किसान आंदोलन के 6 माह पूरे, केंद्र सरकार की नींद अभी तक नहीं टूटी- छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार से सीख ले: अश्वनी साहू

पाटन। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अश्वनी साहू ने कहा है कि संविधान में वर्णित भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकार हैं। वैसे ही देश में राजनीतिक पार्टियों के लिए आदर्श संहिता, व्यवस्था, अधिकार, कर्तव्य है। पर भारतीय जनता पार्टी की केंद्र में बैठी सरकार जिस तरीके से देश के अन्नदाता किसानों के साथ अन्याय और भेदभाव कर रही है,वह निंदनीय हैं l पूंजीपतियों को सीधा लाभ एवं अन्य तरीके से पुरस्कृत कर रही है, इससे साफ जाहिर होता है कि नरेंद्र मोदी की सरकार किसान विरोधी है l देश की संसद को भारत के नागरिकों का मंदिर कहा गया है, मंदिर में भेदभाव नहीं होता बल्कि मंदिरों में पीड़ित, आमजनों की पुकार प्रथम ग्राह्य होता है l लेकिन पिछले समय नरेंद्र मोदी की सरकार संसद में तीन कृषि काले कानून को एकतरफा मंजूरी देकर किसानों का दमन करना चाहती है और किसानों की कृषि भूमि पूंजीपतियों के हवाले करना चाहती है। जबरिया देश के अन्नदाता किसानों पर कृषि कानून लागू करना चाहते हैं यह लोकतंत्र का अपमान है। देश की अन्य पार्टी के सांसद, जो संसद में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं उन नेताओं की आवाज को दबाने का प्रयास हो रहा है, यह भी निंदनीय है l देश के किसान तीन कृषि काले कानून के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे हैं। न्याय मांगने वाले किसानों को आज पूरे 6 माह हो गए है। जागते हुए किसान अपनी मांग के संशोधन की आस में है , पर नरेंद्र मोदी की सरकार कुंभकरणी सोई हुई है l गर्मी बरसात सर्दी की परवाह किये बिना दिन रात अपनी माँ, कृषि भूमि के लिए संघर्ष कर रहे हैं। और तो और कोरोना संक्रमण काल का भय भी किसान भाइयों के मजबूत इरादे को भी नहीं डिगा सके l इससे बढ़कर किसान भाइयों का मातृ भक्ति का और कोई उदाहरण नहीं हो सकता ।
आज किसान आंदोलन के 6 माह पूरे हो गये। यह आंदोलन सिर्फ आंदोलन ही नहीं बल्कि अपने आने वाली पीढ़ी के हक और अधिकार की लड़ाई है l किसान भाई विगत 6 माह से दिल्ली सीमा पर जाग रहे हैं और केंद्र की बहरी गूंगी सरकार सो रही है। अब किसानों को क्या करना चाहिए?
थाली बजाना चाहिए, ताली बजाना चाहिए, मोबाइल का टॉर्च जलाना चाहिए, दीया जलाना चाहिए, या घंटी बजाना चाहिए ? हो सकता है शायद मोदी जी का ही फार्मूला काम में आ जाए ? देश की जनता को बड़े-बड़े सब्ज बाग दिखाने वाले, किसानों की आय दोगुनी करने की बात कहने वाले, क्या हुआ ? आय तो दुगुनी नहीं हुई, पर किसानों के सिर पर अतिरिक्त भार के रूप में दवाई और खाद के दाम जरूर बढ़ गए। पूंजीपतियों को पिछले दरवाजे से सब्सिडी के नाम पर लाभ दिलाने का काम जरूर हुआ है। हमारा देश प्रजातांत्रिक है, जो जनता किसी को ताज दे सकती है तो वही जनता किसी का ताज को भी छीन सकती है। सत्ता के मद में इतराने वालों का घमंड चकनाचूर ही हुआ है।
श्री साहू ने आगे कहा- एक तरफ छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल की सरकार जो समर्थन मूल्य से ऊपर की राशि (अंतर राशि) कुल मिलाकर 2500 रुपया अन्नदाता किसानों को राजीव गांधी न्याय योजना के तहत दे रही है। इसके अतिरिक्त अभी वर्तमान में प्रदेश के किसानों के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं जिसमें तेरह अन्य फसल कोदो, कुटकी, अरहर, तिलहन आदि को भी राजीव गांधी न्याय योजना में शामिल किया गया है। दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी की सरकार, अन्याय योजना चला रही है l

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