भाटापारा। जीवन का मुख्य आधार है शिक्षा जिसके बिना एक उन्नत और सभ्य समाज की कल्पना भी नही की जा सकती है। परंतु आज के परिवेश में शिक्षा का जिस तरह से व्यवसायीकरण हुआ है कही न कही गुणवत्ता काफी पीछे छूट गई है। कोरोनकाल के इस विकट परिस्थिति शिक्षा में गुणवत्ता बनाये रखना भी एक चुनौती है जिसे आधारशिला के शिक्षक बखूबी निभा रहे है। अतः आधारशिला स्कूल भाटापारा के प्राचार्य नितेश रंजन भास्कर जिन्हें 2019 में शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और अच्छा कार्य करने के लिए उन्हें यंग प्रिंसिपल ईयर से सम्मानित भी किया गया था। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता से भरी शिक्षा बच्चों को संस्कारों में ढालता है और हार को जीत में बदलना सिखाता है। ज्ञान, कौशल और नागरिकता के संस्कार शिक्षा के उद्देश्य हैं। इससे हम पीढ़ियों से संचित ज्ञान परम्परा से लाभान्वित होते हैं। कौशल हमें आजीविका के प्रबंधन के योग्य बनाता है और नागरिकता के संस्कार से ईमानदारी, परिश्रम, कर्त्तव्य निष्ठा, चारित्रिक बल तथा देशभक्ति के गुण विकसित होते हैं। इस विद्यालय में शिक्षा हर बच्चे की वयक्तिगत विभिन्नता का ध्यान रखने वाली होगी। हर बच्चे के सीखने का तरीका अलग-अलग होता है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे के सीखने के तरीकों को अपने में समाहित करने वाली होगी ताकि क्लास में कोई भी बच्चा सीखने के पर्याप्त अवसर से वंचित न रह जाये। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही हर बच्चे को विभिन्न गतिविधियों, खेल और प्रोजेक्ट वर्क के माध्यम से उनको सीखने का मौका देने वाली भी होगी। उन्होंने हमारे जीवन को संवारने वाले शिक्षकों को जो कोरोना काल में भी दिन रात मेहनत कर अपनी मूल जिम्मेदारी को निभाते हुए समाज को संक्रमण से बचने के लिए जागरूक कर रहे हैं। शिक्षकों के इस त्याग को प्राचार्य ने अपनी कृतज्ञता प्रकट की है।
कक्षा बारहवीं के छात्रों से प्राचार्य ने कहा कि सफलता के लिए संकल्पित होकर लक्ष्य तय कर परिश्रम आवश्यक है। परीक्षा में उत्साह से भरे रहें पर तनाव न पालें। कोरोना काल की कठिन परिस्तिथियों में शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन प्रक्रिया से निरन्तर विद्यार्थियों की शैक्षिणक कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षा में गुणवत्ता मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता
