भाटापारा। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे। उनके जीवन से ही राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को सीख लेनी चाहिए। उनका स्वयं का जीवन प्रेरणादाई अनुशासित तथा निष्कलंक था। उक्त बातें भाजपा के जिला महामंत्री राकेश तिवारी ने भाजपा कार्यालय में जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में कही। श्री तिवारी ने आगे कहा कि डॉक्टर मुखर्जी दुनिया के ऐसे प्रथम व्यक्ति हुए जिन्हें मात्र 33 वर्ष की आयु में ही कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति होने का गौरव प्राप्त हुआ। लगातार 4 वर्षों तक कुलपति रहने के पश्चात उनके कार्यों से प्रभावित होकर क्षेत्र की जनता ने उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया जिसके परिणाम स्वरूप वे कोलकाता विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि के रूप में बंगाल विधान परिषद के सदस्य बने 1943 में बंगाल में पड़े अकाल के दौरान डॉ मुखर्जी का मानवतावादी पक्ष निखर कर सामने आया जिसे बंगाल के लोग कभी भुला नहीं सकते आजादी के पश्चात देश के प्रथम मंत्रिमंडल में वे जवाहरलाल नेहरू की अंतरिम सरकार में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री बने किंतु नेहरू एवं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के बीच हुए समझौते के पश्चात 6 अप्रैल 1950 को उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक गुरु गोलवलकर जी से परामर्श देकर मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को जनसंघ की स्थापना की और जब जनसंघ की स्थापना हुई उस समय देश विपरीत परिस्थितियों से गुजर रहा था जनसंघ का उद्देश्य साफ था कि वह अखंड भारत की कल्पना का कार्य करना चाहता था वह भारत को खंडित भारत करने के पक्ष में नहीं था जनसंघ का स्पष्ट मानना था कि भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने आएगा
तिवारी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा शेख अब्दुल्लाह की बातों पर आकर कश्मीर में धारा 370 लगाए जाने का पुरजोर विरोध करते हुए सिंह गर्जना के साथ डॉक्टर मुखर्जी ने कहा कि एक देश में दो विधान दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे और इसी का विरोध करते हुए जवाहरलाल नेहरू द्वारा कश्मीर में प्रवेश करने के लिए लागू की गई परमिट को समाप्त करने के लिए उन्होंने कश्मीर में बिना परमिट ही जाने का निर्णय लिया और जब 8 मई 1953 को सुबह 6:30 बजे दिल्ली रेलवे स्टेशन से पैसेंजर ट्रेन में अपने समर्थकों दिन में अटल बिहारी वाजपेई भी उनके साथ थे के साथ सवार होकर डॉक्टर मुखर्जी पंजाब के रास्ते जम्मू के लिए निकले रास्ते में हर जगह डॉक्टर मुखर्जी की एक झलक पाने एवं उनका अभिवादन करने के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ता था और आखिरकार 11 मई 1953 को कुख्यात परमिट प्रथा का उल्लंघन करने पर कश्मीर में प्रवेश करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और गिरफ्तारी के दौरान ही उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में 23 जून 1953 को मौत हो गई डॉक्टर मुखर्जी की माताजी ने नेहरू को 29 जून 1953 के शोक संदेश का 4 जुलाई 1953 को उत्तर देते हुए पत्र लिखा जिसमें उन्होंने उनके बेटे की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत की जांच की मांग की जवाब में पंडित नेहरू ने जांच की मांग को खारिज कर दिया श्री तिवारी ने अंत में कहा कि भारतीय जनसंघ से लेकर भाजपा के प्रत्येक घोषणा पत्र में अपने बलिदानी नेता डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के इस उद्घोष वाक्य को कि हम संविधान की अस्थाई धारा 370 को समाप्त करेंगे सदा लिखा जाता रहा ।समय आया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त 2019 को धारा 370 को राष्ट्रहित में समाप्त करने के निर्णय को दोनों सदनों से पारित कर डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि दी अंत में श्री तिवारी ने कहा कि वे महापुरुष बहुत भाग्यशाली होते हैं जिनकी आने वाली पीढ़ी अपने पूर्वजों को की कही गई बात को साकार करती है
समारोह में हज कमेटी के सदस्य सलीम खान जिला मंत्री महाबल बघेल विधायक प्रतिनिधि आशीष जायसवाल, उपाध्यक्ष नंद किशोर अग्रवाल ने भी अपने विचार रखेसमारोह का संचालन मंडल अध्यक्ष मनेंद्र सिंह सोनी ने किया अंत में युवा मोर्चा के अध्यक्ष आशीष टोडर के नेतृत्व में वृक्षारोपण कार्यक्रम भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया
इस अवसर पर महामंत्री योगेश अनंत, गोपाल देवांगन उपाध्यक्ष सुरेश मिश्रा युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष सुनील यदु युवा मोर्चा के अध्यक्ष आशीष टोडर, महिला मोर्चा की अध्यक्ष नीरा साहू महामंत्री चंद्रकला साय, जिला पंचायत सदस्य कमलेश देवांगनपूर्व जनपद उपाध्यक्ष परस देवांगन अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण बंटी टंडन, मंत्री राजा शर्मा अजीत निषाद, मुकेश साहू संजय ठाकुर ,जय संत कौशल शिव वर्मा विजय यादव दीपक जांगड़े बंसी यादव जितेंद्र कुमार लालू वर्मा गोपी ध्रुव अश्वनी चंद्राकर शेखर ठाकुर देवेंद्र साहू किशन यादव दरवेश हबलानी तरुण मूंधड़ा, लालू वर्मा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता गण उपस्थित थे
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे, उनके जीवन से ही राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को सीख लेनी चाहिए: तिवारी
