बिलासपुर। एसडीएम कोर्ट से आए फैसले के बाद एसबीआर कालेज के ट्रस्टियों की नीयत पर सवाल खड़ा हो गया है। कालेज के सामने के मैदान को बेचने की अनुमति देने से कोर्ट ने साफ मनाही कर दिया है। एसडीएम देवेंद्र पटेल ने आदेश में कहा कि किसी स्थिति में कॉलेज की जमीन को बेचने की इजाजत नही दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा है कि इस जमीन को लेकर ट्रस्ट के सदस्यों की नीयत ठीक नही है।
एसडीएम कोर्ट ने लम्बी सुनवाई के बाद एसबीआर कालेज ट्रस्ट की जमीन पर फैसला सुना दिया है। एसडीएम देवेन्द्र पटेल की कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है कि कालेज की जमीन ट्रस्ट के मंशानुरूप शैक्षणिक गतिविधियों में उपयोग किया जा रहा है। जमीन पूरी तरह से सुरक्षित है। जमीन का उपयोग खेल मैदान के रूप में ही किया जा रहा है। कोर्ट ने ट्रस्ट के सभी दावों को खारिज करते हुए फैसले में दो टूक कहा है कि ट्रस्ट को जमीन बेचने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
किसी प्रकार का अतिक्रमण नहीं किया गया है। ट्रस्ट की तरफ से पेश किए गए कमोबेश सभी तर्क तथ्यहीन हैं। सुनवाई के दौरान पाया गया कि ट्रस्ट की नीयत जमीन को लेकर ठीक नहीं है, ना तो जमीन पर अतिक्रमण ही हुआ है और ना ही छात्रहित में जमीन को बेचा जाना उचित होगा। इसलिए ट्रस्ट को जमीन बेचने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
मालूम हो कि एसबीआर कालेज की स्थापना एसबीआर ट्रस्ट ने 1972 में किया है। कालेज के सामने ट्रस्ट की करीब ढाई एकड़ जमीन है। जमीन का उपयोग वर्तमान में कालेज के खेल मैदान के रूप में किया जा रहा है। जबकि ट्रस्ट का उद्देश्य भी जमीन का उपयोग शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर किया जाना बताया गया है। इसलिए जमीन को बेचकर दूसरी जगह जमीन खरीदने की बात उचित नहीं है।
जैसा की वर्तामन ट्रस्ट की तरफ से सुनवाई के दौरान कहा गया है। एसडीएम कोर्ट ने दूसरे प्रमुख बिन्दु में कहा कि साल 1944 में ट्रस्ट का गठन किया गया। 2014 तक ट्रस्ट में सिद्धान्तों और ट्रस्टियों में भी किसी प्रकार का परिवर्तन नही हुआ। साल 2014 के बाद यकायक नए सदस्य आ जाते हैं। पहले कहते हैं कि ट्रस्ट की बैठक नहीं हुई..फिर जमीन बेचने के लिए आवेदन करते हैं। इस दौरान ट्रस्ट ने कोर्ट को बताया कि जमीन बेचने की मंशा नहीं है। फिर जमीन बेचने के लिए आवेदन करते हैं। इससे जाहिर होता है कि वर्तमान ट्रस्ट की नीयत ठीक नहीं है। वैसे भी जमीन का उपयोग ट्रस्ट के उद्देश्य के अनुसार शैक्षणिक हित में किया जा रहा है।
एसबीआर कालेज मैदान को लेकर पिछले कुछ सालों से ट्रस्ट और ट्रस्ट फाउंडर परिवार के बीच विवाद चल रहा है। बजाज परिवार के सदस्य अतुल बजाज ने ट्रस्ट के गठन और कालेज मैदान की बिक्री को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अतुल बजाज ने कालेज की जमीन को बेचने के निर्णय के खिलाफ एसडीएम कोर्ट में भी वाद दायर किया था। अतुल बजाज ने सिविल कोर्ट में भी जमीन बेचे जाने के ट्रस्ट के फैसले को चुनौती दी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
