कोरोना संकट काल में गौठान बना आजीविका व आय का साधन


भाटापारा। छत्तीसगढ़ शासन की गौठान योजना का लाभ समूह की महिलाओं को आजीविका के रूप में मिल रहा है। इस योजना से जहाँ एक ओर गौवंस/पशुओं का रखरखाव पालन अच्छे तरीके से किया जा रहा है वही दूसरी तरफ इसे बहुविधि आजिविका केंद्र के रूप में लगातार विकसित किया जा रहा है ताकि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ किया जा सके। इसके लिए कलेक्टर श्री सुनील जैन के मार्गदर्शन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. फरिहा आलम सिद्दीकी के नेतृत्व में कृषि विज्ञान केंद्र भाटापारा द्वारा लगातर गौठान को मल्टीएक्टिविटी केंद्र के रूप में विकसित करने का कार्य किया जा रहा है।
महिला कृषक समूह सब्जी उत्पादन कर बन रही आत्मनिर्भर
प्रदेश सरकार की नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना के अंतर्गत ग्राम कडार की महिला समूह आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हैं । कृषि विज्ञान केंद्र भाटापारा के तकनीकी मार्गदर्शन में सब्जी उत्पादन हेतु महिला समूहों द्वारा सब्जी बाड़ी विकास का कार्य किया जा रहा है । मनरेगा अंतर्गत स्वीकृत सामुदायिक बाड़ियों से महिला समूह के सदस्यों द्वारा विभिन्न प्रकार के ताजी सब्जी भाजी का उत्पादन कर ग्रामीण बाजार में विक्रय कर लाभ कमा रही हैं । इस योजना के तहत ग्राम कड़ार के आदिवासी महिला स्व सहायता समूह के सदस्यों द्वारा 2 एकड़ सब्जी बाड़ी में भिंडी, बरबट्टी, लौकी, तरोई, गवारफल्ली, एवं हरी पत्तीदार सब्जियों की खेती की जा रही है । वर्तमान में समूह की महिलाओं को सामुदायिक बाड़ी में कार्य के लिए मनरेगा योजनान्तर्गत मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है । कोरोना संकट की स्थिति में आसपास के ग्राम पंचायतों के स्थानीय बज़ार व घर पहुँच सेवा भी दी जा रही है। जिससे अभी लाकडाऊन में गांव एवं आसपास के गांवों में आसानी से सब्जी उपलब्ध हो रहे हैं। जिससे समुह के महिलाओं के लिए आय का साधन बना हुआ है। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख प्रदीप कश्यप द्वारा लगातार समूह को स्थानीय स्वरोजगार हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र भाटापारा के तकनीकी मार्गदर्शन में गोठान ग्राम कड़ार में महिला स्व सहायता समूह द्वारा मशरूम का उत्पादन भी किया जा रहा है। केंद्र के विशेषज्ञों द्वारा पूर्व में समूह की महिलाओं को मशरूम उत्पादन का लाभ बताकर इससे आत्मनिर्भर बनने एवं कम खर्चे में अधिक आमदनी के विषय में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई है । केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख प्रदीप कश्यप ने बताया कि मशरूम में सभी प्रकार के पोशाक तत्व जैसे कि प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट, आवश्यक लवण एवं विभिन्न विटामिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है । इसलिए इसे खाने से शरीर को आवश्यक सभी पोषक तत्वों कि प्राप्ति होती है । मशरूम कुपोषण को दूर करनें का चमत्कारी गुण रखता है साथ ही मशरूम में औषधीय गुण भी पाये जाते हैं । इन लाभों को देखते हुए केंद्र द्वारा मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं । गौठान ग्रामों में महिला समूहों द्वारा आर्थिक रूप से सशक्त होनें के लिए मशरूम कि खेती को चुना जा रहा है । उन्होनें बताया मशरूम का उपयोग समान्यतः सब्जी के रूप में किया जाता है परंतु इससे विभिन्न प्रकार के व्यंजन भी तैयार किया जा सकता है जो कि बहुत ही पौष्टिक एवं कुपोषण दूर करनें में सहायक है । मशरूम का उपयोग सब्जी के साथ साथ बड़ी, पापड़, आचार और मशरूम पावडर आदि पोषण पदार्थ बनाने में किया जा सकता है ।

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