दुर्ग। हाईप्रोफाइल अभिषेक मिश्रा हत्याकांड में आज फैसला आ गया है। 2015 में अभिषेक मिश्रा की हत्या हुई थी। 2016 से यह केस कोर्ट में है। जिसमें लगातार सुनवाई हुई। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की थी और आज फैसला आया है जिसमें आरोपी विकास जैन और उसके चाचा अजीत को आजीवन कारावास जबकि किम्सी को इस मामले में दोष मुक्त किया गया है।
गौरतलब है कि भिलाई में हुुआ बहुचर्तित अभिषेक मिश्रा हत्याकांड फिल्म दृश्यम की कहानी से मिलता जुलता है। साल 2015 में 9 नवम्बर की शाम पूरे देश में ख्यातिप्राप्त शंकराचार्य इंजीनियरिंग काॅलेज के चेयरमेन आईपी मिश्रा के इकलौते बेटे अभिषेक मिश्रा का अपहरण हुआ था।
बेहद ही हाईप्रोफाइल इस मामले ने पूरे प्रदेश में खलबली मचा दी थी। हाईप्रोफाइल मामले को देखते हुए पुलिस ने भी इसे सुलझाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था।
यही वजह थी कि पूरे देश के करीब 1 करोड़ मोबाइल फोन की डिटेल खंगालने के बाद पुलिस की निगाह भिलाई में रहने वाले सेक्टर-10 निवासी विकास जैन के उपर आ टिक गई थी।
पुलिस ने जब कॉल डिटेल को आधार बनाकर पूरी जांच शुरु की तो घटना के करीब 44 दिन बाद आरोपी विकास जैन के चाचा अजीत के स्मृति नगर निवास पर बगीचे में अभिषेक की सड़ी गली लाश बरामद हुई थी। आरोपियों ने बेहद ही शातिराना अंदाज में लाश को गड़ाकर उसमें सब्जियां उगा दी थी। पुलिस ने लाश के पास हाथ का कड़ा, अंगूठी, और लाॅकेट देखकर अभिषेक की लाश होने की पुष्टि की थी। लाश का डीएनए टेस्ट भी कराया गया था।
मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था जिसमें अभिषेक के काॅलेज में पढ़ाने वाली प्रोफेसर किम्सी, उसका पति विकास और उसका चाचा अजीत शामिल था। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद लगातार इस मामले की जांच की गई और जांच पूरी होने के बाद इसे दुर्ग न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। करीब 5 साल (2016 से) तक ये मामला दुर्ग जिला न्यायालय में चल रहा था। पूरी जांच और गवाही होने के बाद आज दुर्ग जिला न्यायालय ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है।
हाईप्रोफाइल अभिषेक मिश्रा हत्याकांड में किम्सी दोषमुक्त, विकास-अजीत को आजीवन कारावास
