रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी नियमों को ताक पर रख पदोन्नति के मामलों को कोर्ट में फसाने का काम कर रहे हैं। ज्ञात हो कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न स्तरों पर पदोन्नति की प्रक्रिया जारी की जा रही है, जिसमें प्राचार्य, व्याख्याता, माध्यमिक शाला प्रधानपाठक, उच्च वर्ग शिक्षक तथा प्राथमिक शाला प्रधानपाठकों को उच्च पदों पर योग्यतानुसार पदोन्नति दी जानी है।
समय-समय पर विभिन्न पदों की वरिष्ठता सूची का प्रकाशन भी किया जाता रहा है, लेकिन यह खेद का विषय है कि पिछले कई वर्षों से पदोन्नति की प्रक्रिया अलग-अलग कारणों से बाधित होती रही है। कुछ महीने पहले विभाग द्वारा प्रधानपाठक माध्यमिक शाला के पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया अपनायी गई थी लेकिन कुछ अधिकारियों के द्वारा अपनों को लाभान्वित करने के प्रयास के चलते प्रक्रिया दोषपूर्ण होने के कारण माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप के द्वारा स्टे हो गया।
वर्तमान में पुनः व्याख्याता पद की पदोन्नति हेतु विभाग द्वारा प्रक्रिया जारी की जा रही है जिसके लिए वरिष्ठता सूची जारी किया जा चुका है ।शालेय शिक्षक प्रधान पाठक संघ के प्रांताध्यक्ष मनोज साहू ने बताया कि व्याख्याता पद की पदोन्नति के लिए उच्च वर्ग शिक्षक तथा प्रधानपाठक प्राथमिक जो पांच वर्ष का अनुभव रखतें हैं और प्रशिक्षित हों, वही पात्र हैं। व्याख्याता के पदों की पूर्ति की कार्यवाही लोक शिक्षण संचालनालय छत्तीसगढ़ द्वारा की जाती है बाकायदा जिसके लिए वरिष्ठता सूची का प्रकाशन भी किया जा चुका था जिसे आज भी संचालनालय के वेबसाईट पर देखा जा सकता है। माह अप्रैल में वरिष्ठता सूची की क्रम संख्या के आधार पर टी संवर्ग के शिक्षकों व प्रधानपाठकों के पांच वर्षों का गोपनीय प्रतिवेदन तथा चल-अचल संपत्ति का विवरण समस्त जिलों से जमा करने हेतु आदेश जारी किया गया लेकिन जब ई संवर्ग की पदोन्नति हेतु पांच वर्षों का गोपनीय प्रतिवेदन मंगवाने की बारी आयी तो जारी वरिष्ठता सूची के क्रम संख्या को आधार नहीं मानते हुए मनमाने तरीके से सन् को आधार मानकर गोपनीय प्रतिवेदन तथा चल-अचल संपत्ति का विवरण मंगवाया गया है जो लोक शिक्षण संचालनालय की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है? एक ही कार्यालय में एक ही पद पर पदोन्नति हेतु अलग-अलग मापदंडों का प्रयोग किसको लाभान्वित करने के लिए अपनाया जा रहा है? या विभाग की मंशा पदोन्नति की न होकर वर्षों से पदोन्नति की बाट जोह रहे शिक्षकों को पदोन्नति से वंचित करने का षडयंत्र किया जा रहा है।
यहां आश्चर्यजनक बात यह भी है कि शिक्षकों के संगठनों के वरिष्ठ नेता जो पदोन्नत होकर उच्च पदों पर विराजमान हैं वे भी अपने ही साथियों के हक को छिनकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का कुत्सित प्रयास कर रहें हैं।
आगामी दिनों में कोरोना के बाद विद्यालयों के खुलने पर जब शिक्षा विभाग अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करने की तैयारी करता तो विभाग के कुछ ओछी मानसिकता के अधिकारियों के षडयंत्रों का शिकार हो रहा है।
हैरत करने वाली बात यह भी है कि जो शिक्षा विभाग आनलाईन शिक्षा देने का दावा करते फूले नहीं समाता वह खुद अपने कर्मचारियों की जानकारियां आनलाईन करने में असमर्थ है अगर सारी जानकारियां आनलाईन रखने का दावा करते हैं तो बार-बार शिक्षकों से गोपनीय प्रतिवेदन और चल-अचल संपत्ति का विवरण की मांग क्यों करते हैं? कुछ शिक्षकों के संगठनों के द्वारा इस संबंध में उच्च अधिकारियों से शिकायत की गयी है, देखना यह है कि मामले को सुधारा जाता है या फिर शिक्षकों को न्यायालय से ही न्याय मिलेगा।
संघ के सुरेश वर्मा, संदीप दिवान, पुनीत सोनवानी, शिव वर्मा, खिलेंद्र साहू, रमेश श्रीवास, मोती लाल साहू, दिनेश वर्मा ने मांग की है कि ब्याख्याता के पर पदोन्नति संचालक लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा दिनांक :16/02/21 को जारी अंतिम वरिष्ठता सूची के आधार पर दिया जाए। शिक्षा विभाग में पदोन्नति के लिए सभी के लिए एक ही पैमाना होना चाहिए। नियमो को ताक में रखकर एवं गलत ब्याख्या कर योग्य होते हुए भी पदोन्नति से वंचित शिक्षा विभाग में बैठे कुछ अधिकारियों के द्वारा किया जा रहा है जो कि सर्वथा अनुचित है।
पदोन्नति को लेकर छग स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी कर रहे नियमों की अवहेलना-शालेय शिक्षक प्रधान पाठक संघ ने जताई आपत्ति
