पान की ब्रिकी में बड़ी गिरावट, गुटके की पौ-बारह

भाटापारा। समय के साथ इन दिनों नगर की पान दुकानों में पान की बिक्री औंधे मुंह नीचे गिर चुकी है, पिछले साल कोरोना महामारी के चलते वह लॉक डाउन के बाद पान की बिक्री में जबरदस्त कमी देखी गई है जबकि इसके ठीक विपरीत गुटको की बिक्री में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है मतलब साफ है कि गुटका खाने वालों की संख्या बहुत अधिक बढ़ चुकी है इसलिए गुटके की बिक्री पान के बिक्री की तुलना में कहीं अधिक है पिछले साल हुए लॉकडाउन के कारण पश्चिम बंगाल से आने वाला पान नहीं आ पा रहा था जिसकी वजह से जो लोग पान खाया करते थे वह लोग भी गुटका खाना शुरु कर दिए थे फिर बाद में उनकी गुटका खाने की आदत पड़ गई फलस्वरूप गुटके की मांग लगातार बढ़ती चली गई गत वर्ष लॉकडाउन रहने की वजह से चोरी-छिपे गुटको की खूब जबरदस्त बिक्री हो रही थी आज इसकी कीमत भी अंधाधुन बढ़ गई थी इस वर्ष भी कमोबेश कुछ वैसी ही स्थिति बनी हुई है हालांकि इस बार उतने अधिक दाम नहीं बढ़ पाए और लोगों को आसानी से गुटका उपलब्ध हो जा रहा है। कहने को तो तंबाकू युक्त गुटखे की बिक्री प्रतिबंधित है परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में इसका व्यापार काफी फल-फूल रहा है और जमकर तंबाकू युक्त गुटखे की बिक्री हो रही है।
गुटखा से विभिन्न रोगों के शिकार हो रहे हैं
हालांकि जानकारों का कहना है कि पान की तुलना में गुटखा जानलेवा साबित होता है बावजूद इसके गुटका खाने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और लोग बिना डरे हिचके अंधाधुन गुटका का सेवन किए जा रहे हैं गुटका खाने वालों में ज्यादातर बच्चे वह युवा शामिल है जिसके कारण लोग बड़े पैमाने पर विभिन्न रोगों के शिकार हो रहे हैं। इस मामले में जानकारों का स्पष्ट मत है कि गुटका का सेवन लोगों को नहीं करना चाहिए क्योंकि ज्यादातर लोग गुटका खाने के बाद उसे एक तरफ गाल में दबाकर रखते हो जिससे रोग होने की पूरी संभावना रहती है इसलिए जितना हो सके लोगों को गुटके से परहेज करना चाहिए

Leave a Reply