0-पत्रकारवार्ता में मुख्यमंत्री भी शामिल हुए
रायपुर। मोदी सरकार ने विकास के नाम पर दो जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, एक का नाम है डेमोनेटाईजेशन और दूसरे का मोनेटाईजेशन। दोनों का व्यवहार एक जैसा है। डेमोनेटाईजेशन से देश के गरीबों, छोटे कारोबारियों को लूटा गया और मोनेटाईजेशन से देश की विरासत को लूटा जा रहा है, और दोनों ही तरीके से केन्द्र की मोदी सरकार पूँजीपतियों को फायदा पहुँचाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण उपक्रमों को एक-एक कर निजी हाथों में बेच रही है। खुदा न खास्ता अगर भविष्य में युद्ध हो जाय तो देश की सीमाओं से लगी सामरिक महत्व की सड़कों को भी दरकिनार कर निजी हाथों में बेचकर मोदी सरकार देश का बंटाधार कर रही है। उक्ताशय का आरोप राजीव भवन में आयोजित पत्रकारवार्ता में पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजस्थान प्रभारी और एआईसीसी के जनरल सेक्रेटरी अजय माकन ने लगाया। पत्रकारवार्ता में माकन ने बताया कि ढ़ाचागत आधार सृजन का लम्बा चौड़ा भाषण देश को विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा हर 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर दिया जाता है। जबकि हॉलात बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने कहा कि केन्द्र की नेशनल मोनोटाईजेशन पाईप लाईन केन्द्र सरकार ने अपने पूंजीपति मित्रों को बेची है। जनता की कमाई से सार्वजनिक उपक्रमों की नवरत्न मंडल कंपनियों को केन्द्र सरकार 60 साल में निर्मित होने के बाद लाभ की स्थिति में बेचने पर अमादा है। गुपचुप तरीके से किये जा रहे समझौते में राज्य सरकार की जमीनो को बिना राज्य सरकारों के अनुमति के बेचा जा रहा है। यह आपत्तिजनक है।
12वीं योजना योजना काल के दौरान ढांचागत आधार में निवेश को 36 लाख करोड़ रुपए समग्रित पर आंका गया. यह जीडीपी का 5.8 प्रतिशत औसत है. वित्तीय वर्ष 2018 और 2019 में यह अनुमान 10 लाख करोड़ पर आ गया. 12वीं योजना काल जो 2012 से 2017 के बीच था. उस दौरान औसतन 7.20 लाख करोड़ सालाना ढांचागत आधार पर निवेश किया जा रहा था. यह एनडीए शासन काल में 5 लाख करोड़ रुपए पर आ गया है. इससे सभी लोगों की उस शंका को बल मिलता है कि सरकार का मुख्य मुद्दा ढांचागत आधार को बेहतर करना नहीं है. इसका मुख्य उद्देश्य कुछ चुनिंदा उद्योगपति दोस्तों को उनके कारोबार और व्यापार में एकाधिकार का अवसर प्रदान करना है.
एकाधिकार-बाजार में चुनिंदा कंपनियों की मनमर्जी कायम हो जाएगी. सरकार भले कहती रहेगी की निगरानी के सौ तरह के उपाय हैं. उसके लिए नियामक संस्थाएं हैं. लेकिन सच इसके विपरीत है. यह हम सीमेंट के क्षेत्र में देख सकते हैं. जहां पर दो तीन कंपनियों का एकाधिकार है. वही बाजार में भाव को तय करते हैं. सरकार के तमाम नियामक प्राधिकरण और मंत्रालय उनके सामने असहाय नजर आते हैं. इससे विभिन्न क्षेत्रों में मूल्य निर्धारण और
बहुत से परिसंपत्तियों के मामले में निजी क्षेत्र पूंजी का निवेश एक लंबे दीर्घ काल तक करेगा. यह निवेश की जाने वाली राशि केवल अनुमानित है. वर्तमान समय में इसका मूल्य नहीं मिल रहा है. इसकी वजह यह है कि बहुत सारे परिसंपत्तियों के लिए, प्रत्यक्ष तौर पर (ह्वश्चद्घह्म्शठ्ठह्ल) इस समय प्राइवेट कंपनी द्वारा पूरी लागत का कुछ ही हिस्सा दिया जाएगा. जो पैसा दीर्घकाल में निवेश किया जाएगा. उसे एक तरह से सांकेतिक मौद्रिक मूल्य कहा जाना चाहिए.रोड मैप Ó में परिसंपत्तियों के मूल्यांकन को लेकर चार तरीकों या प्रस्ताव को लेकर जानकारी दी गई है. इनमें से एक (ष्टड्डश्चद्ग& कैपेएक्स एप्रोच वैल्युएशन है. जिसे इस तरह से उल्लेखित किया गया है.
कैपेक्स मूल्यांकन को 20 में से 11 परिसंपत्तियों के मामले में चिन्हित किया गया है. ऐसे में सरकार जिस 6 लाख करोड़ रुपए की बात कर रही है. वह भी सत्य नहीं है. इसकी वजह यह है कि इसमें से काफी राशि प्रत्यक्ष तौर पर निजी क्षेत्र द्वारा निवेश ही नहीं की जा रही है. यह सभी अनुमान आधारित मूल्यांकन है. जो दीर्घकाल में निजी क्षेत्र खर्च करेगा.
सुरक्षा और रणनीतिक हित
यूपीए शासनकाल में यह निर्णय किया गया था कि रणनीतिक परिसंपत्तियों का निजीकरण नहीं किया जाएगा. रेलवे लाइन, गैस पाइपलाइन को लेकर विशेष सतर्कता रखी जाती थी. उनको लेकर हमेशा एक सुरक्षात्मक दृष्टिकोण रखा गया. जिससे वह निजी हाथों में जाने से बची रहे. किसी भी तरीके से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी विदेशी शक्ति के हाथों में यह रणनीतिक परिसंपत्तियों न जाने पाएं.युद्ध के समय सेना के आवागमन के लिए रेलवे और राष्ट्रीय एयरलाइन का अपना महत्त्व हमेशा से रहा है. ऐसे में क्या यह सही नहीं है कि सरकार ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को भी पंगु बनाने का निर्णय किया है. अगर इन रणनीतिक परिसंपत्तियों को बेच दिया जाता है तो किसी आपात स्थिति में किस तरह के हालात होंगे. इसकी कल्पना की जा सकती है. गैस-पेट्रोलियम उत्पाद पाइपलाइन और राष्ट्रीय राजमार्ग भी हमेशा से रणनीतिक महत्त्व रखते रहे हैं. लेकिन इस सरकार को इसकी कोई चिंता नजर नहीं आती है।
पत्रकारवार्ता में प्रदेश कांग्रेस के विधायक दल के नेता एवं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वरिष्ठ नेता रमेश वर्ल्यानी, गिरीश देवांगन, सुशील आनंद शुक्ला, एवं अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शामिल हुए।
मोदी सरकार ने लगाई ‘मेगा डिस्काउंट सेल’, पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने सार्वजनिक उपक्रमों को एक-एककर निजी हाथों में बेच रही: माकन
