजमान कर श्री नितिन कुमार गदिया एवं श्री अभिनव मोदी ने पांडुक शिला पर विराजमान किया। सभी भक्तों ने ढोल बाजे रे नगाड़ा बाजे ना, प्रभु के मंदिर में सबसे भक्तगण मिलकर नाचे ना की धुन पर भक्ति की। भगवान का अष्ट मंगल कलश से मंगल अभिषेक किया गया एवं शांति धारा संपन्न की गई आज की शांति धारा का सौभाग्य नितिन कुमार गदिया एवं अभिनव मोदी को प्राप्त हुआ ।शांति धारा के पश्चात, नव देवता पूजन, सुगंध दशमी पूजन, सोलहकारण पूजन, दसलक्षण महापर्व पूजन, आचार्य विद्यासागर जी, राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 चिन्मय सागर जी महाराज जंगल वाले बाबा की पूजन, संगीत के साथ संपन्न हुई। आज सुगंध दशमी का पावन दिवस है जैन धर्म में सुगंध दशमी पावन दिवस का बहुत महत्व रहता है इसकी कथा पढ़कर के सभी लोग धूप खेते हैं । समाज के सभी लोगों ने सुगंध दशमी की कथा का वाचन अभिषेक मोदी द्वारा किया गया । मंदिर में ही धूप खेने की प्रक्रिया सम्पन्न हुई। आज के दिन सभी लोग विशेषकर महिलाएं व्रत इत्यादि रखकर, श्री जी का पूजन भजन करती हैं । दोपहर के 4:30 बजे समाज के सभी सद्स्य भाटापारा में स्थित मंदिरों के दर्शन कर धूप खेने का कार्य किया।
आज के अपने शास्त्र वाचन में श्रीमती सुमन लता जी मोदी ने कहा कि- धर्म का सातवा लक्षण है उत्तम तप। जिसके द्वारा किसी व्यक्ति को तपाकर शुद्ध किया जाता है उसे तप कहते हैं
आचार्य विद्यासागर जी कहते हैं कि जब कोई परम योगी जीव रूपी लौह तत्व को सम्यक दर्शन, सम्यकज्ञान और सम्यक्चारित्र रूपी रत्नत्रय की औषधि लगाकर, तप रूपी धौकनी में धौक कर तपाते हैं, तब वह जीव रूपी लौह तत्व, स्वर्ण अर्थात् परमात्मा बन जाते हैं।
अभिषेक जी ने बताया गृहस्थ में रहकर इच्छाएं ना हो, यह नहीं हो सकता। इच्छाएं तो होगी पर दो काम किए जा सकते हैं
1) मैं आत्मा, इच्छा रहित हूं, ज्ञान आभास के द्वारा यह पाया जा सकता है ।
2) यदि मेरे इच्छा अनुसार कार्य नहीं हो रहा है, तो मैं नष्ट नहीं हो जाऊंगा, मैं तो वही सत का सत हूं। जब इच्छाएं खत्म हो जाती है ,तब बंधन भी खत्म हो जाता है । हम यह सोचते हैं कि बस मेरी एक यह इच्छा पूरी हो जाए तो मुझे शांति मिलेगी, लेकिन इच्छाएं कभी शांत नहीं होती।
यमराज भी हमें पत्र भेजते हैं कि अब तो सुधर जाओ
पहला, बालों का सफेद होना,
दूसरा, दांत गिरना
तीसरा, आंखें कान कमजोर होना चौथा, गंभीर बीमार होना ।
फिर भी हम समझ नहीं पाते। भोगों को भोगने में लगे रहते हैं और फिर जब यमराज लेने आ जाता है तो पछताते हैं गिड़गिड़ाते हैं लेकिन अब क्या हो सकता है “अब पछताए क्या होत जब चिड़िया चुग गई खेत”।
अपनी इच्छाओं को तप के माध्यम से ही समाप्त किया जा सकता है । तप भी दो प्रकार का होता है- अंतरंग और बहिरंग ।तप जैसे उपवास, भूख से कम खाना इत्यादि , जिससे मन भोगों से हट जाता है, भटकता नहीं है ।यदि आराम से तप किया जाता है तो विपरीत परिस्थिति में मन का भटकना निश्चित है ।
हम हमेशा हमें हमेशा यह आभास रहना चाहिए कि यह मनुष्य जीवन यह आयु क्षण क्षण बहती जा रही है, जैसे पहाड़ से गिरने वाली नदी जिसका पानी अब ऊपर नहीं आ सकता। अपनी इच्छाओं से परे उठते हुए अपनी शक्ति अनुसार तपश्चरण कर अपना जीवन सफल बनाना चाहिए और अपनी आत्मा का कल्याण करना चाहिए।
आज के कार्यक्रम में श्री नवीन कुमार नितिन, पंकज, अनंत, भावना, अंजू, गदिया सहित श्री प्रकाश अनिलकुमार, आलोक कुमार, अभिषेक ,अभिनव, अभिनंदन, अक्षत अरिंजय, आदि,आशीष मोदी सहित समस्त मोदी परिवार के सदस्य श्रीमती सुमन लता, रजनी, नेहा, सुरभि मोदी, श्री सुभाष सिंघई श्रीमती कल्पना सिंघई,श्री शोभालाल जैन श्रीमती चंदा जैन श्री संजय जैन, श्री संदीप जैन, जैन समाज के अन्य सदस्य उपस्थित थे।

Leave a Reply