आखिर भाटापारा जिला गठन क्यों नहीं


भाटापारा। छत्तीसगढ़ में अभी स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर मुख्यमंत्री द्वारा 4 नए जिले की घोषणा की गई है जिसमें बलोदा बाजार अभी भी भाटापारा से अलग नहीं हुआ है। अथवा भाटापारा जिला गठन में विलंब क्यों है यह समझ से परे है।
क्योंकि इससे पहले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वर्गीय नंदकुमार पटेल ने भी प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए जिले गठन के संबंध में घोषणा किया था, और कहा था कि जब भी नए जिलों का गठन होगा भाटापारा का नाम सर्वप्रथम होगा।
तत्पश्चात 2018 विधानसभा विधानसभा चुनाव के पहले तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष एवं वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार बनने के पश्चात सबसे पहले भाटापारा को जिला बनाने के संबंध में स्थानीय लोकोत्सव मैदान के कार्यक्रम में घोषणा किया था, किंतु आज पर्यंत इस संबंध में अभी किसी भी प्रकार की राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलचल नहीं हो रहा है जबकि भाटापारा, सुहेला, सिमगा और नांघाट के क्षेत्रफल (23000 वर्ग किलोमीटर) यदि देखा जाए तो इसमें 218 ग्राम पंचायतें, 5 पुलिस थाना चौकी, 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 53 जनपद क्षेत्र आदि आते हैं ।जबकि इसी क्षेत्र से हमारे राष्ट्रीय राजमार्ग एवं रेल मार्ग का मुख्य प्रभाव भी है साथ ही जीवनदायिनी नदी शिवनाथ तीन तरफ से हमारे भाटापारा क्षेत्र को घेरे हुए हैं।
भाटापारा का कृषि उपज मंडी मध्य प्रदेश के जमाने में वर्ग एक श्रेणी में रहा है और आज भी पूरे छत्तीसगढ़ में भाटापारा कृषि उपज मंडी एक नंबर पर है जो आर्थिक व्यापारिक दृष्टिकोण से भी हमारा क्षेत्र परिपूर्ण है इतने अधिक प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद भी यदि हमारा क्षेत्र जिला नहीं बनता है तो यह हमारे लिए दुर्भाग्य की बात होगी । क्योंकि जिला गठन का मांग जिला संघर्ष समिति द्वारा विगत 30- 35 वर्षों से कर रहा है। और पूर्ववर्ती मध्य प्रदेश शासन के समय में भी यह मांग समय-समय पर उड़ते रहा है लेकिन आज तक हमारे साथ छलावा करते हुए हमें इस अपने हक और अधिकार से वंचित रखा जा रहा है । यह लंबित मांग प्रतिनिधि मंडल के मिलने से कुछ नहीं होगा।
हम चाहते हैं कि क्षेत्र के जनपद पंचायत ,ग्राम पंचायत, नगर पंचायत और स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधि सामूहिक त्यागपत्र दे तभी यह मांग पूरी हो सकती है अन्यथा प्रदेश पदाधिकारी और प्रकोष्ठों के अध्यक्ष रहते हुए इस मांग को पूर्ण नहीं करा सकते जो इस क्षेत्र के साथ छलावा होगा हमारा स्पष्ट मांग है और हमारा हक भी है कि अपने अधिकार के लिए हम लड़े।

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